भूमिका
स्वच्छ और स्वस्थ शहरों के निर्माण में स्वच्छता कर्मियों की भूमिका सबसे महत्वपूर्ण है, लेकिन लंबे समय तक सीवर, सेप्टिक टैंक, नालियों और अन्य स्वच्छता कार्यों से जुड़े कर्मियों को जोखिमपूर्ण परिस्थितियों में काम करना पड़ता रहा है। जहरीली गैसों, संक्रमण, दुर्घटनाओं और पर्याप्त सुरक्षा उपकरणों के अभाव के कारण इन कर्मियों का जीवन लगातार खतरे में रहता है। इसी चुनौती को दूर करने के उद्देश्य से केंद्र सरकार ने वर्ष 2023 में नेशनल एक्शन फॉर मैकेनाइज्ड सैनिटेशन इकोसिस्टम (NAMASTE) योजना शुरू की। योजना का मूल उद्देश्य स्वच्छता कर्मियों को सुरक्षित और गरिमापूर्ण आजीविका उपलब्ध कराना, सामाजिक सुरक्षा से जोड़ना तथा खतरनाक मैनुअल सफाई की प्रथा को समाप्त करना है।
छत्तीसगढ़ ने इस दिशा में उल्लेखनीय प्रगति करते हुए NAMASTE योजना के क्रियान्वयन की राष्ट्रीय रैंकिंग में आंध्रप्रदेश, ओडिशा, त्रिपुरा, उत्तरप्रदेश और केंद्रशासित प्रदेश पुदुचेरी के साथ संयुक्त रूप से देश में प्रथम स्थान हासिल किया है। यह उपलब्धि केवल सरकारी रैंकिंग नहीं, बल्कि स्वच्छता कर्मियों की सुरक्षा और सम्मान के लिए राज्य में किए जा रहे प्रयासों की महत्वपूर्ण मान्यता है।

NAMASTE योजना आखिर है क्या?
NAMASTE यानी National Action for Mechanized Sanitation Ecosystem केंद्र सरकार की ऐसी पहल है, जिसका लक्ष्य भारत में स्वच्छता व्यवस्था को सुरक्षित, आधुनिक और अधिक मानवीय बनाना है। योजना के तहत सीवर एवं सेप्टिक टैंक कर्मियों को सुरक्षित कार्य परिस्थितियां उपलब्ध कराने के साथ-साथ स्वच्छता कार्यों में मशीनों के उपयोग को बढ़ावा दिया जाता है।
इस योजना का एक महत्वपूर्ण लक्ष्य Zero Fatality है। इसका अर्थ है कि स्वच्छता कार्य करते समय किसी भी कर्मी की मृत्यु न हो। इसके लिए जोखिमपूर्ण कार्यों में मानव श्रम को कम करने और मशीन आधारित सफाई व्यवस्था को मजबूत करने पर जोर दिया गया है। योजना में केवल सीवर और सेप्टिक टैंक कर्मी ही नहीं, बल्कि कचरा बीनने वाले यानी वेस्ट पिकर्स, नाली साफ करने वाले तथा सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट और फीकल स्लज ट्रीटमेंट प्लांट में कार्यरत कर्मियों को भी शामिल किया गया है।
योजना का क्रियान्वयन आवासन एवं शहरी कार्य मंत्रालय तथा सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय द्वारा संयुक्त रूप से किया जा रहा है। राष्ट्रीय सफाई कर्मचारी वित्त एवं विकास निगम (NSKFDC) को राष्ट्रीय कार्यान्वयन एजेंसी की जिम्मेदारी दी गई है। छत्तीसगढ़ में नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग के माध्यम से शहरी स्थानीय निकायों में योजना को लागू किया जा रहा है।
छत्तीसगढ़ की उपलब्धि क्यों महत्वपूर्ण है?
छत्तीसगढ़ का संयुक्त रूप से राष्ट्रीय स्तर पर प्रथम स्थान हासिल करना इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि NAMASTE योजना के अंतर्गत केवल योजनाओं की घोषणा नहीं, बल्कि जमीनी स्तर पर उनके क्रियान्वयन को भी महत्व दिया जाता है। राज्य में सीवर एवं सेप्टिक टैंक कर्मियों की पहचान, सत्यापन, सुरक्षा उपकरणों का वितरण, सामाजिक सुरक्षा, प्रशिक्षण और आपातकालीन प्रतिक्रिया व्यवस्था पर काम किया गया है।
राज्य में अब तक 1487 सीवर एवं सेप्टिक टैंक कर्मियों का सर्वेक्षण किया गया, जिनमें से 1465 का सत्यापन किया जा चुका है। प्रदेश के 169 नगरीय निकायों में 1428 कर्मियों को PPE किट वितरित की गई हैं। इसके अलावा 1374 कर्मियों को आयुष्मान भारत कार्ड उपलब्ध कराया गया है। 139 सीवर एवं सेप्टिक टैंक कर्मियों को व्यावसायिक सुरक्षा प्रशिक्षण दिया गया है, जबकि 923 स्वच्छता कर्मियों के लिए कार्यशालाएं आयोजित कर सुरक्षा संबंधी प्रशिक्षण प्रदान किया गया।
ये आंकड़े बताते हैं कि योजना को केवल कागजी प्रक्रिया तक सीमित रखने के बजाय कर्मियों तक सुरक्षा और सामाजिक सुरक्षा का लाभ पहुंचाने का प्रयास किया जा रहा है।
PPE किट और प्रशिक्षण से बढ़ी सुरक्षा
सीवर और सेप्टिक टैंक की सफाई अत्यंत जोखिमपूर्ण कार्य है। ऐसे कार्यों में जहरीली गैसों, संक्रमण और दुर्घटनाओं का खतरा रहता है। इसलिए सुरक्षा उपकरण इस व्यवस्था का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं। NAMASTE योजना के तहत कर्मियों को व्यक्तिगत सुरक्षा उपकरण यानी PPE किट उपलब्ध कराई जा रही हैं।
लेकिन केवल उपकरण उपलब्ध कराना पर्याप्त नहीं है। उनका सही तरीके से इस्तेमाल और जोखिमों की जानकारी भी जरूरी है। इसी वजह से योजना में Occupational Safety Training (OST) को महत्वपूर्ण स्थान दिया गया है। छत्तीसगढ़ में कर्मियों को व्यावसायिक सुरक्षा प्रशिक्षण देने के साथ बड़ी संख्या में स्वच्छता कर्मियों के लिए कार्यशालाएं भी आयोजित की गई हैं। इससे सुरक्षित तरीके से कार्य करने की समझ विकसित करने में मदद मिलती है।
आयुष्मान कार्ड और सामाजिक सुरक्षा का विस्तार
NAMASTE योजना का उद्देश्य केवल कार्यस्थल पर सुरक्षा उपलब्ध कराना नहीं है। स्वच्छता कर्मियों को सामाजिक सुरक्षा के दायरे में लाना भी इसका महत्वपूर्ण हिस्सा है। छत्तीसगढ़ में 1374 कर्मियों को आयुष्मान भारत कार्ड उपलब्ध कराया जाना इसी दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।
स्वास्थ्य सुरक्षा किसी भी श्रमिक के लिए मूलभूत आवश्यकता है। जोखिमपूर्ण स्वच्छता कार्यों से जुड़े कर्मियों के लिए यह आवश्यकता और भी महत्वपूर्ण हो जाती है। स्वास्थ्य सुविधा से जुड़ाव कर्मियों और उनके परिवारों के लिए आर्थिक सुरक्षा का माध्यम बन सकता है। इस दृष्टि से NAMASTE योजना सुरक्षा को व्यापक सामाजिक सुरक्षा से जोड़ने का प्रयास करती है।
वेस्ट पिकर्स को भी योजना में मिला स्थान
स्वच्छता व्यवस्था केवल सीवर और सेप्टिक टैंक तक सीमित नहीं है। शहरों में कचरे को एकत्र करने और अलग-अलग करने वाले वेस्ट पिकर्स भी स्वच्छता तंत्र का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं। NAMASTE योजना में इन कर्मियों को भी शामिल किया गया है।
छत्तीसगढ़ में 8527 वेस्ट पिकर्स की प्रोफाइलिंग की गई है, जिनमें से 6799 का सत्यापन हो चुका है। 991 वेस्ट पिकर्स को PPE किट दी जा चुकी हैं और 512 को व्यावसायिक सुरक्षा प्रशिक्षण प्रदान किया गया है। इसके अलावा 6287 और वेस्ट पिकर्स को प्रशिक्षण देने की तैयारी की जा रही है। इससे स्पष्ट है कि योजना का दायरा स्वच्छता व्यवस्था से जुड़े विभिन्न वर्गों तक बढ़ाया जा रहा है।
आपातकालीन प्रतिक्रिया व्यवस्था बनी महत्वपूर्ण कड़ी
स्वच्छता कार्यों के दौरान दुर्घटना या आपात स्थिति में तत्काल सहायता मिलना जीवन बचाने के लिए बेहद जरूरी है। इसी आवश्यकता को ध्यान में रखते हुए छत्तीसगढ़ में 47 Emergency Response Sanitation Units (ERSU) स्थापित किए गए हैं। ये ईआरएसयू 14 नगर निगमों, 24 जिला मुख्यालयों और 9 द्वितीय सर्वाधिक जनसंख्या वाले निकायों में स्थापित किए गए हैं। इनमें से 39 ईआरएसयू को सुरक्षा किट भी उपलब्ध कराई जा चुकी हैं। इसके साथ ही 14420 हेल्पलाइन के माध्यम से आपातकालीन स्वच्छता सेवाओं के लिए त्वरित प्रतिक्रिया व्यवस्था विकसित की जा रही है। यह व्यवस्था जोखिमपूर्ण परिस्थितियों में प्रशिक्षित और सुरक्षित तरीके से सहायता पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।
‘नमस्ते दिवस’ से बढ़ा जागरूकता का दायरा
योजना को जनभागीदारी और जागरूकता से जोड़ने के लिए इस वर्ष 14 जुलाई को छत्तीसगढ़ के सभी नगरीय निकायों में ‘नमस्ते दिवस’ आयोजित किया गया। इसमें 15 हजार से अधिक स्वच्छता कर्मियों, जनप्रतिनिधियों, सरकारी अधिकारियों-कर्मचारियों और आम नागरिकों ने सहभागिता की। इन कार्यक्रमों में स्वच्छता कर्मियों का स्वास्थ्य परीक्षण, व्यावसायिक सुरक्षा प्रशिक्षण, कर्मियों का सम्मान तथा PPE किट और आयुष्मान स्वास्थ्य कार्ड का वितरण किया गया। ऐसे आयोजन स्वच्छता कर्मियों के प्रति सामाजिक सम्मान बढ़ाने और आम नागरिकों को उनके योगदान के प्रति जागरूक करने में महत्वपूर्ण हो सकते हैं।
राष्ट्रीय मूल्यांकन में किन आधारों पर मिला पहला स्थान?
NAMASTE योजना में राज्यों के प्रदर्शन का मूल्यांकन 100 अंकों के निर्धारित पैमाने पर किया गया। इसमें स्वच्छता कर्मियों की प्रोफाइलिंग और सत्यापन के लिए 20 अंक, SUY के माध्यम से मशीनीकरण के लिए 10 अंक, ERSU और 14420 हेल्पलाइन के संचालन के लिए 20 अंक, सामाजिक सुरक्षा कवरेज के लिए 20 अंक तथा स्वच्छता मृत्यु से जुड़े मामलों में प्रवर्तन, मुआवजा और जवाबदेही के लिए 30 अंक निर्धारित किए गए हैं। स्वच्छता मृत्यु के मामलों में नकारात्मक अंक का भी प्रावधान है। इस मूल्यांकन व्यवस्था में छत्तीसगढ़ का संयुक्त रूप से प्रथम स्थान प्राप्त करना यह दर्शाता है कि राज्य ने योजना के विभिन्न महत्वपूर्ण घटकों में समग्र प्रदर्शन किया है।
मशीनीकरण से बदल सकती है स्वच्छता व्यवस्था
NAMASTE योजना का सबसे महत्वपूर्ण पक्ष स्वच्छता कार्यों का मशीनीकरण है। आधुनिक मशीनों के उपयोग से मनुष्यों को सीधे सीवर या सेप्टिक टैंक में उतरने की आवश्यकता कम की जा सकती है। इससे दुर्घटनाओं और जहरीली गैसों के कारण होने वाली मौतों के जोखिम को कम करने में मदद मिलेगी। हालांकि, मशीनीकरण केवल मशीन खरीदने तक सीमित नहीं होना चाहिए। इसके लिए प्रशिक्षित ऑपरेटर, पर्याप्त मशीनरी, नियमित रखरखाव, आपातकालीन दल और स्पष्ट जवाबदेही की आवश्यकता होती है। स्थानीय निकायों को इन सभी पहलुओं पर निरंतर काम करना होगा।
आगे की राह
छत्तीसगढ़ की राष्ट्रीय स्तर की उपलब्धि निश्चित रूप से उत्साह बढ़ाने वाली है, लेकिन असली सफलता तब मानी जाएगी जब प्रत्येक स्वच्छता कर्मी को सुरक्षित कार्यस्थल, पर्याप्त सुरक्षा उपकरण, नियमित प्रशिक्षण, स्वास्थ्य सुविधा और सम्मानजनक आजीविका मिले। PPE वितरण और प्रशिक्षण के साथ-साथ मशीन आधारित सफाई को हर नगरीय निकाय में प्रभावी बनाना भी जरूरी है। NAMASTE योजना स्वच्छता कर्मियों को केवल श्रमिक के रूप में देखने के बजाय उनके अधिकार, सुरक्षा और गरिमा को केंद्र में रखने की दिशा में महत्वपूर्ण बदलाव है। छत्तीसगढ़ का संयुक्त रूप से देश में प्रथम स्थान यह संकेत देता है कि राज्य इस बदलाव की दिशा में आगे बढ़ रहा है। अब चुनौती इस उपलब्धि को स्थायी व्यवस्था में बदलने की है, ताकि स्वच्छ शहर बनाने वाले कर्मियों को स्वयं जोखिम में रहकर काम न करना पड़े।
निष्कर्ष
NAMASTE योजना स्वच्छ भारत के लक्ष्य को स्वच्छता कर्मियों की सुरक्षा और सम्मान से जोड़ने वाली महत्वपूर्ण पहल है। इसका उद्देश्य स्वच्छता व्यवस्था को मशीनीकृत, सुरक्षित और मानवीय बनाना है। छत्तीसगढ़ में कर्मियों का सर्वेक्षण और सत्यापन, PPE किट का वितरण, आयुष्मान कार्ड, सुरक्षा प्रशिक्षण, वेस्ट पिकर्स की प्रोफाइलिंग, ERSU और 14420 हेल्पलाइन जैसी व्यवस्थाएं इस दिशा में महत्वपूर्ण कदम हैं। राष्ट्रीय स्तर पर संयुक्त रूप से प्रथम स्थान मिलने से राज्य के प्रयासों को पहचान मिली है। भविष्य में यदि मशीनीकरण, प्रशिक्षण, सामाजिक सुरक्षा और जवाबदेही को और मजबूत किया जाता है, तो NAMASTE योजना न केवल स्वच्छता कर्मियों के जीवन को सुरक्षित बनाएगी, बल्कि देश की स्वच्छता व्यवस्था को अधिक आधुनिक, सम्मानजनक और Zero Fatality के लक्ष्य के करीब ले जाएगी।


