स्वतंत्र छत्तीसगढ़
जगदलपुर: NEET परीक्षा में असफलता के बाद जगदलपुर की छात्रा हरिका राव नायडू की मौत ने शैक्षणिक दबाव और परीक्षा व्यवस्था को लेकर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। घटना के बाद कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के छत्तीसगढ़ प्रमुख महेंद्र भारद्वाज अपनी टीम के साथ आड़ावाल स्थित हरिका के घर पहुंचे और शोकाकुल परिजनों से मुलाकात की।
हेड लाइंस
हरिका के परिजनों से मिले CJP प्रमुख महेंद्र भारद्वाज
सरकार से उचित मुआवजा देने की मांग
NEET परीक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता और जवाबदेही की मांग
अगस्त-सितंबर से ‘क्या बोलती पब्लिक’ अभियान शुरू करने की तैयारी
परिवार के साथ खड़े रहने का भरोसा: CJP टीम ने हरिका के परिजनों से घटना की जानकारी ली और उन्हें भरोसा दिलाया कि पार्टी इस मामले को आगे उठाएगी। CJP ने केंद्र और राज्य सरकार से हरिका के परिवार को उचित मुआवजा देने की मांग की है। साथ ही NEET जैसी महत्वपूर्ण प्रतियोगी परीक्षाओं में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करने की आवश्यकता बताई है।
महेंद्र भारद्वाज ने उठाया शिक्षा व्यवस्था का मुद्दा: CJP प्रमुख महेंद्र भारद्वाज ने कहा कि यह केवल हरिका का मामला नहीं है, बल्कि उन तमाम युवाओं की चिंता का विषय है, जो परीक्षा और शैक्षणिक दबाव से जूझ रहे हैं। उन्होंने कहा कि शिक्षा व्यवस्था में सुधार को केवल परीक्षा प्रणाली तक सीमित नहीं रखा जा सकता। स्कूलों में पर्याप्त शिक्षक, किताबें, जरूरी संसाधन और विद्यार्थियों के लिए बेहतर शैक्षणिक माहौल भी सुनिश्चित करना होगा।
‘क्या बोलती पब्लिक’ अभियान की तैयारी: भारद्वाज ने बताया कि CJP अगस्त-सितंबर से ‘क्या बोलती पब्लिक’ अभियान शुरू करने की तैयारी कर रही है। इसके माध्यम से शिक्षा, रोजगार और अन्य लोकतांत्रिक मुद्दों पर युवाओं और आम लोगों की राय सामने लाने का प्रयास किया जाएगा।
‘पोती को खोने की भरपाई कोई नहीं कर सकता’: हरिका के दादा प्रकाश राव नायडू ने कहा कि अपनी पोती को खोने का दर्द किसी मुआवजे से खत्म नहीं हो सकता। उन्होंने सरकार से सवाल किया कि देश में ऐसी घटनाएं दोबारा न हों, इसके लिए ठोस कदम कब उठाए जाएंगे। परिवार ने व्यवस्था में सुधार की जरूरत पर भी जोर दिया।
हरिका की मौत ने व्यवस्था पर उठाए सवाल: हरिका के निधन ने एक बार फिर यह बहस तेज कर दी है कि विद्यार्थियों के लिए ऐसी शिक्षा और परीक्षा व्यवस्था कैसे तैयार की जाए, जिसमें परीक्षा में असफलता को जीवन का अंत नहीं, बल्कि आगे बढ़ने का एक पड़ाव समझने का वातावरण मिले।
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