कोरबा/ छत्तीसगढ़
मुख्य बिंदु
- सर्दी, खांसी और निमोनिया से पीड़ित 13 माह की बच्ची की इलाज के दौरान मौत
- इंजेक्शन के बाद कोमा में जाने का परिजनों का आरोप
- अस्पताल परिसर में परिजनों का हंगामा, निष्पक्ष जांच की मांग
- प्रबंधन ने लापरवाही से किया इनकार, 3 डॉक्टरों की जांच टीम गठित
- पोस्टमार्टम के बाद रिपोर्ट के आधार पर कार्रवाई का आश्वासन
बीमारी से भर्ती, इलाज के दौरान बिगड़ी हालत
छत्तीसगढ़ के कोरबा स्थित मेडिकल कॉलेज अस्पताल में 13 माह की बच्ची वान्या केवट की इलाज के दौरान मौत हो गई। बरमपुर निवासी प्रियंका केवट और संजू केवट अपनी बच्ची को सर्दी, खांसी और बुखार की शिकायत पर 19 फरवरी को अस्पताल लेकर पहुंचे थे। परिजनों के अनुसार, डॉक्टरों ने निमोनिया की आशंका जताते हुए भर्ती करने की सलाह दी। बच्ची को आपातकालीन वार्ड में भर्ती कर केन्युला लगाया गया। आरोप है कि इंजेक्शन लगाने के तुरंत बाद बच्ची की तबीयत अचानक बिगड़ गई और वह कोमा में चली गई। चार दिन तक जीवन और मौत के बीच संघर्ष करने के बाद मंगलवार रात उसकी मृत्यु हो गई।
अस्पताल परिसर में विरोध, संवेदनशीलता पर सवाल
घटना के बाद आक्रोशित परिजन मेडिकल कॉलेज के ट्रॉमा सेंटर के बाहर धरने पर बैठ गए और करीब डेढ़ से दो घंटे तक हंगामा किया। उनका आरोप है कि इलाज में लापरवाही बरती गई और गंभीर स्थिति के बावजूद डॉक्टरों ने संवेदनशीलता नहीं दिखाई। मृत बच्ची की नानी अमृता निषाद ने कहा कि “इंजेक्शन लगाते ही बच्ची तड़पने लगी और फिर कोमा में चली गई। चार दिन तक हालत में सुधार नहीं हुआ, यह बेहद दुखद है।” परिजनों ने संबंधित डॉक्टरों और स्टाफ पर सख्त कार्रवाई की मांग की। मौके पर पुलिस और नायब तहसीलदार पहुंचे, जिन्होंने समझाइश देकर स्थिति को नियंत्रित किया।
प्रबंधन का इनकार, जांच टीम गठित
अस्पताल अधीक्षक डॉ. गोपाल कंवर ने बताया कि बच्ची निमोनिया से गंभीर रूप से पीड़ित थी और उसकी हालत पहले से नाजुक थी। उन्होंने कहा कि डॉक्टरों ने उसे बचाने का पूरा प्रयास किया, लापरवाही नहीं बरती गई। हालांकि, मामले की निष्पक्ष जांच के लिए तीन सदस्यीय समिति गठित की गई है, जिसमें डॉ. शशीकांत भास्कर, डॉ. अनुपमा और डॉ. भोज कुमार साहू शामिल हैं। प्रारंभ में परिजन पोस्टमार्टम के लिए तैयार नहीं थे, लेकिन प्रशासन के आश्वासन के बाद सहमति दी गई। अब जांच रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।
स्वास्थ्य व्यवस्था पर फिर उठे सवाल
यह घटना एक बार फिर सरकारी अस्पतालों की कार्यप्रणाली और जवाबदेही पर सवाल खड़े करती है। परिजनों का कहना है कि बच्ची कुछ दिन पहले तक सामान्य रूप से खेल रही थी और अस्पताल में भर्ती होने के बाद उसकी हालत बिगड़ी। वहीं, अस्पताल प्रबंधन का दावा है कि बीमारी गंभीर थी। अब सभी की निगाहें जांच रिपोर्ट पर टिकी हैं, जो यह स्पष्ट करेगी कि यह त्रासदी चिकित्सकीय जटिलता का परिणाम थी या वास्तव में लापरवाही का मामला।
न्याय की मांग और आगे की प्रक्रिया
परिवार ने मांग की है कि यदि जांच में किसी प्रकार की चूक सामने आती है तो जिम्मेदारों पर ठोस कार्रवाई की जाए, ताकि भविष्य में किसी और परिवार को ऐसी पीड़ा न झेलनी पड़े। पोस्टमार्टम रिपोर्ट और जांच समिति की निष्कर्षात्मक रिपोर्ट आने के बाद ही पूरे मामले की सच्चाई सामने आ पाएगी। फिलहाल, मासूम वान्या की मौत ने पूरे क्षेत्र को शोक और आक्रोश से भर दिया है।
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