कांकेर में अंतिम संस्कार को लेकर विवाद: ग्रामीणों ने की जांच की मांग, कलेक्टर को सौंपा ज्ञापन…

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भानुप्रतापपुर के मुरागांव में नाबालिग बालिका के अंतिम संस्कार को लेकर उठा विवाद, ग्रामीणों ने ग्राम सभा की अनदेखी और नियमों के उल्लंघन का लगाया आरोप
मुख्य बातें
  • कांकेर जिले के मुरागांव में अंतिम संस्कार को लेकर विवाद।
  • ग्रामीणों ने कलेक्टर को ज्ञापन सौंपकर निष्पक्ष जांच की मांग की।
  • ग्राम सभा और पंचायत को सूचना नहीं देने का आरोप।
  • पेसा अधिनियम के उल्लंघन की आशंका जताई गई।
  • प्रशासन से वैधानिक कार्रवाई की मांग।

कांकेर। छत्तीसगढ़ के कांकेर जिले के भानुप्रतापपुर विकासखंड अंतर्गत ग्राम मुरागांव में एक नाबालिग बालिका के निधन के बाद हुए अंतिम संस्कार को लेकर विवाद गहरा गया है। ग्रामीणों ने आरोप लगाया है कि अंतिम संस्कार ईसाई रीति-रिवाजों के अनुसार किया गया तथा इस पूरी प्रक्रिया में न तो ग्राम सभा को जानकारी दी गई और न ही ग्राम पंचायत को विश्वास में लिया गया। मामले को लेकर ग्रामीणों ने जिला कलेक्टर को ज्ञापन सौंपते हुए निष्पक्ष जांच और आवश्यक वैधानिक कार्रवाई की मांग की है।

ग्राम सभा की अनदेखी का लगाया आरोप

ग्रामीणों के अनुसार बालिका सीमा कोर्राम के निधन के बाद परिवार की ओर से पंचायत या ग्राम सभा को सूचना नहीं दी गई। उनका कहना है कि घटना की जानकारी दो दिन बाद मिलने पर पूछताछ की गई, जिसमें पता चला कि शव को भानुप्रतापपुर स्थित एक कब्रिस्तान में दफनाया गया। ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि मुरागांव पांचवीं अनुसूची क्षेत्र में आता है, जहां पेसा अधिनियम और छत्तीसगढ़ पंचायत राज अधिनियम के तहत ग्राम सभा की महत्वपूर्ण भूमिका निर्धारित है। उनका कहना है कि यदि इन प्रावधानों का पालन नहीं किया गया है तो इसकी जांच होनी चाहिए।

धर्मांतरण और सांस्कृतिक परंपराओं को लेकर भी उठे सवाल

ज्ञापन में ग्रामीणों ने यह भी आरोप लगाया कि क्षेत्र में कुछ परिवार पारंपरिक ग्रामीण रीति-रिवाजों का पालन नहीं कर रहे हैं, जिससे सामाजिक विवाद की स्थिति बन रही है। उन्होंने मांग की है कि यदि जांच के दौरान किसी भी संबंधित कानून या धर्म स्वातंत्र्य अधिनियम के उल्लंघन के तथ्य सामने आते हैं, तो नियमानुसार कार्रवाई की जाए। साथ ही ग्रामीणों ने अंतिम संस्कार स्थल से जुड़े तथ्यों का भी सत्यापन कराने की मांग प्रशासन से की है।

प्रशासनिक कार्रवाई का इंतजार

पंचायत सचिव के नेतृत्व में ग्रामीणों ने जिला प्रशासन से पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने और आवश्यक कार्रवाई करने की मांग की है। उन्होंने कहा कि यदि समय पर उचित कार्रवाई नहीं हुई तो वे उच्च स्तर पर भी शिकायत करेंगे। फिलहाल इस मामले में प्रशासन की ओर से जांच शुरू किए जाने या किसी प्रकार की आधिकारिक कार्रवाई की पुष्टि नहीं हुई है। मामले को लेकर क्षेत्र में चर्चा का माहौल है और सभी की नजरें जिला प्रशासन के अगले कदम पर टिकी हैं।

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