जीभ में कांटे चुभोकर बहनों ने ली भाईयों की बलांए,धूमधाम से मनाया गया भैया दूज का त्योहार…

जशपुर – 15 नवम्बर 2023

भाई बहन का का पवित्र त्यौहार भैया दूज, रक्षा बंधन से भी कहीं अधिक हर्षोल्लास के साथ मनाया जाता है।
भाई दूज मनाने की पंरपरा जशपुर क्षेत्र में कुछ हटकर है जो भाई बहन के पवित्र रिश्ते को और भी मजबूत बना देता है। भाईयों के प्रति बहनों का प्यार तब और भी प्रगाढ़ हो जाता है, जब भाईयों के प्रति भूल से भी आए किसी बुरे व्यवहार के प्रति बहनें प्रायश्चित करते हुए अपने जीभ में कांटे चुभोती हैं। भाईयों को यम छू न सके इसके लिए ईंट से बने यम के प्रतीक पर बहनें मूशल से प्रहार करती हैं।

जिले में आज भाई दूज का पर्व धूमधम से मनाया गया, जिसके लिए हर बस्ती मोहल्लों में विशेष पूजा की वेदी बनाई गई। भाई दूज में यहां अलग ही रंग देखने को मिलता है। भाईदूज के दिन सुबह से ही यहां बहनें गोधन पूजा की तैयारी में जुट जाती हैं। भाई दूज के त्योहार को गोधन के नाम से बहनें मनाती हैं। भाईयों के दिर्घायु होने के लिए बहनें एक कठिन अनुष्ठान करती हैं। बहनें इस कामना से पूजा करती हैं कि भाई दीर्घायु हों और उन्हें मौत छू भी न सके। पूजा के लिए बहनें घर के आंगन में विशेष वेदी बनाती हैं। इस वेदी में गोबर और ईंट से यम और यम की पत्नी यमीन की आकृति बनाई जाती है। वेदी में यमदूत का पूरा घर होता है, जिसमें रसोई से लेकर • आंगन तक बनाए जाते हैं। पूजा के बाद यम, यमीन और यमदूत के घर पर बहनें मूशल से प्रहार करती हैं। ईट के रूप में स्थापित यम यमीन को मुशल से कूट-कूट कर पांरपरिक गीत गाते हुए तोड़ा जाता है।

यह माना जाता है कि भाईयों के दीर्घायु होने और भाईयों को यमदूत से बचाने के लिए पूजा में सारी प्रक्रिया की जाती है। पूजा के बाद बनी पूजा की बेदी में मूशल रखकर उसे उछलकर पार किया जाता है। यह प्रक्रिया रोचक होती है। पूजा के बाद बहनें चना और सुपारी प्रसाद के रूप में भाईयों को खिलाती हैं और विशेष पकवान खिलाकर भाईयों को सम्मान करती हैं। कुछ परिवारों में रक्षा सूत्र भी पूजा के दौरान रूई से बनाने की पंरपरा है जिसे भाई की कलाई में बांधा जाता है। भाईयों ने इस अवसर पर जहां बहनों को उपहार दिया वहीं बहनों ने भी भाईयों को उपहार दिए।

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