हाइलाइट
बालाघाट पुलिस ने आधार अपडेशन सिस्टम में सेंध लगाने वाले एक हाई-टेक रैकेट का पर्दाफाश किया है । सॉफ्टवेयर इंजीनियर मोहसीन खान फिंगरप्रिंट और आईरिस क्लोनिंग कर फर्जी आधार अपडेशन का नेटवर्क चला रहा था । पुलिस को नेटवर्क से और भी बड़े खुलासों की उम्मीद है ।
भरवेली से चल रहा था हाई-टेक फर्जीवाड़ा , VPN के जरिए छिपाई जा रही थी लोकेशन मध्यप्रदेश के बालाघाट में आधार जैसे अत्यंत संवेदनशील सरकारी सिस्टम में सेंध लगाने वाले बड़े रैकेट का खुलासा हुआ है । पुलिस ने इस हाई-टेक गिरोह के मास्टरमाइंड मोहसीन खान 39 को गिरफ्तार किया है , जो पेशे से सॉफ्टवेयर इंजीनियर है और भरवेली स्थित मायोल नगर का निवासी है । पुलिस के अनुसार आरोपी आधार अपडेशन मशीनों की लोकेशन छिपाने के लिए लगातार VPN का उपयोग करता था , जिससे सिस्टम को यही लगता रहे कि अपडेशन अधिकृत केंद्रों से ही किया जा रहा है । जबकि असल में पूरा फर्जी नेटवर्क वह भरवेली से संचालित कर रहा था । स्थानीय लोगों का कहना है कि “तकनीक का इस तरह दुरुपयोग देखकर हैरानी होती है , लोग खुद को असुरक्षित महसूस कर रहे हैं ।”
ऑपरेटरों के फिंगरप्रिंट–आईरिस का डिजिटल क्लोन बनाकर होता था लॉगिन एक शिकायत के बाद भरवेली थाना पुलिस सक्रिय हुई और कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार किया । एसडीओपी निहित उपाध्याय ने बताया कि मोहसीन कई वर्षों से आधार अपडेशन का अवैध कारोबार चला रहा था । आरोपी विभिन्न क्षेत्रों में अपने परिजन और परिचितों के नाम से टेंडर भरवा कर वैध अपडेशन केंद्र खुलवाता था । टेंडर मंजूर होने के बाद वह संबंधित केंद्रों की मशीनें और ID खुद अपने पास रख लेता था । इसके बाद वह अधिकृत ऑपरेटरों के फिंगरप्रिंट के क्लोन तैयार करता और उन्हीं फर्जी बायोमेट्रिक डेटा से सिस्टम में लॉगिन किया जाता था । आईरिस ऑथेंटिकेशन के लिए उसने डिजिटल क्लोन की नकली आंखों तक का इस्तेमाल किया । पुलिस अधिकारियों ने बताया कि इस तरह की तकनीकी धोखाधड़ी बेहद गंभीर अपराध की श्रेणी में आती है ।
नेटवर्क में और भी लोग जुड़े होने के संकेत , जांच में मिल सकते हैं बड़े खुलासे पुलिस ने बताया कि नेटवर्क काफी बड़ा हो सकता है और आरोपी द्वारा इस्तेमाल किए जा रहे कई इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों की फॉरेंसिक जांच कराई जा रही है । अधिकारी मान रहे हैं कि आगे की जांच में कई और नाम सामने आ सकते हैं । एक अधिकारी ने बताया , “यह सिर्फ एक व्यक्ति का खेल नहीं लगता , इसके पीछे एक संगठित मॉड्यूल काम कर रहा है । आने वाले दिनों में बड़ी जानकारी सामने आ सकती है ।” स्थानीय लोगों और अधिकारियों के अनुसार , इस खुलासे से आधार सुरक्षा प्रणाली को लेकर चिंताएं और गहरी हो गई हैं ।
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