रायपुर /जी.भूषण :
रायपुर। आंध्रा एसोसिएशन रायपुर के प्रांगण में दिनांक 29 अगस्त 2025 को “तेलुगू तल्ली” उद्घोष के साथ तेलुगू भाषा दिवस का आयोजन गरिमामय वातावरण में किया गया। यह दिवस प्रसिद्ध तेलुगू कवि एवं समाज सुधारक गिदुगु वेंकट राममूर्ति की जयंती पर प्रतिवर्ष मनाया जाता है।
कार्यक्रम का शुभारंभ दीप प्रज्वलन एवं तेलुगू मातृगीत से हुआ। इस अवसर पर एसोसिएशन के अध्यक्ष श्री जी. स्वामी ने सभी उपस्थित अतिथियों को बधाई देते हुए कहा कि समाज के बच्चों को अपनी मातृभाषा से जोड़ने हेतु जल्द ही श्री बालाजी कल्याण मंदिर, गुढ़ियारी में तेलुगू भाषा की कक्षाएँ प्रारंभ की जाएँगी। उन्होंने कहा कि पश्चिम बंगाल में तेलुगू को तृतीय भाषा का दर्जा प्राप्त है, उसी तरह छत्तीसगढ़ शासन से भी अपेक्षा है कि राज्य की बोलियों के साथ तेलुगू भाषा को भी मान्यता प्रदान करे, जिससे यहाँ निवासरत लगभग 10 लाख तेलुगुभाषियों को शैक्षणिक और सांस्कृतिक लाभ मिल सके।

डॉ. बी. रमेश पटनायक ने मातृभाषा के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि यह दिवस केवल उत्सव नहीं बल्कि तेलुगुभाषी समुदाय को अपनी संस्कृति, साहित्य और परम्पराओं से जुड़ने का अवसर प्रदान करता है। मातृभाषा मनुष्य की पहचान और अस्तित्व को मजबूती प्रदान करती है।
इस अवसर पर श्री बी. एच. कृष्णाराव की पुस्तक का विमोचन भी किया गया। कार्यक्रम में उपस्थित प्रमुख अतिथियों में श्री टी. श्रीनिवास रेड्डी (उपाध्यक्ष-1), श्री के. विजयकुमार, एल. रुबेश राव, सी. साई गोपाल, टी. सुरेश, के. वी. राव, वी. श्रीप्रकाश, डी. नागेश, एम. वेंकट राव, के. रघुराम, के. सत्यनारायण राव, डी. रमना राव, रामकृष्ण राव सहित अन्य कार्यकारिणी सदस्य उपस्थित रहे।
विद्यालयों से भी सक्रिय सहभागिता रही। डॉ. फ्रेनी जयप्रकाश, तेलुगुभाषी शिक्षिकाएँ जी. सुधा रानी, निकिता नायडू, श्रद्धा नायडू, के. भुनेश्वरी, सपना दोरा, रजत, के. कांति, के. लक्ष्मी भवानी आदि ने कार्यक्रम को सफल बनाने में योगदान दिया। उल्लेखनीय है कि मूसलाधार बारिश के बावजूद बड़ी संख्या में समाज के लोग कार्यक्रम में उपस्थित होकर अपनी मातृभाषा के प्रति गहरा प्रेम प्रदर्शित किया।
अंत में डी. प्रभाकर राव ने सभी का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि तेलुगू भाषा दिवस का आयोजन केवल स्मरण नहीं बल्कि आने वाली पीढ़ियों को भाषा, साहित्य और सांस्कृतिक विरासत से जोड़ने का संकल्प है। इस प्रकार, आंध्रा एसोसिएशन रायपुर में मनाया गया यह दिवस तेलुगुभाषी समाज के गौरव और एकता का प्रतीक बनकर उपस्थित लोगों के हृदय में अमिट छाप छोड़ गया।
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