रोहिणी में वायु गुणवत्ता सूचकांक 474 तक पहुंचा, 31 निगरानी केंद्रों पर हवा गंभीर श्रेणी में दर्ज; सुप्रीम कोर्ट ने प्रदूषण और गरीबों की आजीविका पर जताई चिंता।
नई दिल्ली : देश की राजधानी दिल्ली में दिवाली के पटाखे फूटने से पहले ही वायु प्रदूषण ने गंभीर रूप ले लिया है। ठंड की शुरुआत के साथ दिल्ली की हवा जहरीली होती जा रही है और कई इलाकों में एयर क्वालिटी इंडेक्स (AQI) 400 के पार पहुंच गया है। शुक्रवार, 6 नवंबर को दिल्ली का औसत AQI 391 दर्ज किया गया, जबकि रोहिणी में यह बढ़कर 474 तक पहुंच गया। केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (CPCB) के आंकड़ों के अनुसार, राजधानी के 31 निगरानी केंद्रों पर हवा की गुणवत्ता गंभीर श्रेणी में दर्ज की गई, जबकि 28 केंद्रों पर स्थिति बहुत खराब रही। प्रदूषण की बिगड़ती स्थिति को देखते हुए वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (CAQM) ने ग्रेडेड रिस्पॉन्स एक्शन प्लान (GRAP) के तीसरे चरण यानी GRAP-3 की पाबंदियां लागू कर दी हैं। जिनमे 1. निर्माण कार्यों पर रोक, 2. पुराने वाहनों पर प्रतिबंध ,3. स्टोन क्रशर और खनन गतिविधियों पर रोक |
प्रदूषण से सबसे ज्यादा प्रभावित इलाकों में रोहिणी 474 AQI के साथ शीर्ष पर रहा। इसके अलावा पंजाबी बाग में 465, जहांगीरपुरी में 458, दिल्ली टेक्नोलॉजिकल यूनिवर्सिटी (DTU) में 454, आरके पुरम में 450, मुंडका में 446, विवेक विहार में 438, सोनिया विहार में 436, बवाना में 435 और अलीपुर में 434 AQI दर्ज किया गया। दिवाली से पहले ही प्रदूषण का स्तर बढ़ने के पीछे वाहनों की बढ़ती आवाजाही, यातायात का दबाव और अन्य प्रदूषणकारी गतिविधियों को प्रमुख कारण माना जा रहा है। इस बीच सुप्रीम कोर्ट ने भी दिल्ली-NCR की बिगड़ती वायु गुणवत्ता पर चिंता जताई है। मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ ने सवाल उठाया कि लगातार चर्चा और सुझावों के बावजूद दिल्ली का AQI 400 तक कैसे पहुंच रहा है। अदालत ने गाजियाबाद, गुरुग्राम, फरीदाबाद और ग्रेटर नोएडा से दिल्ली को जोड़ने वाली सड़कों पर भारी यातायात को लेकर भी चिंता जाहिर की।
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि वायु प्रदूषण का सबसे ज्यादा असर गरीब और रोजाना मेहनत-मजदूरी करके जीवनयापन करने वाले लोगों पर पड़ता है, क्योंकि उन्हें सड़कों पर रहकर काम करना पड़ता है। अदालत ने प्रदूषण नियंत्रण के उपायों के साथ उनकी आजीविका का ध्यान रखने की जरूरत भी बताई। पराली जलाने की समस्या पर किसानों को जागरूक करने और खेतों में आग लगाने के बजाय मशीनों के इस्तेमाल को प्रोत्साहित करने की बात कही गई। GRAP-3 लागू होने के बाद निर्माण और विध्वंस गतिविधियों सहित कई क्षेत्रों पर सख्त प्रतिबंध लागू होते हैं। अब सबसे बड़ी चुनौती दिवाली के दौरान प्रदूषण को और गंभीर होने से रोकने की है। राजधानी की मौजूदा स्थिति ने एक बार फिर वायु प्रदूषण नियंत्रण के उपायों और उनके प्रभावी क्रियान्वयन पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
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