रायपुर / छत्तीसगढ़
राज्य जल एवं स्वच्छता मिशन की बैठक में वर्ष 2028 तक शत-प्रतिशत ग्रामीण घरों में पेयजल पहुंचाने का लक्ष्य तय
हेडलाइंस
- मुख्य सचिव ने नियमित जलापूर्ति और पानी की गुणवत्ता जांच पर दिया जोर
- जल जीवन मिशन 2.0 की प्रगति और कार्ययोजना की हुई समीक्षा
- ग्राम पंचायतों को नल-जल योजनाओं के संचालन की जिम्मेदारी
- डिजिटल प्लेटफॉर्म से होगी रियल-टाइम मॉनिटरिंग
- वर्ष 2028 तक हर ग्रामीण घर में शुद्ध पेयजल पहुंचाने का लक्ष्य
रायपुर। विकासशील की अध्यक्षता में मंत्रालय महानदी भवन में राज्य जल एवं स्वच्छता मिशन की अपेक्स कमेटी की महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई। बैठक में जल जीवन मिशन 2.0 के अंतर्गत प्रदेश में नियमित जलापूर्ति, पेयजल की गुणवत्ता और ग्रामीण क्षेत्रों में शुद्ध पेयजल उपलब्ध कराने की योजनाओं की विस्तृत समीक्षा की गई। मुख्य सचिव ने विभागीय अधिकारियों को निर्देश दिए कि केवल अधोसंरचना निर्माण तक सीमित न रहकर अब नियमित जलापूर्ति और पानी की शुद्धता की सतत निगरानी सुनिश्चित की जाए।
जल जीवन मिशन 2.0 के क्रियान्वयन पर विस्तृत चर्चा
बैठक में जल जीवन मिशन 2.0 की कार्ययोजना, पीएम जनमन कार्यक्रम के तहत पीवीटीजी बसाहटों में पेयजल व्यवस्था, जल संरक्षण, जनभागीदारी और सुजलम भारत डिजिटल प्लेटफॉर्म जैसे विषयों पर विस्तार से चर्चा हुई। मुख्य सचिव ने कहा कि गांवों में पानी की टंकियां और नल कनेक्शन स्थापित होने के बाद अब सबसे बड़ी जिम्मेदारी योजनाओं के सुचारू संचालन और रखरखाव की है। उन्होंने ग्राम पंचायतों और स्थानीय समितियों को अधिक सक्रिय भूमिका निभाने के निर्देश दिए। साथ ही महिलाओं की भागीदारी को अनिवार्य बताते हुए पंचायतों के साथ बेहतर समन्वय बनाए रखने पर जोर दिया।
डिजिटल मॉनिटरिंग और वित्तीय पारदर्शिता पर सख्ती
मुख्य सचिव ने जल जीवन मिशन 2.0 के अंतर्गत वित्तीय पारदर्शिता बनाए रखने के लिए स्पष्ट निर्देश जारी किए। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार से प्राप्त राशि का उपयोग केवल स्वीकृत मदों में ही किया जाए। पानी की आपूर्ति व्यवस्था में किसी भी प्रकार की खराबी की तुरंत पहचान और सुधार के लिए सुजलम भारत डिजिटल प्लेटफॉर्म और पीएम गति शक्ति ऐप के माध्यम से रियल-टाइम ट्रैकिंग करने के निर्देश दिए गए। उन्होंने जिला कलेक्टरों को नल-जल योजनाओं की नियमित और प्रभावी मॉनिटरिंग की जिम्मेदारी सौंपी।
दुर्गम और नक्सल प्रभावित क्षेत्रों पर विशेष फोकस
बैठक में नक्सल प्रभावित और दूरस्थ आदिवासी क्षेत्रों में स्वीकृत योजनाओं की समीक्षा भी की गई। अधिकारियों को निर्देशित किया गया कि इन क्षेत्रों में पेयजल योजनाओं के कार्यों में तेजी लाई जाए ताकि निर्धारित समय-सीमा से पहले सभी ग्रामीण परिवारों तक शुद्ध पेयजल पहुंचाया जा सके। मुख्य सचिव ने वर्ष 2028 तक छत्तीसगढ़ के प्रत्येक ग्रामीण घर में शुद्ध पेयजल पहुंचाने के लिए व्यापक कार्ययोजना तैयार करने के निर्देश दिए।
हजारों गांवों में संचालित हो रही योजनाएं
अधिकारियों ने बैठक में बताया कि सिंगल विलेज स्कीम के तहत राज्य में 29 हजार 90 योजनाएं संचालित की जा रही हैं, जिनके माध्यम से गांवों में उपलब्ध जल स्रोतों से पाइपलाइन के जरिए घर-घर नल कनेक्शन दिए जा रहे हैं। वहीं दूरस्थ और समूह आधारित क्षेत्रों के लिए 70 बल्क वॉटर योजनाएं संचालित हैं, जिनमें वॉटर ट्रीटमेंट प्लांट के माध्यम से शुद्ध पानी उपलब्ध कराया जा रहा है। पीएम जनमन कार्यक्रम के तहत पीवीटीजी बसाहटों और एलडब्ल्यूई क्षेत्रों में भी विशेष कार्ययोजना पर तेजी से काम किया जा रहा है।
वरिष्ठ अधिकारियों की रही मौजूदगी
बैठक में महिला एवं बाल विकास विभाग की प्रमुख सचिव शहला निगार, स्वास्थ्य विभाग के सचिव अमित कटारिया, वित्त विभाग के सचिव रोहित यादव, स्कूल शिक्षा विभाग के सचिव डॉ. कमलप्रीत सिंह, लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग के सचिव मोहम्मद कैसर अब्दुल हक और पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग के सचिव भीम सिंह सहित कई वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे। भारत सरकार के जल शक्ति मंत्रालय और पेयजल एवं स्वच्छता विभाग के अधिकारी भी वर्चुअल और प्रत्यक्ष रूप से बैठक में शामिल हुए।
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