नारायणपुर /छत्तीसगढ़
हाइलाइट :
- अबूझमाड़ के दुर्गम इतापानार गांव में पहली बार पहुंची बिजली
- ₹56.11 लाख की लागत से पूरा हुआ प्रोजेक्ट
- बच्चों की पढ़ाई, डिजिटल कनेक्टिविटी और स्वास्थ्य सुविधाओं को मिलेगा बढ़ावा
रायपुर/नारायणपुर: आजादी के 78 साल बाद छत्तीसगढ़ के नारायणपुर जिले के अबूझमाड़ क्षेत्र के दुर्गम इतापानार गांव में पहली बार बिजली पहुंचने से दशकों का अंधेरा छंट गया है। एक ग्रामीण के शब्द इस बदलाव की गहराई को बयां करते हैं—“उस रात हम सोए नहीं, बस देखते रहे कि बल्ब कैसे जल रहा है।” जिला मुख्यालय से महज 30 किलोमीटर दूर होने के बावजूद कठिन भौगोलिक परिस्थितियों के कारण यह गांव अब तक विकास की मुख्यधारा से कटा हुआ था, लेकिन अब यहां रोशनी के साथ उम्मीद भी पहुंच चुकी है।
संघर्ष भरा सफर, इंसानी मेहनत बनी आधार
इतापानार तक बिजली पहुंचाना किसी सामान्य परियोजना जैसा नहीं था। घने जंगल, ऊंची पहाड़ियां और कच्चे रास्ते इस मिशन को बेहद चुनौतीपूर्ण बना रहे थे। मानसून के दौरान यह इलाका पूरी तरह कट जाता है। ऐसे में छत्तीसगढ़ राज्य बिजली वितरण कंपनी की टीम ने मशीनों के बजाय अपने कंधों पर खंभे और तार ढोकर इस कार्य को पूरा किया। यह सिर्फ एक तकनीकी उपलब्धि नहीं, बल्कि जमीनी स्तर पर समर्पण और इच्छाशक्ति का उदाहरण भी है।
प्रशासन का विजन: कोई गांव पीछे न छूटे
इस परियोजना को साकार करने में नारायणपुर कलेक्टर नम्रता जैन की अहम भूमिका रही। लगभग ₹56.11 लाख की लागत से तैयार इस योजना का उद्देश्य साफ था—अंतिम छोर तक विकास पहुंचाना। कलेक्टर के अनुसार, “हर गांव को बुनियादी सुविधाएं मिलनी चाहिए, चाहे वह कितना भी दूर क्यों न हो।” इस पहल ने उन परिवारों के जीवन में रोशनी लाई है, जो पीढ़ियों से लालटेन और लकड़ी के सहारे जीवन बिता रहे थे।
अब खुले विकास के नए रास्ते
बिजली आने से गांव की तस्वीर तेजी से बदलने की उम्मीद है। अब बच्चे रात में भी पढ़ाई कर सकेंगे, जिससे शिक्षा का स्तर सुधरेगा। मोबाइल फोन और अन्य डिजिटल उपकरण अब उपयोगी बनेंगे, जिससे गांव की कनेक्टिविटी बढ़ेगी। इसके अलावा पंखे, लाइट और छोटे उपकरण जैसी बुनियादी सुविधाएं अब ग्रामीणों के जीवन को अधिक सहज और सुरक्षित बनाएंगी।
ग्रामीणों के लिए उम्मीद की नई किरण
इतापानार में बिजली का आगमन सिर्फ एक सुविधा नहीं, बल्कि एक नई शुरुआत है। यह कदम न सिर्फ गांव के वर्तमान को रोशन कर रहा है, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के लिए बेहतर भविष्य की नींव भी रख रहा है। अब यह गांव भी विकास की दौड़ में शामिल हो चुका है, जहां अंधेरे की जगह उम्मीद की रोशनी ने ले ली है।
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