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Friday, February 27, 2026

Naxal Surrender: कांकेर में डीवीसीएम मासे बारसा ने एके-47 के साथ किया सरेंडर, मुख्यधारा में लौटने का फैसला…

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कांकेर/छत्तीसगढ़

कांकेर: छत्तीसगढ़ में नक्सल विरोधी अभियान के बीच एक और बड़ी सफलता सामने आई है। कांकेर जिले के छिंदपदर गांव की नक्सली डीवीसीएम (डिविजनल कमेटी मेंबर) मासे बारसा ने एके-47 रायफल के साथ पुलिस के समक्ष आत्मसमर्पण कर दिया है। लंबे समय से सक्रिय रही महिला नक्सली के इस कदम को सुरक्षा बलों के लिए महत्वपूर्ण उपलब्धि माना जा रहा है।

2003 से दण्डकारण्य और अबूझमाड़ में थी सक्रिय
जानकारी के अनुसार मासे बारसा वर्ष 2003 से दण्डकारण्य, अबूझमाड़ और उत्तर बस्तर क्षेत्र में सक्रिय रही थी। वह संगठन में डीवीसीएम पद पर कार्यरत थी और कई नक्सली गतिविधियों में उसकी भूमिका बताई जा रही है। जंगल क्षेत्र से निकलकर वह सीधे कांकेर पहुंची और पुलिस अधीक्षक निखिल रखेचा के समक्ष आत्मसमर्पण किया।

इस दौरान बस्तर रेंज के आईजी सुंदर राज पी भी मौजूद रहे। अधिकारियों ने बताया कि शासन की पुनर्वास नीति के तहत आत्मसमर्पण करने वाले नक्सलियों को नियमानुसार आर्थिक सहायता, प्रशिक्षण और समाज की मुख्यधारा में शामिल होने के अवसर प्रदान किए जाते हैं।

अन्य नक्सलियों से की अपील
पुलिस अधिकारियों ने कहा कि लगातार चल रहे अभियानों और शासन की प्रभावी नीतियों के कारण नक्सली संगठन कमजोर हो रहा है। आईजी और एसपी ने अन्य माओवादियों से भी हिंसा का रास्ता छोड़कर मुख्यधारा से जुड़ने की अपील की है। उन्होंने भरोसा दिलाया कि आत्मसमर्पण करने वालों को सुरक्षा और पुनर्वास की पूरी सुविधा दी जाएगी।

प्रदेश में लगातार हो रहे आत्मसमर्पण से यह संकेत मिल रहा है कि सरकार की नीति और सुरक्षा बलों की रणनीति का असर अब जमीनी स्तर पर दिखाई देने लगा है।

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