बसना /महासमुंद/छत्तीसगढ़
हाइलाइट बॉक्स:
• बसना क्षेत्र के ऐतिहासिक गढ़फुलझर में भव्य होला मोहल्ला कार्यक्रम आयोजित
• मुख्यमंत्री ने गुरु ग्रंथ साहिब के समक्ष माथा टेककर लिया आशीर्वाद
• नानकसागर और गढ़फुलझर को पर्यटन स्थल के रूप में विकसित करने 2.50 करोड़ स्वीकृत
• अमृतसर की तर्ज पर भव्य गुरुद्वारा निर्माण की भी योजना
पवित्र नानकसागर में हुआ भव्य कीर्तन समागम
महासमुंद जिले के बसना क्षेत्र स्थित ऐतिहासिक और धार्मिक स्थल गढ़फुलझर के नानकसागर में आयोजित भव्य होला मोहल्ला कार्यक्रम में मुख्यमंत्री विष्णु देव साय शामिल हुए। उन्होंने पवित्र गुरु ग्रंथ साहिब के समक्ष माथा टेककर प्रदेशवासियों की सुख-समृद्धि की कामना की और विशेष कीर्तन समागम तथा अरदास में भाग लिया। इस अवसर पर सिख समाज की ओर से मुख्यमंत्री को सरोपा भेंट कर सम्मानित किया गया। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में श्रद्धालु और स्थानीय जनप्रतिनिधि उपस्थित रहे, जिससे पूरे क्षेत्र में धार्मिक और सांस्कृतिक उत्साह का वातावरण दिखाई दिया।
गढ़फुलझर को पर्यटन स्थल के रूप में विकसित करने की घोषणा
मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने अपने संबोधन में कहा कि गढ़फुलझर की पावन भूमि पर स्थित नानकसागर सिख समाज के लिए अत्यंत आस्था का केंद्र है, क्योंकि यहां सिखों के प्रथम गुरु गुरु नानक देव जी के चरण पड़े थे। उन्होंने बताया कि राज्य सरकार पहले ही गढ़फुलझर को पर्यटन स्थल के रूप में विकसित करने की घोषणा कर चुकी है और इसके लिए लगभग 2.50 करोड़ रुपये की स्वीकृति दी गई है। विकास कार्य जारी हैं और अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं कि कार्य को शीघ्र पूरा किया जाए ताकि यह स्थल धार्मिक पर्यटन के रूप में नई पहचान बना सके। मुख्यमंत्री ने कहा कि छत्तीसगढ़ संतों की तपोभूमि रही है और यहां आकर उन्हें गर्व और आनंद की अनुभूति हो रही है।
ऐतिहासिक विरासत से जुड़ा है गढ़फुलझर का महत्व
कार्यक्रम में बसना विधायक संपत अग्रवाल ने कहा कि गढ़फुलझर में अमृतसर के स्वर्ण मंदिर की तर्ज पर भव्य गुरुद्वारा बनाने की योजना है, जिससे क्षेत्र की धार्मिक आस्था और पर्यटन दोनों को नई दिशा मिलेगी। वहीं सिख समाज के प्रतिनिधि रिंकू सिंह ओबेरॉय ने बताया कि ऐतिहासिक दस्तावेजों के अनुसार लगभग 520 वर्ष पूर्व गुरु नानक देव जी अपनी पहली उदासी (विश्व भ्रमण) के दौरान अमरकंटक और शिवरीनारायण होते हुए जगन्नाथ मंदिर की यात्रा के मार्ग में गढ़फुलझर आए थे और यहां दो दिन तक रुके थे। उनके उपदेशों से प्रभावित होकर तत्कालीन आदिवासी राजा मानस राज सागर चंद भेना ने करीब 5 एकड़ भूमि गुरु महाराज के नाम समर्पित की थी, जिसे आज भी “गुरुखाप” के नाम से जाना जाता है।
धार्मिक और पर्यटन केंद्र के रूप में उभरने की संभावनाएं
गढ़फुलझर न केवल सिख समाज की आस्था का केंद्र है, बल्कि यह सर्वधर्म समभाव की भी मिसाल माना जाता है। यहां अभेद किले के अवशेष, प्राचीन सुरंगें, रानी महल के अवशेष, रनेश्वर रामचंडी मंदिर और बूढ़ादेव मंदिर जैसे कई ऐतिहासिक और धार्मिक स्थल मौजूद हैं। स्थानीय लोगों का मानना है कि भविष्य में यहां भव्य गुरुधाम बनने के बाद यह क्षेत्र एक बड़े धार्मिक और पर्यटन केंद्र के रूप में विकसित होगा और देशभर से श्रद्धालु यहां पहुंचेंगे। गुरु नानक देव जी के शांति, सेवा और भाईचारे के संदेश को आगे बढ़ाने में भी यह स्थल महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।
बड़ी संख्या में जनप्रतिनिधि और श्रद्धालु रहे मौजूद
इस अवसर पर कृषि मंत्री रामविचार नेताम, बसना विधायक संपत अग्रवाल, डॉ. भगवान सिंह खोजी, ज्ञानी हरदीप सिंह, दविंदर सिंह, कमलजीत सिंह, नितिनदीप सिंह, कंवलप्रीत सिंह, अमृतपाल सिंह, देवेंद्र सिंह आनंद और रोमी सलूजा सहित सिख समाज के अनेक प्रतिनिधि मौजूद रहे। इसके अलावा छत्तीसगढ़ राज्य बीज निगम के अध्यक्ष चंद्रहास चंद्राकर, येतराम साहू, अखिलेश सोनी, भूपेंद्र सिंह सवन्नी, इंद्रजीत सिंह गोल्डी, अमरजीत छाबड़ा, सरपंच हरप्रीत कौर, गिरधारी साहू और चतुर्भुज आर्य सहित कई गणमान्य नागरिकों ने कार्यक्रम में भाग लिया।
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