भिलाई, छत्तीसगढ़।
भिलाई नगर निगम क्षेत्र में निगम की दुकानों के नामांतरण, वार्षिक किराया और लीज नवीनीकरण को लेकर नए दिशा-निर्देश जारी किए गए हैं। नई व्यवस्था के तहत दुकानों के विक्रय या हस्तांतरण पर जनसंख्या के आधार पर नामांतरण शुल्क तय किया गया है, जबकि लीज अवधि, किराया वृद्धि और नवीनीकरण के लिए भी स्पष्ट प्रावधान किए गए हैं।
हेड लाइंस
3 लाख से कम आबादी वाले निकायों में 20 हजार रुपये नामांतरण शुल्क
3 से 10 लाख आबादी वाले निकायों में 25 हजार और 10 लाख से अधिक में 30 हजार रुपये शुल्क
वैध वारिसों के नाम नामांतरण पर नहीं लगेगा कोई शुल्क
हर तीन साल में किराये में 5 प्रतिशत चक्रवृद्धि वृद्धि का प्रावधान
15 साल की लीज पूरी होने पर अगले 15 वर्षों के लिए हो सकेगा नवीनीकरण
जनसंख्या के आधार पर तय हुआ नामांतरण शुल्क : नए प्रावधानों के अनुसार 3 लाख से कम जनसंख्या वाले निकायों में दुकानों के नामांतरण के लिए 20 हजार रुपये शुल्क देना होगा। 3 लाख से 10 लाख तक की आबादी वाले निकायों में यह शुल्क 25 हजार रुपये और 10 लाख से अधिक जनसंख्या वाले नगर निगमों में 30 हजार रुपये निर्धारित किया गया है। हालांकि, आवंटी की मृत्यु के बाद उसके वैध वारिसों के नाम दुकान का नामांतरण कराने पर कोई शुल्क नहीं लिया जाएगा।
नामांतरण के लिए पूरी करनी होगी प्रक्रिया : लीज डीड जारी होने के दो वर्ष बाद दुकान के नामांतरण के लिए संयुक्त आवेदन करना होगा। इसके साथ निर्धारित शुल्क जमा करने के अलावा समाचार पत्र में 30 दिनों की दावा-आपत्ति सूचना प्रकाशित कराना भी अनिवार्य रहेगा। इसके बाद निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार नामांतरण की कार्रवाई की जाएगी।
हर तीन साल में बढ़ेगा किराया : दुकानों का वार्षिक किराया स्वीकृत प्रीमियम राशि के निर्धारित प्रतिशत के आधार पर तय किया जाएगा। 10 लाख से अधिक आबादी वाले नगर निगमों के लिए यह दर 7.20 प्रतिशत रखी गई है। साथ ही लीज डीड में प्रत्येक तीन वर्ष की अवधि पूरी होने के बाद किराये में 5 प्रतिशत की चक्रवृद्धि वृद्धि का प्रावधान किया गया है।
15 साल बाद होगा लीज नवीनीकरण : दुकानों की लीज अवधि 15 वर्ष निर्धारित की गई है। अवधि पूरी होने के बाद अगले 15 वर्षों के लिए लीज का नवीनीकरण कराया जा सकेगा। नवीनीकरण के समय मौजूदा किराये में 25 प्रतिशत वृद्धि का प्रावधान रखा गया है। निगम स्वीकृत प्रीमियम राशि के आधार पर किराये का निर्धारण करेगा।
नागरिक सुविधाओं पर खर्च होगी आय का हिस्सा : शॉपिंग कॉम्प्लेक्स से होने वाली आय के उपयोग को लेकर भी नए दिशा-निर्देश बनाए गए हैं। ऋण की अदायगी के बाद बची राशि का 25 प्रतिशत हिस्सा सड़क, नाली, उद्यान, पेयजल और अन्य मूलभूत नागरिक सुविधाओं के विकास व रखरखाव पर खर्च किया जाएगा। इस व्यवस्था का उद्देश्य निगम की व्यावसायिक संपत्तियों से होने वाली आय को व्यवस्थित करने के साथ शहर के विकास में उसका उपयोग सुनिश्चित करना है।
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