ओवररेट शराब बिक्री ने खोली विभागीय निगरानी की पोल, निलंबन के 9 दिन बाद भी अतिरिक्त प्रभार के भरोसे अभनपुर आबकारी वृत्त…

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रायपुर, छत्तीसगढ़

अभनपुर की देशी मदिरा दुकान में निर्धारित सरकारी दर से अधिक कीमत पर शराब बिक्री का मामला सामने आने के बाद आबकारी विभाग ने वृत्त प्रभारी उप निरीक्षक नीलम स्वर्णकार को निलंबित कर दिया है। हालांकि कार्रवाई के नौ दिन बाद भी अभनपुर आबकारी वृत्त में नियमित अधिकारी की नियुक्ति नहीं होने से विभागीय कार्यप्रणाली, निगरानी व्यवस्था और प्रशासनिक जवाबदेही पर गंभीर सवाल उठने लगे हैं। मामले ने यह बहस भी तेज कर दी है कि क्या ओवररेट पर शराब बिक्री केवल एक दिन की घटना थी या लंबे समय से चली आ रही व्यवस्था का हिस्सा।

हेड लाइंस

अभनपुर शराब दुकान में ओवररेट बिक्री का खुलासा

उप निरीक्षक निलंबित, नौ दिन बाद भी नियमित पदस्थापना नहीं

तीन बार खरीद में हर बार अधिक वसूली की पुष्टि

निगरानी और निरीक्षण व्यवस्था पर उठे गंभीर सवाल

पूरे आबकारी तंत्र की जांच की मांग तेज

रायपुर, छत्तीसगढ़: राज्य स्तरीय उड़नदस्ता दल की आकस्मिक जांच में अभनपुर की देशी मदिरा दुकान में निर्धारित दर से अधिक कीमत पर शराब बेचे जाने का खुलासा हुआ। जांच टीम ने छद्म ग्राहकों के माध्यम से एक ही दिन तीन अलग-अलग बार शराब खरीदी। तीनों बार निर्धारित सरकारी मूल्य से अधिक राशि वसूली गई। जांच में कुल 400 रुपये अतिरिक्त वसूले जाने की पुष्टि होने के बाद विक्रेता शंकर लाल पटेल के खिलाफ छत्तीसगढ़ आबकारी अधिनियम की धारा 39(ग) के तहत प्रकरण दर्ज किया गया। जांच प्रतिवेदन में संबंधित आबकारी उप निरीक्षक नीलम स्वर्णकार के पर्यवेक्षण और नियंत्रण को भी दोषपूर्ण माना गया, जिसके आधार पर आबकारी आयुक्त ने उन्हें तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया।

लगातार तीन बार मिली एक जैसी अनियमितता

उड़नदस्ता की जांच में सबसे महत्वपूर्ण तथ्य यह रहा कि तीनों बार शराब खरीदने पर निर्धारित मूल्य से अधिक राशि वसूली गई। लगातार एक जैसी अनियमितता सामने आने से विभागीय हलकों में यह चर्चा तेज हो गई है कि अधिक दर पर शराब बिक्री कोई आकस्मिक घटना नहीं बल्कि नियमित रूप से अपनाई जा रही कार्यप्रणाली भी हो सकती है। हालांकि विभाग ने इस संबंध में अभी तक कोई आधिकारिक टिप्पणी नहीं की है, लेकिन जांच के निष्कर्षों ने पूरे मामले को गंभीर बना दिया है।

स्थानीय निगरानी व्यवस्था भी सवालों के घेरे में

राज्य स्तरीय उड़नदस्ता की कार्रवाई के बाद स्थानीय स्तर पर की जाने वाली नियमित निगरानी और निरीक्षण व्यवस्था पर भी सवाल उठ रहे हैं। यदि शराब दुकान में लंबे समय से निर्धारित मूल्य से अधिक राशि वसूली जा रही थी तो नियमित निरीक्षण के दौरान यह अनियमितता पहले क्यों नहीं पकड़ी गई। विभाग के भीतर भी इस बात को लेकर चर्चा है कि निरीक्षण प्रणाली कितनी प्रभावी रही और क्या निगरानी तंत्र अपनी जिम्मेदारी निभाने में सफल रहा। इस मामले ने विभागीय नियंत्रण व्यवस्था की कार्यप्रणाली पर भी प्रश्नचिह्न लगा दिया है।

निलंबन के बाद भी नियमित अधिकारी की नियुक्ति नहीं

कार्रवाई को नौ दिन बीत जाने के बावजूद अभनपुर आबकारी वृत्त में अब तक किसी नए अधिकारी की नियमित पदस्थापना नहीं की गई है। फिलहाल पूरा वृत्त अतिरिक्त प्रभार के सहारे संचालित हो रहा है। प्रशासनिक दृष्टि से महत्वपूर्ण माने जाने वाले इस वृत्त में स्थायी प्रभारी की नियुक्ति नहीं होने से विभागीय कार्यों की निरंतरता और प्रभावी निगरानी को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। अधिकारियों का मानना है कि संवेदनशील क्षेत्रों में नियमित पदस्थापना में देरी से प्रशासनिक व्यवस्था प्रभावित हो सकती है।

डी.सी. पटेल को सौंपा गया अतिरिक्त प्रभार

जिला आबकारी अधिकारी प्रवीण वर्मा ने बताया कि निलंबन के बाद विभागीय कार्य प्रभावित न हो, इसलिए सहायक आबकारी अधिकारी डी.सी. पटेल को अभनपुर आबकारी वृत्त का अतिरिक्त प्रभार दिया गया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि नियमित पदस्थापना का निर्णय उच्च स्तर पर लिया जाएगा। हालांकि विभाग की इस अंतरिम व्यवस्था के बावजूद यह सवाल बना हुआ है कि स्थायी नियुक्ति में आखिर देरी क्यों हो रही है।

पूरे तंत्र की जांच की बढ़ी उम्मीद

फिलहाल विभागीय कार्रवाई विक्रेता और संबंधित वृत्त प्रभारी तक सीमित है, लेकिन इस प्रकरण के बाद यह अपेक्षा भी बढ़ गई है कि विभाग यह जांच करेगा कि निर्धारित दर से अधिक कीमत पर शराब बिक्री की प्रवृत्ति केवल अभनपुर की एक दुकान तक सीमित थी या अन्य दुकानों में भी ऐसी शिकायतें मौजूद हैं। साथ ही यदि निगरानी व्यवस्था में कहीं चूक हुई है तो उसकी जवाबदेही भी तय की जाएगी। अभनपुर का यह मामला अब केवल 400 रुपये की अतिरिक्त वसूली तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि इसने आबकारी विभाग की निरीक्षण प्रणाली, निगरानी व्यवस्था और प्रशासनिक जवाबदेही पर व्यापक बहस छेड़ दी है।

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