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भरतनाट्यम, कुचिपुड़ी और कथक की प्रस्तुतियों से सजा नृत्यानंदलहरी महोत्सव का नौवां दिन…

रायपुर के रंगमंदिर ऑडिटोरियम में 240 युवा नृत्य कलाकारों ने बिखेरा हुनर, भारतीय शास्त्रीय नृत्य परंपराओं की विविधता और सांस्कृतिक विरासत का हुआ भव्य प्रदर्शन |

रायपुर। राजधानी रायपुर के रंगमंदिर ऑडिटोरियम में आयोजित एआईडीए नटवर गोपीकृष्ण राष्ट्रीय पुरस्कार एवं नृत्यानंदलहरी महोत्सव 2026 के नौवें दिन लगभग 240 युवा नृत्य कलाकारों ने अपनी प्रस्तुतियों से दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया। कार्यक्रम में भरतनाट्यम, कुचिपुड़ी और कथक जैसी भारतीय शास्त्रीय नृत्य शैलियों की मनमोहक प्रस्तुतियां हुईं। अखिल भारतीय नर्तक संघ (एआईडीए) ने मालाबार गोल्ड एंड डायमंड्स, संस्कृति मंत्रालय तथा नवीन शशिकला संगीत महाविद्यालय, दुर्ग के सहयोग से इस महोत्सव का आयोजन किया। महोत्सव का उद्देश्य युवा कलाकारों को राष्ट्रीय मंच उपलब्ध कराना, भारतीय शास्त्रीय नृत्य परंपराओं को प्रोत्साहित करना और प्रतिभाशाली कलाकारों को अपनी कला प्रदर्शित करने का अवसर देना है।

महोत्सव के सुबह के सत्र में चेन्नई, हैदराबाद और वारंगल के विद्यार्थियों ने भरतनाट्यम और कुचिपुड़ी की प्रस्तुतियां दीं। चेन्नई की श्रीदेवी नृत्यालय की कलाकारों ने शीला उन्नीकृष्णन के मार्गदर्शन में भरतनाट्यम के एकल, युगल और समूह नृत्य प्रस्तुत किए। इन प्रस्तुतियों में भावाभिनय, लयबद्धता और मेलत्तूर शैली की गतिशीलता देखने को मिली। वहीं, हैदराबाद की कुचिपुड़ी कलाकार हिमांशी कात्रागड्डा ने अपनी आकर्षक मुद्राओं, सटीक लय और भावपूर्ण अभिव्यक्ति से दर्शकों की सराहना प्राप्त की। विभिन्न शहरों से आए कलाकारों की सहभागिता ने महोत्सव को राष्ट्रीय स्वरूप प्रदान किया और शास्त्रीय नृत्य की विविध परंपराओं को एक मंच पर प्रस्तुत किया।

शाम के सत्र में केरल के तिरुवनंतपुरम की भरतनाट्यम कलाकार अद्रिजा दास ने अपनी प्रभावशाली प्रस्तुति से दर्शकों का ध्यान आकर्षित किया। उनकी प्रस्तुति में शास्त्रीय नृत्य की अभिव्यक्ति क्षमता और कलात्मक गहराई दिखाई दी। इसके अलावा, कोच्चि की कथक नृत्यांगना दीपा कार्था ने जटिल पद संचालन, लयकारी, आकर्षक चक्कर और भावपूर्ण अभिनय के माध्यम से दर्शकों को प्रभावित किया। महोत्सव की प्रस्तुतियों ने भारतीय शास्त्रीय नृत्य की समृद्ध परंपरा, विविधता और सांस्कृतिक महत्व को रेखांकित किया। आयोजन ने युवा प्रतिभाओं को प्रोत्साहित करने के साथ-साथ कला के क्षेत्र में समावेशिता और समान अवसरों की आवश्यकता का संदेश भी दिया।

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