स्वतंत्र छत्तीसगढ़
🔶 हाइलाइट बॉक्स:
• ऑटो-डेबिट से 24 घंटे पहले अलर्ट देना होगा अनिवार्य
• 15,000 रुपये तक के ट्रांज़ैक्शन पर OTP की जरूरत नहीं
• कुछ मामलों में 1 लाख रुपये तक OTP से छूट
• यूज़र कभी भी ऑटो-डेबिट बदल या कैंसल कर सकेंगे
• नए कार्ड पर पुराने मैंडेट अपने आप ट्रांसफर होंगे
डिजिटल पेमेंट में पारदर्शिता बढ़ाने की पहल
भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) ने ‘डिजिटल पेमेंट्स, ई-मैंडेट फ्रेमवर्क 2026’ के तहत ऑटो-डेबिट पेमेंट सिस्टम में बड़े बदलाव किए हैं। इस कदम का उद्देश्य EMI, सब्सक्रिप्शन, इंश्योरेंस प्रीमियम और यूटिलिटी बिल जैसे नियमित भुगतानों में पारदर्शिता बढ़ाना और उपभोक्ताओं को अधिक नियंत्रण देना है। नए नियम लागू होने के बाद लाखों यूज़र्स को अनचाहे या अनजाने में कटने वाले पेमेंट से राहत मिलने की उम्मीद है।
24 घंटे पहले मिलेगा अलर्ट, बढ़ेगी सुरक्षा
नए फ्रेमवर्क के तहत अब कोई भी ऑटो-डेबिट ट्रांज़ैक्शन करने से कम से कम 24 घंटे पहले ग्राहकों को नोटिफिकेशन भेजना अनिवार्य होगा। इस अलर्ट में कंपनी का नाम, कटने वाली राशि और तारीख जैसी पूरी जानकारी होगी। इससे यूज़र्स समय रहते किसी भी संदिग्ध या अनचाहे ट्रांज़ैक्शन को रोक या संशोधित कर सकेंगे। विशेषज्ञों के अनुसार यह कदम डिजिटल फ्रॉड और अनधिकृत डेबिट के जोखिम को काफी हद तक कम करेगा।
छोटे ट्रांज़ैक्शन पर OTP से राहत
RBI ने छोटे भुगतान को आसान बनाने के लिए 15,000 रुपये तक के ऑटो-डेबिट ट्रांज़ैक्शन पर OTP की अनिवार्यता समाप्त कर दी है। वहीं इंश्योरेंस, म्यूचुअल फंड और क्रेडिट कार्ड बिल जैसे मामलों में यह सीमा 1 लाख रुपये तक रखी गई है। इससे बार-बार OTP डालने की परेशानी कम होगी और डिजिटल पेमेंट का अनुभव अधिक सहज बनेगा।
यूज़र्स को मिलेगा पूरा कंट्रोल
नए नियमों के तहत ग्राहक किसी भी समय अपने ऑटो-डेबिट इंस्ट्रक्शन को बदल या रद्द कर सकते हैं। इसके अलावा, अगर कोई यूज़र नया डेबिट या क्रेडिट कार्ड लेता है, तो पुराने कार्ड से जुड़े मैंडेट अपने आप नए कार्ड में ट्रांसफर हो जाएंगे। इससे भुगतान प्रक्रिया में किसी तरह की रुकावट नहीं आएगी और यूज़र को बार-बार सेटअप करने की जरूरत नहीं होगी।
किन पेमेंट्स पर लागू और क्या है छूट
यह नियम UPI, डेबिट/क्रेडिट कार्ड, OTT सब्सक्रिप्शन, EMI, इंश्योरेंस और यूटिलिटी बिल जैसे अधिकांश नियमित भुगतान पर लागू होंगे। हालांकि FASTag और नेशनल कॉमन मोबिलिटी कार्ड (NCMC) से जुड़े ट्रांज़ैक्शन को इस फ्रेमवर्क से बाहर रखा गया है। RBI के अनुसार यह बदलाव डिजिटल पेमेंट इकोसिस्टम को मजबूत करेगा और उपभोक्ताओं का भरोसा बढ़ाएगा।
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