रायपुर,स्वतंत्र छत्तीसगढ़:
हाइलाइट बॉक्स:
राजधानी रायपुर में सामान्य प्रशासन विभाग के नाम पर फर्जी नियुक्ति पत्र जारी होने का मामला सामने आया है। पांच बड़े विभागों की भर्ती दिखाकर युवाओं को भ्रमित किया गया। अधिकारियों के डिजिटल सिग्नेचर का दुरुपयोग हुआ, पुलिस ने FIR दर्ज कर जांच तेज कर दी है।
फर्जी आदेश से फैला भ्रम
राजधानी रायपुर में एक बड़ा फर्जीवाड़ा सामने आया है, जहां सामान्य प्रशासन विभाग के नाम पर नकली नियुक्ति पत्र जारी कर दिए गए। इस आदेश में परिवहन, राजस्व-आपदा प्रबंधन, वन-जलवायु परिवर्तन, पंचायत एवं ग्रामीण विकास और स्कूल शिक्षा जैसे पांच प्रमुख विभागों में भर्ती की अनुशंसा दिखाई गई थी। दस्तावेज में 5 मार्च 2026 की तारीख दर्शाई गई, जिससे यह मामला और विश्वसनीय प्रतीत हो। लेकिन सचिवालय की प्रारंभिक जांच में यह आदेश पूरी तरह फर्जी पाया गया, जिससे अभ्यर्थियों के बीच भारी भ्रम की स्थिति बन गई।
डिजिटल सिग्नेचर का दुरुपयोग
जांच में यह भी सामने आया कि विभागीय सचिव रजत कुमार और उप सचिव शिव कुमार सिंह के डिजिटल सिग्नेचर का गलत इस्तेमाल किया गया है। इस तरह का तकनीकी दुरुपयोग प्रशासनिक सुरक्षा पर भी सवाल खड़े करता है। अधिकारियों के अनुसार, यह फर्जी पत्र डाक के माध्यम से कई अभ्यर्थियों तक भेजे गए, जिससे वे इसे असली मान बैठे। आदेश में चरित्र सत्यापन और प्रशिक्षण के बाद नियुक्ति की प्रक्रिया का उल्लेख किया गया था, जो पूरी तरह भ्रामक और धोखाधड़ी का हिस्सा है।
शिकायत के बाद पुलिस हरकत में
इस मामले की शिकायत अनुभाग अधिकारी राजपाल बघेल ने राखी थाने में दर्ज कराई है। उन्होंने बताया कि इस फर्जी आदेश के कारण कई युवाओं को मानसिक और आर्थिक नुकसान का खतरा पैदा हो गया है। पुलिस ने FIR दर्ज कर मामले की जांच शुरू कर दी है और तकनीकी साक्ष्यों के आधार पर जांच को आगे बढ़ाया जा रहा है। शुरुआती जांच में किसी अंदरूनी व्यक्ति की संलिप्तता की आशंका भी जताई जा रही है।
संदिग्धों से पूछताछ जारी
पुलिस फिलहाल संदिग्ध लोगों से पूछताछ कर रही है और इस फर्जीवाड़े के पीछे के नेटवर्क को खंगालने में जुटी है। अधिकारियों का दावा है कि जल्द ही इस मामले का खुलासा कर आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया जाएगा। वहीं प्रशासन ने युवाओं से अपील की है कि किसी भी नियुक्ति पत्र की सत्यता की जांच आधिकारिक वेबसाइट या संबंधित विभाग से जरूर करें।
युवाओं के लिए सतर्कता जरूरी
इस घटना ने एक बार फिर यह स्पष्ट कर दिया है कि नौकरी के नाम पर ठगी के मामले लगातार बढ़ रहे हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि अभ्यर्थियों को किसी भी दस्तावेज पर भरोसा करने से पहले उसकी आधिकारिक पुष्टि करनी चाहिए। प्रशासन भी अब ऐसे मामलों को गंभीरता से लेते हुए साइबर सुरक्षा को मजबूत करने की दिशा में काम कर रहा है।


