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Friday, February 20, 2026

सीमाओं पर विकास की नई रोशनी: छत्तीसगढ़ के मीडिया दल ने सिक्किम के थेगु में देखा ‘वाइब्रेंट’ बदलाव…

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रायपुर / छत्तीसगढ़

हाइलाइट्स:

  • 13,000 फीट की ऊंचाई पर बसे थेगु गांव का मीडिया दल ने किया दौरा
  • आईटीबीपी के ‘हिमवीर’ स्वास्थ्य, पानी, राशन और पशु चिकित्सा सेवाओं में निभा रहे अहम भूमिका
  • सिक्किम के 63 गांवों में 188.9 करोड़ रुपये से लागू है वाइब्रेंट विलेज प्रोग्राम

Press Information Bureau रायपुर द्वारा आयोजित मीडिया डेलिगेशन ने सिक्किम के सीमावर्ती क्षेत्र में स्थित थेगु गांव का दौरा कर वहां हो रहे विकास कार्यों का अवलोकन किया। समुद्र तल से लगभग 13,000 फीट की ऊंचाई पर और भारत-चीन सीमा के निकट बसे इस गांव में पत्रकारों ने केंद्र सरकार की वाइब्रेंट विलेज प्रोग्राम (VVP) की जमीनी हकीकत को समझा। कठिन भौगोलिक परिस्थितियों और अत्यधिक ठंड के बीच यह गांव अब बुनियादी सुविधाओं से सशक्त होता दिखाई दे रहा है। मीडिया प्रतिनिधियों ने देखा कि किस तरह सीमावर्ती इलाकों में विकास केवल कागज़ों तक सीमित नहीं, बल्कि वास्तविक परिवर्तन का रूप ले चुका है।

इस दौरान Indo-Tibetan Border Police (आईटीबीपी) के डिप्टी कमांडेंट अरिमर्दन कुमार सिंह ने बताया कि बल की भूमिका केवल सीमा सुरक्षा तक सीमित नहीं है। उन्होंने कहा, “हम यहाँ पानी, राशन और आवश्यक स्वास्थ्य सेवाओं की उपलब्धता सुनिश्चित करते हैं। ग्रामीणों की आजीविका पशुपालन पर आधारित है, इसलिए नियमित स्वास्थ्य और पशु चिकित्सा शिविर आयोजित किए जाते हैं।” दुर्गम मौसम में बुनियादी ढांचे का निर्माण और रखरखाव भी आईटीबीपी की प्राथमिकताओं में शामिल है। स्थानीय निवासियों का मानना है कि ‘हिमवीरों’ की उपस्थिति ने उनके जीवन में भरोसा और स्थिरता लाई है, जिससे वे सीमावर्ती कठिन परिस्थितियों में भी आत्मविश्वास के साथ रह पा रहे हैं।

सिक्किम में वाइब्रेंट विलेज प्रोग्राम के तहत 63 चिन्हित गांवों में 188.9 करोड़ रुपये का बजटीय आवंटन किया गया है। यह पहल Ministry of Home Affairs के अंतर्गत 15 फरवरी 2023 को स्वीकृत केंद्रीय प्रायोजित योजना का हिस्सा है, जिसका उद्देश्य उत्तरी सीमा से सटे 19 जिलों के 662 गांवों में समग्र विकास लाना है। कार्यक्रम पर्यटन, सांस्कृतिक विरासत संरक्षण, कौशल विकास, सड़क और डिजिटल कनेक्टिविटी जैसे क्षेत्रों पर केंद्रित है। इस व्यापक दृष्टिकोण का लक्ष्य केवल आधारभूत सुविधाएं देना नहीं, बल्कि सीमावर्ती बस्तियों को आत्मनिर्भर और जीवंत समुदायों में बदलना है, ताकि पलायन रुके और राष्ट्रीय सुरक्षा की सामाजिक आधारशिला मजबूत हो सके।

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