रायपुर / छत्तीसगढ़
हाइलाइट्स:
• शराब घोटाला मामले में हाईकोर्ट ने दी सशर्त जमानत
• ED और EOW की गिरफ्तारी को चुनौती के बाद राहत
• चार्जशीट पेश होने के दिन मिलेगी जमानत का लाभ
• अब तक 6 बार हो चुकी है हिरासत
• 3200 करोड़ रुपए के कथित घोटाले की जांच जारी
सशर्त राहत, लेकिन तुरंत रिहाई नहीं
छत्तीसगढ़ के बहुचर्चित शराब घोटाला मामले में पूर्व मुख्यमंत्री Bhupesh Baghel की पूर्व डिप्टी सेक्रेटरी रहीं Soumya Chaurasia को हाईकोर्ट से सशर्त जमानत मिल गई है। हालांकि अदालत ने स्पष्ट किया है कि जमानत का प्रभाव उस दिन से लागू होगा, जिस दिन आर्थिक अपराध शाखा (EOW) इस मामले में चार्जशीट पेश करेगी। ऐसे में फिलहाल उनकी जेल से तत्काल रिहाई संभव नहीं मानी जा रही। उनके वकील हर्षवर्धन परगनिहा के अनुसार, निर्धारित समयसीमा के तहत लगभग 45 दिन बाद उन्हें रिहाई का लाभ मिल सकता है।
सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के बाद हाईकोर्ट में सुनवाई
गौरतलब है कि इससे पहले सौम्या चौरसिया को कोयला घोटाले में गिरफ्तार किया गया था, जहां से उन्हें सुप्रीम कोर्ट से जमानत मिल चुकी थी। शराब घोटाले में प्रवर्तन निदेशालय (ED) और EOW द्वारा दो माह पूर्व दोबारा गिरफ्तारी के बाद उन्होंने पहले हाईकोर्ट में जमानत याचिका दायर की, जिसे खारिज कर दिया गया था। इसके बाद सुप्रीम कोर्ट ने 9 फरवरी को निर्देश दिया कि वे पुनः हाईकोर्ट में याचिका प्रस्तुत करें और मामले की प्राथमिकता से सुनवाई की जाए। सुनवाई के दौरान अदालत ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद आदेश सुरक्षित रखा था, जिस पर अब फैसला सुनाया गया है।
3200 करोड़ के कथित घोटाले की जांच
ED की जांच में करीब 3200 करोड़ रुपए के कथित शराब घोटाले का खुलासा होने का दावा किया गया है। जांच एजेंसियों के अनुसार, तत्कालीन सरकार के कार्यकाल में अधिकारियों और कारोबारियों के कथित सिंडिकेट के माध्यम से अवैध कमीशन, नकली होलोग्राम और सप्लाई जोन में हेरफेर के जरिए आर्थिक अनियमितताएं की गईं। A, B और C श्रेणी में विभाजित कथित तंत्र के तहत डिस्टलरी संचालकों से कमीशन वसूली, सरकारी दुकानों के माध्यम से नकली होलोग्राम वाली शराब की बिक्री और सप्लाई एरिया में बदलाव कर धन उगाही जैसे आरोप सामने आए हैं। जांच अभी जारी है और एजेंसियां आगे की कानूनी प्रक्रिया पर काम कर रही हैं।
बार-बार गिरफ्तारी पर उठे सवाल
सौम्या चौरसिया के वकील ने अदालत में तर्क दिया कि विभिन्न जांच एजेंसियां अलग-अलग FIR दर्ज कर बार-बार गिरफ्तारी कर रही हैं, जो राजनीतिक उद्देश्य से प्रेरित प्रतीत होती है। याचिका में यह भी उल्लेख किया गया कि अब तक उन्हें छह बार हिरासत में लिया जा चुका है। हालांकि अदालत ने कानूनी प्रक्रिया का पालन करते हुए चरणबद्ध सुनवाई का मार्ग अपनाया और सशर्त राहत प्रदान की।
आगे की कानूनी प्रक्रिया पर निगाह
हाईकोर्ट के आदेश के बाद अब निगाह इस बात पर टिकी है कि EOW कब तक अपनी चार्जशीट दाखिल करती है। चार्जशीट दाखिल होने के दिन से जमानत प्रभावी होने की शर्त के कारण फिलहाल कानूनी औपचारिकताएं पूरी होना आवश्यक है। राजनीतिक और प्रशासनिक हलकों में इस फैसले को महत्वपूर्ण माना जा रहा है, जबकि मामले की जांच और संभावित ट्रायल पर सभी की नजर बनी हुई है।
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