रायपुर / छत्तीसगढ़
(हाइलाइट्स)
- पिछले दो वर्षों में 532 माओवादी मारे गए
- 2704 नक्सलियों ने किया आत्मसमर्पण
- सरकार का दावा – राज्य नक्सलवाद के खात्मे की कगार पर
- विकास और सुरक्षा रणनीति साथ-साथ
सुरक्षा मोर्चे पर निर्णायक बढ़त
रमेन डेका ने बजट सत्र के दौरान अपने अभिभाषण में कहा कि छत्तीसगढ़ अब नक्सलवाद के खात्मे की निर्णायक स्थिति में पहुँच चुका है। उन्होंने बताया कि पिछले दो वर्षों में सुरक्षा बलों की सघन और समन्वित कार्रवाई के परिणामस्वरूप 532 माओवादी मारे गए हैं, जबकि 2704 नक्सलियों ने मुख्यधारा में लौटते हुए आत्मसमर्पण किया है। राज्यपाल ने इसे सुरक्षा एजेंसियों, केंद्रीय बलों और राज्य पुलिस के संयुक्त अभियान की बड़ी सफलता बताया।
आत्मसमर्पण नीति और पुनर्वास की भूमिका
राज्यपाल ने कहा कि केवल मुठभेड़ों के जरिए नहीं, बल्कि प्रभावी आत्मसमर्पण और पुनर्वास नीति के कारण भी नक्सल प्रभाव कमजोर हुआ है। आत्मसमर्पण करने वाले माओवादियों को पुनर्वास पैकेज, कौशल प्रशिक्षण और रोजगार के अवसर उपलब्ध कराए जा रहे हैं, जिससे वे सामान्य जीवन की ओर लौट सकें। उन्होंने यह भी रेखांकित किया कि सरकार की रणनीति “सुरक्षा और विकास” दोनों को समानांतर रूप से आगे बढ़ाने की है, ताकि नक्सल प्रभावित इलाकों में बुनियादी सुविधाएँ तेजी से पहुँचे।
विकास से बदलेगी तस्वीर
राज्यपाल ने विश्वास जताया कि सड़क, शिक्षा, स्वास्थ्य और संचार सुविधाओं के विस्तार से आदिवासी और दूरस्थ क्षेत्रों में सकारात्मक परिवर्तन दिख रहा है। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार का लक्ष्य केवल हिंसा पर नियंत्रण नहीं, बल्कि प्रभावित क्षेत्रों में स्थायी शांति और विश्वास बहाली है। उनके अनुसार, बीते वर्षों में जो आँकड़े सामने आए हैं, वे इस बात के संकेत हैं कि छत्तीसगढ़ अब नक्सलवाद के अंत की दिशा में ठोस कदम बढ़ा चुका है।
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