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सुरों की दुनिया को बड़ा झटका, दिग्गज गायिका एस जानकी का 88 वर्ष की आयु में निधन…

नई दिल्ली / भारत

छह दशक तक भारतीय संगीत जगत पर अमिट छाप छोड़ने वाली महान पार्श्व गायिका एस जानकी ने मैसूर में ली अंतिम सांस, 48 हजार से अधिक गीतों को दी अपनी आवाज।
मुख्य बिंदु
  • दिग्गज पार्श्व गायिका एस जानकी का 88 वर्ष की आयु में निधन।
  • चार राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार और 33 राज्य फिल्म पुरस्कारों से हो चुकी थीं सम्मानित।
  • वर्ष 2013 में पद्म भूषण सम्मान स्वीकार करने से किया था इनकार।
  • छह दशक के करियर में 20 से अधिक भारतीय भाषाओं में 48 हजार से ज्यादा गीत रिकॉर्ड किए।

नई दिल्ली। भारतीय संगीत जगत की महान पार्श्व गायिका एस जानकी का 88 वर्ष की आयु में मैसूर में निधन हो गया। संगीत प्रेमियों के बीच ‘जानकी अम्मा’ के नाम से प्रसिद्ध एस जानकी ने अपने छह दशक लंबे करियर में हजारों सदाबहार गीतों को अपनी मधुर आवाज दी। उनके निधन से फिल्म और संगीत जगत में शोक की लहर है। उनके प्रशंसकों और कलाकारों ने उन्हें भारतीय संगीत की अमूल्य धरोहर बताया है।

संगीत जगत को दिया अमूल्य योगदान

एस जानकी भारतीय सिनेमा की सबसे बहुमुखी गायिकाओं में गिनी जाती थीं। उन्होंने अपने करियर में फिल्मों, एल्बमों और रेडियो के लिए 48 हजार से अधिक गीत रिकॉर्ड किए। उन्होंने हिंदी, तमिल, तेलुगु, कन्नड़, मलयालम सहित 20 से अधिक भारतीय भाषाओं में अपनी मधुर आवाज का जादू बिखेरा। उनके उत्कृष्ट योगदान के लिए उन्हें चार राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार तथा 33 राज्य फिल्म पुरस्कारों से सम्मानित किया गया था।

पद्म भूषण सम्मान लेने से किया था इनकार

वर्ष 2013 में केंद्र सरकार ने उन्हें देश के तीसरे सर्वोच्च नागरिक सम्मान पद्म भूषण के लिए चुना था, लेकिन उन्होंने इसे स्वीकार करने से इनकार कर दिया था। उनका मानना था कि भारतीय संगीत में उनके लंबे और असाधारण योगदान को देखते हुए उन्हें यह सम्मान बहुत पहले मिलना चाहिए था। उन्होंने यह भी कहा था कि उनके योगदान के अनुरूप सर्वोच्च सम्मान ‘भारत रत्न’ पर विचार किया जाना चाहिए था। इस फैसले ने पूरे देश में व्यापक चर्चा को जन्म दिया था।

छह दशक तक गूंजती रही मधुर आवाज

आंध्र प्रदेश में 23 अप्रैल 1938 को जन्मी एस जानकी ने कम उम्र में ही संगीत की दुनिया में कदम रखा। मात्र 19 वर्ष की आयु में उन्होंने अपना पहला तमिल गीत रिकॉर्ड किया। वर्ष 1959 में उनका विवाह वी. रामप्रसाद से हुआ, जिन्होंने उनके संगीत सफर में हमेशा सहयोग दिया। वर्ष 2016 में उन्होंने सक्रिय गायन से संन्यास लिया, हालांकि वर्ष 2018 में उन्होंने एक तमिल फिल्म के लिए दोबारा अपनी आवाज देकर प्रशंसकों को खुश कर दिया। उनके निधन के साथ भारतीय संगीत का एक स्वर्णिम अध्याय हमेशा के लिए इतिहास बन गया।

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