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Monday, February 16, 2026

राजिम कुंभ 2026: आध्यात्मिक आस्था और सांस्कृतिक गौरव का भव्य समापन…

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राजिम / छत्तीसगढ़

हाइलाइट्स:
• मुख्यमंत्री ने राजिम में 50 लाख रुपये की धर्मशाला निर्माण की घोषणा की
• राजिम बैराज कार्य शीघ्र शुरू करने के निर्देश
• राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर विकसित करने की प्रतिबद्धता

त्रिवेणी संगम की पावन धरती पर भव्य आयोजन

रायपुर। विष्णु देव साय ने राजिम में आयोजित राजिम कुंभ कल्प 2026 के समापन समारोह को संबोधित करते हुए इसे छत्तीसगढ़ की आध्यात्मिक चेतना, सांस्कृतिक गौरव और सामाजिक समरसता का जीवंत प्रतीक बताया। उन्होंने कहा कि यह आयोजन केवल धार्मिक मेला नहीं, बल्कि प्रदेश की अस्मिता और पहचान का प्रतीक पर्व है। महानदी, पैरी और सोंढूर नदियों के त्रिवेणी संगम पर बसे राजिम को “छत्तीसगढ़ का प्रयाग” बताते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि यह भूमि सदियों से तप, त्याग और साधना की साक्षी रही है। कार्यक्रम की शुरुआत भगवान श्री राजीव लोचन, कुलेश्वर महादेव, राजिम दाई, छत्तीसगढ़ महतारी और भारत माता के जयघोष के साथ हुई, जहां मुख्यमंत्री ने भगवान राजीव लोचन की प्रतिमा पर पुष्प अर्पित कर प्रदेश की सुख-समृद्धि की कामना की।

विकास की घोषणाएँ और सुविधाओं का विस्तार

समारोह के दौरान मुख्यमंत्री ने श्रद्धालुओं की सुविधा हेतु सर्वसुविधायुक्त धर्मशाला निर्माण के लिए 50 लाख रुपये की घोषणा की और राजिम बैराज कार्य शीघ्र प्रारंभ करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि सरकार द्वारा आवागमन, स्वच्छता, पेयजल, स्वास्थ्य सेवा, प्रकाश व्यवस्था और सुरक्षा के व्यापक इंतजाम किए गए थे, जिससे दूर-दराज से आए श्रद्धालुओं को किसी प्रकार की असुविधा न हो। महाशिवरात्रि की शुभकामनाएँ देते हुए उन्होंने कहा कि भगवान शिव का त्याग, संयम और सेवा का संदेश वर्तमान समय में समाज को संतुलन और समर्पण की दिशा देता है। मुख्यमंत्री ने यह भी स्पष्ट किया कि आने वाले वर्षों में मेला-स्थल को और अधिक सुव्यवस्थित एवं भव्य रूप दिया जाएगा।

राष्ट्रीय धार्मिक पर्यटन की दिशा में कदम

खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति मंत्री दयाल दास बघेल ने राजिम कुंभ कल्प को सामाजिक समरसता और राष्ट्रीय एकता का विराट उत्सव बताया। उन्होंने कहा कि इस वर्ष पंचकोसी धाम और द्वादश ज्योतिर्लिंग की थीम ने आयोजन को विशेष स्वरूप प्रदान किया। पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री राजेश अग्रवाल ने इसे छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक पहचान का उत्सव बताते हुए कहा कि सरकार इसे राष्ट्रीय धार्मिक पर्यटन केंद्र के रूप में विकसित करने के लिए प्रतिबद्ध है, जिससे स्थानीय रोजगार और अर्थव्यवस्था को नई गति मिलेगी। कार्यक्रम में राजिम विधायक रोहित साहू, अभनपुर विधायक इंद्रकुमार साहू सहित अनेक जनप्रतिनिधि, संत-महात्मा और साधु-संतों की गरिमामय उपस्थिति रही।

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