‘चुनाव है बस इतना पता है’…दंतेवाड़ा में किसी को प्रत्याशी , तो किसी को वोटिंग की तारीख ही नहीं पता…

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छत्तीसगढ़ चुनावः छत्तीसगढ़ में नवंबर महीने में दो चरणों में विधानसभा चुनाव के लिए वोटिंग होना है। ऐसे में स्वतंत्र छत्तीसगढ़ की टीम प्रदेश के ग्रामीण इलाकों में चुनावी माहौल का हाल जानने निकली। दंतेवाड़ा जिले के बस्तर संभाग के गांवों से जो रिपोर्ट सामने वो आपको भी हैरान कर देगी। पढ़िए दंतेवाड़ा की ग्राउंड रिपोर्ट।

दंतेवाड़ाः छत्तीसगढ़ के दंतेवाड़ा जिले के गांव में चुनावी माहौल को जानने के लिए स्वतंत्र छत्तीसगढ़ की टीम निकली। जो कि नीलावाया गांव तक पहुंची। इस गांव तक पहुंचना आसान नहीं। यह जिला मुख्यालय से करीब 70 किलोमीटर दूर है। रायपुर से दंतेवाड़ा तक सड़क अच्छी है, लेकिन नीलवाया सहित बहुत से गांव ऐसे हैं जो जंगल में बसे हैं। रोड से उन गांवों में पहुंचने के लिए पगडंडी ही सहारा है। खासकर बस्तर के नक्सल गांव प्रभावित इलाकों में। नीलावाया गांव भी उनमें से एक है। यह रोड से करीब 7 किमी दूर है। यहां पहुंचने के लिए जंगलों से होकर गुजरना होता है। इस तरह से बस्तर संभाग में 40 गांव हैं, जहां के लोगों ने अब तक विधानसभा चुनाव में शायद ही मतदान किया होगा। इस बार उम्मीद है कि इन गांवों के लोग भी मतदान करेंगे |

अब तक इन गांवों में कोई पोलिंग बूथ ही नहीं बनाया जाता था। नीलावाया गांव में पिछले विधानसभा चुनाव में पहली बार पोलिंग बूथ बनाया गया था। मगर, मतदान से कुछ दिन पहले ही नक्सली वारदात हो गई। इस गांव की तरफ जाते वक्त दूरदर्शन के कैमरामैन और जवानों पर नक्सलियों ने फायरिंग कर दी। इससे कैमरामैन और दो जवानों की मौत हो गई। इसके बाद पोलिंग बूथ यहां से करीब 9 किमी दूर शिफ्ट कर दिया गया। गांव के लोगों ने वोट नहीं डाला। नीलावाया गांव के सरपंच रमेश खुर्रम कहते है कि पिछली बार भी गांव में कोई वोट देने नहीं गया। उन्होंने कहा कि पंचायत चुनाव में तो यहीं पास ही वोट डालने जाते हैं लेकन विधानसभा चुनाव में बहुत दूर तक जाना होता है, इसलिए कोई वोट नहीं देता।

dantewara nilavaya village

नेता आते नहीं किसे वोट दें :

शहर से दूर इस गांव में जब स्वतंत्र छत्तीसगढ़ की टीम पहुंच कर लोगों से बात की। टीम दंतेवाड़ा पहुंचने से कुछ पहले सड़क किनारे एक हाट ( छोटा बाजार) लगा हुआ था। कुछ महिलाएं ताड़ी बेच रही थ। चुनाव के बारे में पूछने पर वह मुस्कराने लगी। एक महिला ने कहा कि चुनाव है बस इतना पता है, बाकि कुछ नहीं पता। साथ बैठी दूसरी महिला ने कहा कि किसे वोट देंगे। सड़क किनारे बसे गांवों तक नेता और उनकी प्रचार की गाड़िया पहुंच रही हैं, लेकिन जो गांव सड़क से दूर है वहां पहुंचने में नेता भी रुचि नहीं ले रहे। दंतेवाड़ा के नीलावाया गांव में लोगों ने बताया कि 5-6 सालों से कभी कोई नेता आया ही नहीं।

image dantewara

12 सीटों के लिए 126 नए बूथ :

बस्तर संभाग में 12 विधानसभा सीटें हैं, जहां 126 पोलिंग बूथ बनाए जा रहे है। उनमें से 40 नए बूथ ऐसे गांवों में हैं जहां आज तक लोगों ने विधानसभा चुनाव में वोट नहीं डाला। गांव से 8-9 किमी दूर पोलिंग बनाए जाते थे। इश बार सुकमा जिले में 20 नए पोलिंग बूथ बने है, दंतेवाड़ा में 8, नारायणपुर में 8, बीजापुर में 6 पोलिंग बूथ बने है। जगदलपुर विधानसभा का चांदामेटा भी ऐसा ही गांव है। गांव के लोग बताते है कि पहले उनका पोलिंग बूथ करीब 9 किमी दूर दूसरे गांव में था। इतनी दूर कोई वोट डालने नहीं जाता था।

villagers

किस दिन वोटिंग है पता नहीं :

बस्तर संभाग की सभी सीटों पर 7 नवंबर को वोटिंग होनी है। चुनाव के क्या मुद्दे हैं यो पूछने पर ज्यातादर लोग खुलकर बात नहीं करते। यहीं बात करते है जो पार्टी के समर्थक है। एक युवक ने कहा कि जो उनके लिए काम करेगा उसे वोट देंगे। कुछ लोगों को तो यह जानकारी भी नहीं है कि उन्हें किस दिन वोट डालने जाना है। दंतेवाड़ा में जब हम पहुंचे तो वहां मतदाता के लिए लोगों को जागरूक करने के लिए रैली निकाली जा रही थी। इसमें स्कूल के बच्चे पोस्टर लिए हुए थे। बहुत से लोग इस ट्राइबल इलाके की ट्रेशिशनल ड्रेस पहनकर लोगों से वोट डालने की अपील कर रहे थे।

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