धरमजयगढ़ में अडानी कोल माइंस के खिलाफ उग्र हुआ जनआंदोलन ‘जल-जंगल-जमीन हमारी है’ के नारों से गूंजा पुरूंगा गांव…

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  1. अडानी कोल माइंस की जनसुनवाई के विरोध में ग्रामीणों का विशाल जमावड़ा
  2. रामपुर विधायक फुलसिंह राठिया और क्षेत्रीय विधायक लालजीत राठिया हुए शामिल
  3. ग्रामीण बोले – जब तक जनसुनवाई रद्द नहीं होती , आंदोलन जारी रहेगा

धरमजयगढ़ में अडानी कोल माइंस की जनसुनवाई को लेकर उबलता जनाक्रोश छत्तीसगढ़ के धरमजयगढ़ क्षेत्र में प्रस्तावित अडानी कोल माइंस परियोजना को लेकर ग्रामीणों का विरोध अब उग्र रूप लेता जा रहा है । प्रभावित गांवों के लोगों ने अपने जल , जंगल और जमीन की रक्षा के लिए संकल्प लिया है । इसी क्रम में ग्राम पुरूंगा में एक विशाल जन महासभा का आयोजन किया गया , जिसमें पुरूंगा , तेंदूमुड़ी , साम्हरसिंगा सहित आसपास के अनेक गांवों से ग्रामीण , किसान , महिलाएं और बच्चे भारी संख्या में पहुंचे ।

सभा में वक्ताओं ने कहा कि यह आंदोलन किसी एक परियोजना का नहीं , बल्कि धरती , पर्यावरण और आने वाली पीढ़ियों के अस्तित्व की लड़ाई है । ग्रामीणों का कहना है कि वे किसी भी कीमत पर अपनी ज़मीन और जंगल नहीं छोड़ेंगे ।

फुलसिंह राठिया बोले – “यह अस्तित्व की लड़ाई है , विधानसभा में उठेगी आवाज़” इस महासभा में रामपुर विधानसभा क्षेत्र के विधायक फुलसिंह राठिया मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए । उन्होंने मंच से किसानों की आवाज़ बुलंद करते हुए कहा , “यह केवल एक गांव या एक समुदाय का नहीं , बल्कि हमारी धरती और अस्तित्व की लड़ाई है । अडानी कोल माइंस की जनसुनवाई को हर हाल में रद्द कराया जाएगा । मैं इस मुद्दे को विधानसभा में मजबूती से उठाऊँगा ।”

उन्होंने कहा कि सरकार को यह समझना चाहिए कि जनसुनवाई जनता की सहमति के बिना थोपना लोकतंत्र का अपमान है । ग्रामीणों के इस आंदोलन को उन्होंने पूर्ण समर्थन देने का आश्वासन दिया ।

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लालजीत राठिया ने दोहराया समर्थन – “पर्यावरण से खिलवाड़ बर्दाश्त नहीं” कार्यक्रम में धरमजयगढ़ के विधायक लालजीत राठिया भी उपस्थित रहे । उन्होंने कहा कि वे पहले भी अपने क्षेत्र के किसानों के साथ थे और आज भी उनके साथ डटे हैं । उन्होंने कहा , “हमारे क्षेत्र में किसी भी ऐसी परियोजना की जगह नहीं है , जो हमारे पर्यावरण , जल-जंगल-जमीन या लोगों के स्वास्थ्य को नुकसान पहुँचाए । सरकार को जनता की भावनाओं का सम्मान करना चाहिए ।” लालजीत राठिया ने चेतावनी दी कि अगर प्रशासन ने जनसुनवाई को जबरन करवाने की कोशिश की , तो आंदोलन और तेज़ होगा ।

ग्रामीणों ने गूंजाए नारे – “जल-जंगल-जमीन हमारी है” सभा के दौरान गांव-गांव से आए लोग एकजुटता के प्रतीक बने रहे । मंच के चारों ओर “जल-जंगल-जमीन हमारी है , नहीं किसी के बाप की जागीर है” जैसे नारे लगातार गूंजते रहे । ग्रामीणों ने कहा कि वे शांतिपूर्ण लेकिन अडिग आंदोलन जारी रखेंगे , जब तक कि जनसुनवाई पूरी तरह से रद्द नहीं की जाती ।

धरमजयगढ़ की यह महासभा अब केवल एक विरोध कार्यक्रम नहीं , बल्कि जनजागरण और पर्यावरण-संरक्षण की प्रतीक बनकर उभरी है । लोगों का कहना है कि यह आंदोलन आने वाले समय में छत्तीसगढ़ में पर्यावरण नीति पर बड़ा जनदबाव बनाएगा ।

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