रायपुर/छत्तीसगढ़
हाइलाइट बॉक्स
उत्तर और उत्तर-मध्य छत्तीसगढ़ में शीतलहर का असर तेज हो गया है। सरगुजा और बिलासपुर संभाग के कई इलाकों में अगले दो दिनों तक घने कोहरे की चेतावनी जारी की गई है। न्यूनतम तापमान में हल्की बढ़ोतरी की संभावना के बावजूद ठंड और कोहरे से जनजीवन प्रभावित है, वहीं बच्चों में हाइपोथर्मिया के मामलों ने स्वास्थ्य विभाग की चिंता बढ़ा दी है।
उत्तर छत्तीसगढ़ में कोहरे और ठंड का दोहरा असर
छत्तीसगढ़ के उत्तर-मध्य क्षेत्रों में इन दिनों कड़ाके की ठंड पड़ रही है। मौसम विभाग के अनुसार सरगुजा संभाग के कई जिलों और बिलासपुर संभाग के एक-दो इलाकों में घना कोहरा छाया रहेगा, जिससे सुबह के समय विजिबिलिटी 20 से 30 मीटर तक सिमट रही है। बीते 24 घंटों में जांजगीर में अधिकतम तापमान 27.8 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया, जबकि अंबिकापुर में न्यूनतम तापमान 5.2 डिग्री सेल्सियस रिकॉर्ड हुआ। मैनपाट में तापमान 4 डिग्री के आसपास पहुंच गया, वहीं राज्य के छह से अधिक शहरों में रात का तापमान 10 डिग्री से नीचे बना हुआ है। मौसम विशेषज्ञों का कहना है कि अगले तीन दिनों में उत्तर छत्तीसगढ़ में न्यूनतम तापमान 2 से 3 डिग्री तक बढ़ सकता है, जिससे ठंड से थोड़ी राहत मिल सकती है।
ठंड से बढ़ रही बीमारियां, बच्चों पर सबसे ज्यादा असर
कड़ाके की ठंड का सबसे ज्यादा असर बच्चों की सेहत पर देखने को मिल रहा है। पिछले एक महीने में रायपुर के अंबेडकर अस्पताल समेत निजी अस्पतालों में हाइपोथर्मिया के 400 से अधिक मामले सामने आ चुके हैं। बाल रोग विशेषज्ञों के अनुसार बच्चों का शरीर जल्दी ठंडा होता है, खासकर नवजात और सीजेरियन डिलीवरी से जन्मे शिशुओं में जोखिम ज्यादा रहता है। दिन और रात के तापमान में 15 से 17 डिग्री तक का अंतर वायरल फीवर, सर्दी-खांसी और सांस संबंधी बीमारियों को बढ़ा रहा है। अस्पतालों की ओपीडी में मरीजों की संख्या लगातार बढ़ रही है, जहां रोजाना 2000 से ज्यादा मरीज इलाज के लिए पहुंच रहे हैं।
प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग अलर्ट, सावधानी जरूरी
ठंड और शीतलहर को देखते हुए रायपुर नगर निगम ने शहर के 12 से अधिक स्थानों पर अलाव की व्यवस्था शुरू कर दी है। स्वास्थ्य विभाग ने एडवाइजरी जारी कर लोगों से अपील की है कि बिना जरूरत यात्रा न करें, गर्म कपड़े पहनें और बच्चों व बुजुर्गों का विशेष ध्यान रखें। डॉक्टरों ने बदलते मौसम में मलेरिया के खतरे की भी चेतावनी दी है, क्योंकि दिन और रात के तापमान का अंतर मच्छरों के लिए अनुकूल स्थिति बना रहा है। विशेषज्ञों का कहना है कि साफ-सफाई, मच्छरदानी का उपयोग और समय पर जांच ही इस मौसम में बीमारी से बचाव का सबसे प्रभावी तरीका है।


