गैस से भरे कैप्सूल सुपुर्दनामे को लेकर नया मोड़: सिंघोड़ा पुलिस पर नहीं दिखी प्राथमिक भूमिका, जांच का बढ़ा दायरा…

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सरईपाली /छत्तीसगढ़ /दिलीप गुप्ता

हाइलाइट बॉक्स:
6 गैस भरे कैप्सूल खाद्य विभाग महासमुंद को सौंपे गए
• पुलिस अभिरक्षा में कैप्सूल पहले से सीलबंद थे
• GPS और CCTV जांच से खुल सकती है पूरी सच्चाई
• निजी प्लांट में कैप्सूल रखने पर उठे सवाल

छापेमारी से शुरू हुआ मामला, कैप्सूल रहे पुलिस निगरानी में
सरायपाली क्षेत्र के चर्चित चिवराकुटा गैस रिफिलिंग कांड में एक नया तथ्य सामने आया है। 23 दिसंबर 2025 की रात सिंघोड़ा पुलिस द्वारा की गई छापेमारी में 6 गैस से भरे कैप्सूल जब्त किए गए थे, जिन्हें सीलबंद कर पुलिस अभिरक्षा में रखा गया था। थाना परिसर में जगह की कमी के कारण इन कैप्सूल को पास स्थित होटल में CCTV निगरानी और दो गार्डों की सुरक्षा में रखा गया था, जिससे किसी भी प्रकार की छेड़छाड़ न हो सके।

सुपुर्दनामे के बाद जिम्मेदारी बदली, पुलिस ने निभाई प्रक्रिया
मामले में आगे कार्रवाई करते हुए पुलिस ने तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया और कैप्सूल सहित सिलेंडरों को सुरक्षित रखा। बाद में अप्रैल 2026 में कलेक्टर के निर्देश पर, ज्वलनशीलता को देखते हुए इन कैप्सूल को खाद्य विभाग महासमुंद को सुपुर्द कर दिया गया। पुलिस का कहना है कि सुपुर्दनामा प्रक्रिया पूरी होने के बाद उनकी जिम्मेदारी समाप्त हो जाती है और इसके बाद रखरखाव की जिम्मेदारी संबंधित विभाग की होती है।

निजी प्लांट में कैप्सूल रखने पर सवाल, जांच की मांग तेज
इस बीच यह जानकारी सामने आई है कि कुछ कैप्सूल अभनपुर स्थित एक निजी प्लांट—ठाकुर पेट्रोकेमिकल प्राइवेट लिमिटेड—में भेजे गए। यह निर्णय किसके निर्देश पर लिया गया, यह अब जांच का विषय बन गया है। आवेदक भूपेंद्र कुमार साहू ने GPS ट्रैकिंग के आधार पर पूरी मूवमेंट की जांच की मांग की है, जिससे यह स्पष्ट हो सके कि कैप्सूल कहां-कहां ले जाए गए।

GPS और CCTV से खुल सकते हैं कई राज
सूत्रों के अनुसार, कैप्सूल वाहनों के GPS और प्लांट के CCTV फुटेज की बारीकी से जांच की जाए तो घटनाक्रम की सच्चाई सामने आ सकती है। जानकारी यह भी मिली है कि कैप्सूल को ले जाते समय कुछ स्थानों पर वाहन रुके थे, जिससे संदेह और गहरा गया है।

प्राथमिक जांच में पुलिस की भूमिका संदिग्ध नहीं, अन्य पक्षों पर फोकस
मौजूदा जानकारी के आधार पर प्रथम दृष्टया सिंघोड़ा पुलिस की गैस गायब होने के आरोपों में कोई स्पष्ट संलिप्तता सामने नहीं आई है। हालांकि, जांच एजेंसियों का ध्यान अब खाद्य विभाग महासमुंद और निजी प्लांट की भूमिका पर केंद्रित होता दिख रहा है। आने वाले दिनों में विस्तृत जांच से पूरे मामले का खुलासा होने की संभावना है।

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