भुखमरी वाले देशों में भारत, सरकार ने नकारा: रिपोर्ट बनाने वाली संस्था बोली- 125 देशों में सिर्फ भारत विरोध में, वजह राजनीति…

स्वतंत्र छत्तीसगढ़ :

न्यू दिल्ली :

ग्लोबल हंगर इंडेक्स, यानी GHI की ताजा रिपोर्ट विवादों में है। इसके मुताबिक, भारत में भुखमरी की स्थिति गंभीर है। रिपोर्ट में शामिल 125 देशों में भारत 111वें नंबर पर है। दुनिया की 5वीं सबसे बड़ी इकोनॉमी वाले भारत ने रिपोर्ट को नकार दिया है। रिपोर्ट बनाने के तरीके और मंशा पर भी सवाल उठाए हैं। पिछले साल GHI में भारत 107वें नंबर पर था, तब भी ऐसे ही सवाल उठाए गए थे।

भारत में 5 साल से कम उम्र के कमजोर बच्चे सबसे ज्यादा
12 अक्टूबर, 2023 को जारी रिपोर्ट के मुताबिक, भारत उन 34 देशों में भी है, जहां भुखमरी की समस्या गंभीर है। भारत का GHI स्कोर 28.7 है। GHI के मुताबिक, भारत में कम वजन वाले यानी वेस्टेड कैटेगरी के 18.7% बच्चे हैं। ये दुनिया में सबसे ज्यादा है।

भारत सरकार ने GHI को गलत बताया, सवाल उठाए
ग्लोबल हंगर इंडेक्स जारी होने के बाद महिला एवं बाल विकास मंत्रालय ने प्रेस रिलीज जारी की। कहा कि गलत जानकारी देना GHI का हॉलमार्क बन गया है। मंत्रालय ने इंडेक्स पर 4 सवाल उठाए हैं।

  1. GHI के 4 में से 3 पैमाने बच्चों से जुड़े हैं। ऐसे में ये डेटा पूरे देश के लोगों की बात नहीं करता।
  2. रिपोर्ट में सबसे अहम इंडिकेटर आबादी में कुपोषितों का अनुपात है। ये ओपिनियन पोल पर बेस्ड है। इतने बड़े देश में ये पोल सिर्फ 3000 सैंपल के आधार पर किया गया है। इसे सही नहीं माना जा सकता।
  3. इंडेक्स के दो बड़े इंडिकेटर स्टंटिंग, यानी दुबलापन और वेस्टिंग, यानी बौनापन हैं। ये एक कॉम्प्लेक्स प्रोसेस से निकाले जाते हैं। इसमें भुखमरी के अलावा साफ-सफाई, पर्यावरण, जेनेटिक्स और खाने का यूटिलाइजेशन भी शामिल है।
  4. GHI का चौथा इंडिकेटर यानी चाइल्ड मोर्टेलिटी की वजह भुखमरी है, इसके सबूत नहीं हैं।

सवाल: भारत सरकार ने GHI, 2023 की रिपोर्ट को गलत बताया है। सरकार के मुताबिक, आपका इंडेक्स भुखमरी को गलत तरीके से मापता है। इसमें इस्तेमाल मेथड भी गलत है। रिपोर्ट को क्यों सच माना जाए?

मिरियम वीमर्स: GHI एक टूल है, जो ग्लोबल, रीजनल और नेशनल लेवल पर भूख को मापने और ट्रैक करने के लिए डिजाइन है। यह अलग-अलग वक्त में भूख के कई पहलुओं को दिखाता है। रिपोर्ट का रिव्यू बाहरी एक्सपर्ट करते हैं और इसका मेथड या प्रोसेस लंबे समय से इस्टेब्लिश और टेस्टेड है।

GHI में भूख के मल्टीडाइमेंशनल नेचर को दिखाने के लिए 4 इंडिकेटर हैं। ये कैलोरी के साथ माइक्रो न्यूट्रिएंट्स की कमी भी बताते हैं। इन्हें इंटरनेशनल लेवल पर मान्यता हासिल है। खास बात ये है कि इस पर भारत सहित सभी देश सहमत हैं।

मिरियम वीमर्स: किसी भी सरकार ने रिपोर्ट के मेथड या नतीजों पर आपत्ति नहीं जताई है। किसी भी स्थिति में GHI को इस तरह लगातार नहीं नकारा गया है, जैसा भारत सरकार का रवैया रहा है। हालांकि, GHI स्कोर में भारत की लगातार रुचि से ये जरूर पता चलता है कि यहां राजनीति में भूख का मुद्दा कितना अहम है।

भारत की प्रतिक्रिया कुछ हद तक इससे प्रभावित लगती है कि सरकार लंबे समय से देश से भूख को खत्म करने की कोशिश कर रही है। भारत दशकों पहले अकाल खत्म कर चुका है। हालांकि, GHI खासकर बच्चों के अंडरन्यूट्रिशन पर फोकस करता है। यही भारत के GHI स्कोर को भी बढ़ाता है।

GHI के एक अहम पहलू के बारे में भारत में गलतफहमी चल रही है। एक साल की रिपोर्ट की GHI रैंकिंग की तुलना पिछली रिपोर्ट से हो रही है। ऐसी रैंकिंग से तुलना किसी और साल की रैंकिंग से नहीं हो सकती, क्योंकि हर साल डेटा की उपलब्धता और रैंकिंग में देशों की संख्या के आधार पर GHI तय होती है। यही नहीं, डेटा हर साल रिवाइज होता है। GHI तय करने का मेथड भी अपडेट होता है।

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