महंत कॉलेज में अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और Gen-G के भविष्य पर मंथन, विशेषज्ञों ने कहा- असहमति में भी गरिमा और शालीनता जरूरी…

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रायपुर, छत्तीसगढ़

हेड लाइंस:

साथी संदेश समाचार पत्र के 14वें स्थापना दिवस पर महंत कॉलेज में परिचर्चा
अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता को बताया प्रत्येक नागरिक का संवैधानिक अधिकार
Gen-G के आंदोलनों और युवाओं के भविष्य पर वक्ताओं ने रखे विचार
विरोध प्रदर्शन में गरिमा और शालीनता बनाए रखने पर दिया जोर
पीएचडी हासिल करने वाले महंत कॉलेज के प्राध्यापकों का हुआ सम्मान

रायपुर: महंत कॉलेज के पत्रकारिता विभाग की ओर से ‘अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और Gen-G का भविष्य’ विषय पर परिचर्चा का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का आयोजन साथी संदेश समाचार पत्र के 14वें स्थापना दिवस के अवसर पर किया गया। परिचर्चा में वरिष्ठ पत्रकारों, साहित्यकारों, शिक्षाविदों, जनप्रतिनिधियों और विभिन्न क्षेत्रों से जुड़े विशिष्ट अतिथियों ने हिस्सा लिया। कार्यक्रम में अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता, असहमति के अधिकार, वर्तमान दौर में युवाओं की भूमिका तथा Gen-G यानी नई पीढ़ी के सामने मौजूद चुनौतियों और संभावनाओं पर विस्तार से विचार-विमर्श किया गया।

अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर हुई गंभीर चर्चा: परिचर्चा में वक्ताओं ने कहा कि अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता प्रत्येक नागरिक का संवैधानिक अधिकार है, लेकिन इसके साथ जिम्मेदारी भी जुड़ी हुई है। अपने विचार व्यक्त करने के अधिकार के साथ यह भी जरूरी है कि अभिव्यक्ति सामाजिक मर्यादा और कानून की सीमाओं का सम्मान करे। वक्ताओं ने कहा कि लोकतंत्र में असहमति के लिए स्थान होना आवश्यक है। अलग-अलग विचारों और मतों के बीच संवाद लोकतांत्रिक व्यवस्था को मजबूत करता है, लेकिन असहमति को किसी भी स्थिति में अपमानजनक या अशोभनीय व्यवहार का माध्यम नहीं बनना चाहिए।

Gen-G के आंदोलनों पर भी हुआ मंथन: चर्चा के दौरान हाल के Gen-G यानी जेनरेशन-जी के विरोध प्रदर्शनों का संदर्भ लेते हुए वक्ताओं ने कहा कि नई पीढ़ी जिन मुद्दों को उठा रही है, वे प्रासंगिक और महत्वपूर्ण हैं। युवाओं की आवाज को समझना और उनके सवालों पर संवाद करना समय की आवश्यकता है। वक्ताओं ने कहा कि युवा वर्ग आज सामाजिक, राजनीतिक और आर्थिक विषयों पर पहले की तुलना में अधिक मुखर है। डिजिटल माध्यमों और सोशल मीडिया ने उनकी आवाज को व्यापक मंच दिया है। ऐसे में युवाओं की ऊर्जा और विचारों को सकारात्मक दिशा देना समाज की सामूहिक जिम्मेदारी है।

विरोध में भी बनी रहे गरिमा: परिचर्चा में यह भी कहा गया कि लोकतांत्रिक समाज में विरोध और असहमति का अधिकार महत्वपूर्ण है, लेकिन विरोध प्रदर्शन गरिमापूर्ण और सभ्य होना चाहिए। किसी मुद्दे पर असहमति व्यक्त करते समय भाषा और व्यवहार की मर्यादा बनाए रखना जरूरी है। वक्ताओं ने स्पष्ट किया कि विरोध कभी भी अभद्र, अपमानजनक या अशोभनीय नहीं होना चाहिए। लोकतांत्रिक मूल्यों की रक्षा के लिए अधिकारों के साथ कर्तव्यों और जिम्मेदारियों को समझना भी उतना ही आवश्यक है।

कई विशिष्ट अतिथि हुए शामिल: कार्यक्रम में वरिष्ठ पत्रकार गिरीश पंकज, साहित्यकार डॉ. महेंद्र कुमार ठाकुर, स्वराज दास, डॉ. माणिक विश्वकर्मा नवरंग, छत्तीसगढ़ साहित्य अकादमी के अध्यक्ष शशांक शर्मा, प्रदेश कांग्रेस प्रवक्ता सुशील आनंद शुक्ला, छत्तीसगढ़ राज्य सहकारी बैंक के अध्यक्ष केदार गुप्ता, छत्तीसगढ़ गृह निर्माण मंडल के अध्यक्ष अनुराग सिंहदेव, बिरगांव नगर निगम के महापौर नंदलाल देवांगन, छत्तीसगढ़ राज्य आंदोलन के प्रणेता डॉ. उदयभान सिंह चौहान, राज्य दिव्यांगजन कल्याण परिषद के अध्यक्ष लोकेश कवाड़िया, कांग्रेस नेता डॉ. राकेश गुप्ता, महंत कॉलेज के प्राचार्य डॉ. देवाशीष मुखर्जी और सेंट्रल जीएसटी के अधीक्षक एम. राजीव सहित अन्य गणमान्य लोग मौजूद रहे।

महंत कॉलेज के प्राध्यापकों का सम्मान: कार्यक्रम के दौरान महंत कॉलेज के उन प्राध्यापकों को भी सम्मानित किया गया, जिन्होंने पीएचडी की उपाधि हासिल की है। वरिष्ठ पत्रकार एवं मीडिया शिक्षाविद डॉ. रामप्रसाद दुबे तथा डॉ. विभाष कुमार झा को पीएचडी उपाधि प्राप्त करने के लिए सम्मानित किया गया। इस अवसर पर कॉलेज परिवार की ओर से उनकी शैक्षणिक उपलब्धि की सराहना की गई।

छात्रों के लिए संवाद का महत्वपूर्ण मंच: पत्रकारिता विभाग द्वारा आयोजित इस परिचर्चा ने विद्यार्थियों को अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और लोकतांत्रिक मूल्यों से जुड़े महत्वपूर्ण विषयों को प्रत्यक्ष रूप से समझने का अवसर दिया। पत्रकारिता के विद्यार्थियों के लिए यह विषय विशेष महत्व रखता है, क्योंकि मीडिया के माध्यम से विचारों और सूचनाओं को समाज तक पहुंचाने में अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता की केंद्रीय भूमिका होती है। साथ ही पत्रकारिता में तथ्य, जिम्मेदारी, नैतिकता और सामाजिक सरोकारों का पालन भी आवश्यक माना जाता है।

युवा पीढ़ी के भविष्य को लेकर विचार: कार्यक्रम में Gen-G के भविष्य को लेकर भी चर्चा हुई। वक्ताओं ने कहा कि नई पीढ़ी तकनीक, सोशल मीडिया और तेजी से बदलती सामाजिक परिस्थितियों के बीच आगे बढ़ रही है। ऐसे समय में युवाओं को केवल अपने अधिकारों के प्रति जागरूक होना ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि उन्हें अपने सामाजिक दायित्वों और लोकतांत्रिक जिम्मेदारियों को भी समझना होगा। विचारों की स्वतंत्रता और जिम्मेदार अभिव्यक्ति के बीच संतुलन बनाना भविष्य के समाज के लिए महत्वपूर्ण होगा।

आभार के साथ हुआ समापन: कार्यक्रम के अंत में प्रोफेसर प्रीतम दास ने आभार प्रदर्शन किया। परिचर्चा के माध्यम से अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता, असहमति की लोकतांत्रिक भूमिका और Gen-G के भविष्य से जुड़े मुद्दों पर गंभीर संवाद का अवसर मिला। साथ ही शिक्षकों के सम्मान और विद्यार्थियों की सहभागिता ने कार्यक्रम को विशेष बनाया।

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