स्वतंत्र छत्तीसगढ़ डेस्क -रायपुर
📌 हाइलाइट्स
- NHAI ने पत्थलगांव-कुनकुरी से झारखंड सीमा तक निर्माण कार्य शुरू किया
- 627 किमी कॉरिडोर का 384 किमी हिस्सा छत्तीसगढ़ में
- 382 संरचनाओं के साथ आधुनिक और सुरक्षित मार्ग तैयार होगा
- जशपुर जिले के लिए बनेगा ‘लाइफलाइन’, व्यापार और रोजगार को बढ़ावा
आधारशिला से जमीन तक पहुँचा प्रोजेक्ट
रायपुर : छत्तीसगढ़ की रजत जयंती के अवसर पर प्रधानमंत्री Narendra Modi द्वारा रखी गई महत्वाकांक्षी परियोजना अब धरातल पर उतर चुकी है। भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (National Highways Authority of India) ने ₹3,147 करोड़ की लागत से पत्थलगांव-कुनकुरी से छत्तीसगढ़-झारखंड सीमा (NH-43) तक सड़क निर्माण कार्य शुरू कर दिया है। यह परियोजना राज्य के बुनियादी ढांचे को मजबूत करने के साथ आर्थिक गतिविधियों को नई दिशा देगी।
कॉरिडोर का अहम हिस्सा छत्तीसगढ़ में
627 किलोमीटर लंबे रायपुर-धनबाद इकोनॉमिक कॉरिडोर का सबसे बड़ा और महत्वपूर्ण 384 किलोमीटर हिस्सा छत्तीसगढ़ से होकर गुजरता है। फिलहाल 104.25 किलोमीटर लंबे पत्थलगांव से झारखंड सीमा खंड पर तेजी से काम जारी है। यह हिस्सा पूरे कॉरिडोर की रीढ़ माना जा रहा है, जो परियोजना की सफलता में निर्णायक भूमिका निभाएगा।
आधुनिक संरचनाओं से लैस होगा हाईवे
इस मार्ग को सुरक्षित और बाधारहित बनाने के लिए 382 संरचनाओं का निर्माण किया जा रहा है। इनमें 7 बड़े पुल, 30 छोटे पुल, 6 फ्लाईओवर और 1 एलीवेटेड वायडक्ट शामिल हैं। इसके अलावा 10 VUP, 18 LVUP, 26 SVUP, 21 पैदल व मवेशी अंडरपास और 278 बॉक्स पुलिया भी बनाई जाएंगी, जिससे स्थानीय यातायात और वन्यजीवों की आवाजाही भी सुगम बनी रहेगी।
औद्योगिक कनेक्टिविटी को मिलेगा बड़ा बढ़ावा
यह कॉरिडोर रायपुर, बिलासपुर, रायगढ़ और कोरबा जैसे औद्योगिक शहरों को सीधे झारखंड के धनबाद से जोड़ेगा। इससे कोयला खदानों और इस्पात उद्योग केंद्रों—रांची और जमशेदपुर—के बीच लॉजिस्टिक्स तेज और सस्ता होगा। परिवहन लागत में कमी और समय की बचत से उद्योगों की प्रतिस्पर्धात्मक क्षमता में वृद्धि होने की उम्मीद है।
जशपुर के लिए बनेगा विकास की लाइफलाइन
यह परियोजना जशपुर जिले के लिए किसी वरदान से कम नहीं मानी जा रही। पत्थलगांव, कांसाबेल, कुनकुरी, दुलदुला और जशपुर जैसे क्षेत्रों को जोड़ते हुए यह मार्ग स्थानीय लोगों के लिए रोजगार, व्यापार और बेहतर कनेक्टिविटी के नए अवसर पैदा करेगा। ईंधन की बचत और यात्रा समय में कमी से आम नागरिकों को भी सीधा लाभ मिलेगा।
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