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Sunday, March 22, 2026

क्या रायपुर सेंट्रल जेल में क़ैदियों का ‘खुला राज’ है? बैरक से वायरल वीडियो ने सुरक्षा पर खड़े किए सवाल…

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रायपुर। राजधानी रायपुर की सेंट्रल जेल एक बार फिर विवादों के केंद्र में है। जेल के भीतर से एनडीपीएस एक्ट के आरोपी रशीद अली उर्फ राजा बैजड़ का जिम की तरह कसरत करते हुए वीडियो और फोटो सोशल मीडिया पर वायरल होना जेल सुरक्षा व्यवस्था की पोल खोल रहा है। बैरक नंबर–15 से लीक हुए इस वीडियो में रशीद के साथ रोहित यादव और राहुल वाल्मिकी भी नजर आए, जो यह साबित करता है कि जेल के भीतर मोबाइल और इंटरनेट का निर्भीक उपयोग हो रहा है।

इस घटना का समय 13 से 15 अक्टूबर 2025 के बीच का बताया जा रहा है। वीडियो सामने आते ही जेल प्रशासन में हड़कंप मच गया है। हालांकि अब तक कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं हुआ, लेकिन वरिष्ठ अधिकारियों ने तत्काल जांच के आदेश दिए हैं। जेल अधीक्षक से रिपोर्ट तलब की गई है और यह पूछताछ शुरू हो गई है कि “इतनी कड़ी निगरानी के बावजूद मोबाइल फोन जेल की बैरकों तक कैसे पहुंचा?”

कौन है रशीद अली उर्फ राजा बैजड़? लंबा आपराधिक रिकॉर्ड, कई गंभीर केस दर्ज

23 वर्षीय रशीद अली, निवासी ताज नगर, रायपुर (थाना टिकरापारा), का आपराधिक इतिहास बेहद गहरा है। उस पर दर्ज प्रमुख मामले:

वर्ष / थानाधाराएं व मामले
632/14 – टिकरापारा25 आर्म्स एक्ट
136/15 – टिकरापारा25 आर्म्स एक्ट
351/17 – टिकरापारा25, 27 आर्म्स एक्ट
250/17 – कोतवाली302, 201, 34 भादवि
756/24 – टिकरापारा262 भा.न्या. संहिता
864/24 – टिकरापारा25, 27 आर्म्स एक्ट
507/25 – टिकरापारा296, 351(2), 115(2) भादवि
517/25 – टिकरापारा20(B) एनडीपीएस एक्ट
इस्त 411/442/25 – टिकरापारा170, 126, 135(3) भा.न्या. संहिता

यह पहली बार नहीं… जेल की सुरक्षा पर पहले भी उठे सवाल

रायपुर सेंट्रल जेल पूर्व में भी विवादों का गढ़ रही है। इससे पहले झारखंड के गैंगस्टर अमन साव के जेल में फोटोशूट का मामला चर्चा में आया था। अमन साव की पुलिस अभिरक्षा में मौत हो गई थी, परंतु उसके फोटो और वीडियो जेल के भीतर से ही वायरल हुए थे।

कड़े नियम, रोजाना तलाशी… फिर भी कैसे पहुँचते हैं मोबाइल?

जेलों की सुरक्षा के नाम पर हर वर्ष लाखों रुपये खर्च होते हैं। रोजाना तलाशी, सख्त गेट पास सिस्टम, सीसीटीवी निगरानी — यह सब मात्र दिखावा है या फिर कहीं न कहीं सिस्टम भीतर से खोखला? वायरल वीडियो ने कई सवालों को जन्म दिया है—

क्या जेल में अधिकारी-कर्मियों की मिलीभगत के बिना मोबाइल फोन पहुंच सकता है?
क्या कैदियों को विशेष सुविधाएं देकर कानून का मज़ाक बनाया जा रहा है?
क्या यह सिर्फ एक वायरल वीडियो नहीं, बल्कि सिस्टम की नाकामी का सबूत है?

जांच के आदेश जारी — कार्रवाई का इंतजार

जेल मुख्यालय ने जेल अधीक्षक से विस्तृत रिपोर्ट मांगी है। डिजिटल साक्ष्यों की जांच चल रही है और यह पता लगाया जा रहा है कि किस माध्यम से वीडियो बाहर लीक किया गया। सवाल यह भी है कि—

⚖️ क्या किसी जेलकर्मी की भूमिका सामने आएगी?
📵 क्या मोबाइल सप्लाई चैन का खुलासा होगा?
🚨 या यह मामला भी फाइलों में दबकर रह जाएगा?

क्या अब सुधार होगा या फिर एक और ‘वायरल’ का इंतज़ार?

रायपुर सेंट्रल जेल में आए दिन बने रहने वाले ऐसे विवाद अब सिर्फ सुरक्षा का नहीं, बल्कि न्याय प्रणाली की विश्वसनीयता का प्रश्न बन चुके हैं। जनता यह जानना चाहती है कि—

क्या कानून के रखवालों की चारदीवारी के भीतर भी ‘कानून’ ही कैद है?

यदि इस बार सख्त कार्रवाई नहीं हुई, तो यह वीडियो सिर्फ एक क्लिप नहीं, बल्कि शासन-प्रशासन पर एक बड़ा धब्बा बन सकता है।

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