रायपुर/छत्तीसगढ़
हाइलाइट बॉक्स:
बस्तर पंडुम के शुभारंभ समारोह में मंच व्यवस्था को लेकर सियासी विवाद गहराया। कांग्रेस ने आरोप लगाया कि राष्ट्रपति की मौजूदगी वाले कार्यक्रम में बस्तर का प्रतिनिधित्व करने वाले दोनों आदिवासी सांसदों को मंच पर स्थान नहीं देकर आदिवासी अस्मिता का अपमान किया गया। पार्टी ने इसे केवल प्रोटोकॉल उल्लंघन नहीं, बल्कि बस्तर की जनता के सम्मान से जुड़ा मामला बताया है।
मंच व्यवस्था पर कांग्रेस का आरोप
बस्तर पंडुम के शुभारंभ कार्यक्रम के बाद प्रदेश की राजनीति गरमा गई है। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष दीपक बैज ने मंच व्यवस्था पर सवाल उठाते हुए कहा कि राष्ट्रपति की उपस्थिति वाले कार्यक्रम में मुख्यमंत्री और मंत्रियों को मंच पर बैठाया गया, लेकिन बस्तर का प्रतिनिधित्व करने वाले कांकेर सांसद भोजराज नाग और बस्तर सांसद महेश कश्यप को मंच पर स्थान नहीं दिया गया। बैज ने कहा कि दोनों सांसद आदिवासी समाज से आते हैं और बस्तर की जनता द्वारा चुने गए प्रतिनिधि हैं, ऐसे में प्रोटोकॉल के तहत उनका मंच पर होना आवश्यक था।
‘यह सिर्फ सांसदों का नहीं, पूरे बस्तर का अपमान’
दीपक बैज ने इस घटना को केवल सांसदों का नहीं, बल्कि पूरी बस्तर की जनता और बस्तरिया पहचान का अपमान बताया। उन्होंने कहा कि भाजपा सरकार बस्तर पंडुम जैसे सांस्कृतिक आयोजन पर करोड़ों रुपए खर्च कर अपनी ब्रांडिंग कर रही है, लेकिन उसी मंच पर बस्तर के जनप्रतिनिधियों के सम्मान में कंजूसी की जा रही है। बैज ने सवाल उठाया कि जब मंच पर सांसदों को सम्मान नहीं मिल सकता, तो आम आदिवासी की स्थिति का अंदाजा आसानी से लगाया जा सकता है।
आदिवासी संस्कृति और संदेश पर सवाल
कांग्रेस अध्यक्ष ने आरोप लगाया कि भाजपा सरकार को न तो आदिवासी संस्कृति से वास्तविक सरोकार है और न ही उनकी धार्मिक आस्था से। उन्होंने कहा कि संसाधनों की लूट जैसे मुद्दों से ध्यान भटकाने के लिए ऐसे आयोजनों को राजनीतिक इवेंट बनाया जा रहा है। बैज ने यह भी पूछा कि अपने ही दल के चुने हुए सांसदों को मंच से दूर रखकर सरकार बस्तर की जनता को क्या संदेश देना चाहती है। कांग्रेस ने सरकार से पूरे मामले पर स्पष्ट जवाब देने और भविष्य में ऐसे आयोजनों में आदिवासी जनप्रतिनिधियों के सम्मान को सुनिश्चित करने की मांग की है।


