स्वतंत्र छत्तीसगढ़
रायपुर, छत्तीसगढ़। मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय ने कहा है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर लाल किले से अपने संबोधन में छत्तीसगढ़ का विशेष उल्लेख करते हुए सशस्त्र नक्सलवाद के खत्म होने की बात कही है। मुख्यमंत्री ने प्रधानमंत्री के वक्तव्य का समर्थन करते हुए कहा कि सशस्त्र नक्सलवाद समाप्त हो चुका है, लेकिन अब भी ‘दिमागी नक्सलवाद’ यानी वैचारिक रूप से हिंसा और देश को गलत दिशा में ले जाने की सोच रखने वाले लोगों से सतर्क रहने की आवश्यकता है।
हेड लाइंस
मुख्यमंत्री साय ने पीएम मोदी के बयान का किया समर्थन
कहा—सशस्त्र नक्सलवाद खत्म, ‘दिमागी नक्सलवाद’ अब भी मौजूद
80वें स्वतंत्रता दिवस पर रायपुर टाउन हॉल में प्रदर्शनी का किया शुभारंभ
अबूझमाड़ के बोतेर गांव में पहली बार फहराया गया तिरंगा
मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने 80वें स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर रायपुर के टाउन हॉल में जनसंपर्क विभाग द्वारा आयोजित प्रदर्शनी का शुभारंभ किया। प्रदर्शनी में छत्तीसगढ़ के स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों के व्यक्तित्व और उनके योगदान से जुड़ी तस्वीरें एवं जानकारियां प्रदर्शित की गईं। इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने प्रदेशवासियों को स्वतंत्रता दिवस की बधाई और शुभकामनाएं देते हुए कहा कि पूरे छत्तीसगढ़ में आजादी का पर्व उत्साह और उमंग के साथ मनाया गया।
प्रधानमंत्री के संदेश का किया उल्लेख : मुख्यमंत्री साय ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने लाल किले से राष्ट्र के नाम अपने संबोधन में सशस्त्र नक्सलवाद पर नियंत्रण और उसके खात्मे का उल्लेख किया। प्रधानमंत्री ने अपने संबोधन में कहा था कि हथियारबंद नक्सलवाद को समाप्त करने में सफलता मिली है, लेकिन ऐसी वैचारिक शक्तियों की पहचान करने की जरूरत है जो हिंसा के रास्ते तलाशकर युवाओं को गुमराह करने और देश को गलत दिशा में ले जाने का प्रयास करती हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि विकसित भारत के निर्माण के लिए युवाओं को सकारात्मक दिशा में जोड़ना आवश्यक है।
बोतेर गांव में पहली बार फहरा तिरंगा : स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर नारायणपुर जिले के अबूझमाड़ क्षेत्र में स्थित बोतेर गांव में पहली बार तिरंगा फहराया गया। कभी नक्सल प्रभावित रहे इस दूरस्थ गांव में सरकारी प्राथमिक शाला और भारत-तिब्बत सीमा पुलिस की 29वीं बटालियन के शिविर में ध्वजारोहण किया गया। स्थानीय लोगों के अनुसार, पूर्व में नक्सली भय और प्रतिबंधों के कारण राष्ट्रीय पर्वों का आयोजन संभव नहीं हो पाता था।
बदलते हालात की दिखी नई तस्वीर : पुलिस शिविर की स्थापना के बाद क्षेत्र में सुरक्षा और विकास की स्थिति में बदलाव देखने को मिल रहा है। स्वतंत्रता दिवस समारोह में बच्चों ने हाथों में तिरंगा लेकर देशभक्ति के नारे लगाए और आईटीबीपी जवानों के साथ उत्सव में भाग लिया। स्थानीय लोगों ने इस आयोजन को क्षेत्र में बदलते माहौल और सामान्य जीवन की दिशा में बढ़ते कदम के रूप में देखा। कभी भय और प्रतिबंधों के साये में रहने वाले ग्रामीणों के लिए पहली बार तिरंगा फहराने का यह अवसर विशेष और ऐतिहासिक बन गया।
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