क्राइम ब्रांच की WR-2 टीम ने जीरो टॉलरेंस नीति के तहत बड़ी कार्रवाई करते हुए 418 ग्राम कोकीन और 925 एमडीएमए (एक्स्टसी) टैबलेट जब्त कीं। अंतरराष्ट्रीय बाजार में इनकी अनुमानित कीमत करीब 5 करोड़ रुपये आंकी गई है। दो विदेशी नागरिकों की गिरफ्तारी के साथ दिल्ली में सक्रिय अंतरराष्ट्रीय ड्रग नेटवर्क को बड़ा झटका लगा है।
सख्त निगरानी और सटीक इनपुट से पहली गिरफ्तारी
नई दिल्ली | ड्रग्स के खिलाफ चल रहे अभियान के तहत क्राइम ब्रांच WR-2 टीम लंबे समय से दिल्ली के ड्रग डीलिंग नेटवर्क पर नजर रखे हुए थी। 2 दिसंबर 2025 को हेड कांस्टेबल संदीप कादियान को मिली गुप्त सूचना के आधार पर पता चला कि नाइजीरियाई नागरिक फ्रैंक विटस, जो पहले भी एनडीपीएस मामलों में शामिल रहा है, साउथ दिल्ली में कोकीन और एमडीएमए की सप्लाई कर रहा है। डीसीपी क्राइम ब्रांच हर्ष इंदौरा के निर्देश और एसीपी WR-2 राजपाल डबस की निगरानी में इंस्पेक्टर अक्षय गहलोत के नेतृत्व में विशेष टीम गठित की गई। तकनीकी और मैनुअल सर्विलांस के बाद सटीक रेड कर फ्रैंक विटस को गिरफ्तार किया गया, जिसके पास से 418 ग्राम कोकीन और 910 एमडीएमए टैबलेट बरामद हुईं।
स्रोत तक पहुंची जांच, दूसरा आरोपी भी काबू
पूछताछ और मोबाइल विश्लेषण के दौरान पुलिस ड्रग्स के स्रोत तक पहुंची, जो मेहरौली इलाके में रह रहा एक अन्य नाइजीरियाई नागरिक निकला। लगातार प्रयासों के बाद संडे ओटू को उसके किराए के कमरे से गिरफ्तार किया गया, जहां से 15 एक्स्टसी टैबलेट बरामद की गईं। संडे ओटू ने बताया कि वह पिछले दो वर्षों से सागरपुर में रहकर फ्रैंक को ड्रग्स सप्लाई कर रहा था और गिरफ्तारी के बाद लोकेशन बदलकर मेहरौली आ गया था। दोनों आरोपियों ने खुलासा किया कि पूरे सिंडिकेट का सरगना नाइजीरिया में बैठा है और दिल्ली में एक अफ्रीकी महिला के जरिए ड्रग्स की डिलीवरी कराई जाती थी।
पुराना रिकॉर्ड, अंतरराष्ट्रीय कनेक्शन और आगे की जांच
फ्रैंक विटस ने स्वीकार किया कि वह 2012 में बिजनेस वीजा पर भारत आया था और 2015 में एनसीबी द्वारा एनडीपीएस एक्ट के तहत गिरफ्तार हुआ था, जिसके बाद उसका पासपोर्ट कोर्ट में जमा है। 2024 में जमानत पर रिहा होने के बाद आर्थिक तंगी के चलते उसने नाइजीरिया में बैठे ड्रग डीलर एलो चुक्वू से संपर्क किया। वहीं, संडे ओटू ने भी व्यापार में नुकसान के बाद ड्रग नेटवर्क में शामिल होने की बात कबूली। क्राइम ब्रांच अधिकारियों के अनुसार, इस कार्रवाई से दिल्ली में सक्रिय अंतरराष्ट्रीय ड्रग सिंडिकेट को बड़ा झटका लगा है और नेटवर्क के अन्य सदस्यों की पहचान के लिए जांच जारी है।
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