रायपुर / छत्तीसगढ़
हाइलाइट्स :
- अप्रैल माह के लिए 528 किलोलीटर केरोसिन आवंटित
- अंत्योदय और प्राथमिकता राशनकार्डधारियों को मिलेगा लाभ
- शहरी क्षेत्र में 1 लीटर, ग्रामीण में 2 लीटर प्रति कार्ड
- 30 अप्रैल तक उठाव और वितरण अनिवार्य
खाद्य विभाग का फैसला और वितरण व्यवस्था
प्रदेश में सार्वजनिक वितरण प्रणाली (PDS) के तहत अप्रैल 2026 के लिए केरोसिन का आवंटन जारी कर दिया गया है। खाद्य, नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता संरक्षण विभाग ने केंद्र सरकार से प्राप्त प्रथम तिमाही (अप्रैल-जून) के कोटे में से 528 किलोलीटर केरोसिन राशनकार्डधारियों के लिए निर्धारित किया है। यह केरोसिन उचित मूल्य दुकानों के माध्यम से वितरित किया जाएगा, जिससे पात्र हितग्राहियों को राहत मिल सके।
पात्रता और मात्रा तय, शहरी-ग्रामीण में अंतर
खाद्य विभाग के अनुसार अंत्योदय और प्राथमिकता श्रेणी के सभी राशनकार्डधारियों को इस योजना का लाभ मिलेगा। शहरी क्षेत्रों में प्रति राशनकार्ड अधिकतम 1 लीटर और ग्रामीण क्षेत्रों (अनुसूचित एवं गैर-अनुसूचित) में अधिकतम 2 लीटर केरोसिन प्रदान किया जाएगा। इस व्यवस्था का उद्देश्य जरूरतमंद परिवारों को रसोई ईंधन में सहूलियत देना है, खासकर उन इलाकों में जहां वैकल्पिक ईंधन की उपलब्धता सीमित है।
समयसीमा और प्रशासनिक निर्देश
राज्य शासन ने सभी कलेक्टरों को निर्देश दिए हैं कि केरोसिन का समय-सीमा के भीतर उठाव और वितरण सुनिश्चित किया जाए। जिन दुकानों में मांग कम है, वहां से शेष स्टॉक को अन्य जरूरतमंद दुकानों में पुनः आवंटित किया जाएगा ताकि कहीं भी कमी न हो। अप्रैल माह के लिए आवंटित केरोसिन का उठाव 30 अप्रैल 2026 तक अनिवार्य किया गया है, वहीं ऑयल कंपनियों को भी लैप्स कोटा की जानकारी इसी तिथि तक विभाग को देने के निर्देश दिए गए हैं।
जिलावार आवंटन की स्थिति
खाद्य विभाग के अनुसार बिलासपुर जिले को सर्वाधिक 36 किलोलीटर केरोसिन आवंटित किया गया है। इसके अलावा बस्तर, कांकेर, जांजगीर-चांपा, कोरबा, दुर्ग, बलौदाबाजार-भाटापारा, महासमुंद, रायपुर और जशपुर जिलों को 24-24 किलोलीटर आवंटन मिला है। राज्य के अन्य शेष जिलों के लिए 12-12 किलोलीटर केरोसिन निर्धारित किया गया है।
प्रभाव और लाभार्थियों के लिए संदेश
यह आवंटन प्रदेश के लाखों राशनकार्डधारियों के लिए राहत भरा कदम माना जा रहा है। प्रशासन द्वारा प्रचार-प्रसार के निर्देश भी दिए गए हैं ताकि पात्र हितग्राही अपनी पात्रता और निर्धारित मात्रा की जानकारी समय रहते प्राप्त कर सकें। इससे वितरण प्रक्रिया पारदर्शी बनेगी और जरूरतमंदों तक समय पर लाभ पहुंच सकेगा।
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