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Wednesday, March 25, 2026

अबूझमाड़ के पांच पंचायतों के ग्रामीणों ने विधानसभा चुनाव के बहिष्कार का किया ऐलान, तोयामेटा में पिछले 11 महीनों से ग्रामीण धरने पर…

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स्वतंत्र छत्तीसगढ़ :

सुनील सिंह राठौर : नारायणपुर

नारायणपुर जिले के अबूझमाड़ के जंगलों के बीचों-बीच ग्राम तोयामेटा में पिछले 11 महीनों से जल, जंगल, जमीन और संस्कृति को बचाने “माड़ बचाओ मंच” के बैनर तले आदिवासी ग्रामीणों ने अपनी तीन सूत्री मांगों को लेकर चुनाव का बहिष्कार करने का ऐलान कर दिया है। इनका कहना है सरकार हमारी सुन नही रही है वह अलोकतांत्रिक रवैया अपना रही है। जब हमारी मांग सरकार सुन नहीं रही तो हम क्यों मतदान करेंगे।

धरना स्थल के आसपास जो टूटी फूटी झोपड़ियां थी, उसे ठीक कर धूप, बारिश, ठण्डी से बचाव के लिए आशियाना बनाकर ग्रामीण अपना डेरा डालकर आंदोलन कर रहे हैं क्योंकि उनके आंदोलन को लगभग 11 महीना होने जा रहा है और इस बीच आंदोलनकारी ग्रामीण अपनी मांगों को लेकर नारायणपुर में तीन से चार बार आकर कलेक्ट्रेट में मुलाकात किए पर वहां से जवाब सकारात्मक नहीं मिला, केंद्र सरकार का मामला बताकर हमसे कुछ नहीं कहा।

आंदोलनकारी ने तय किया है कि जब तक मांग पूरी नहीं होगी धरना प्रदर्शन जारी रहेगा और वह विधानसभा चुनाव का बहिष्कार करेंगे ग्रामीणों का कहना है कि हमारी जायज मांगों को लेकर अपना काम काज छोड़कर घने जंगलों के बीच धरने पर बैठे हैं लेकिन सरकार का कोई भी नुमाइंदा हमारी बातें सुनने नहीं पहुंच रहा है।

अबूझमाड़ के जो ग्रामीण मावा नाटे मावा राज का नारा बुलंद करते थे वही अपने जल, जंगल, जमीन को बचाने लगातार धरना प्रदर्शन कर रहे हैं। अबूझमाड़ के ग्रामीण धरना इसलिए नहीं दे रहे हैं क्योंकि उन्हें सुख-सुविधाएं चाहिए बल्कि उनकी मांग यह है कि उन्हें केंद्र या राज्य सरकारों से थोपा हुआ विकास भेंट ना किया जाए, विकास मिले लेकिन ऐसा नहीं की जंगल बर्बाद हो जाए।
नये पुलिस केम्पो का विस्तार कर हमारे जल जंगल जमीन हमसे छीनने की सरकार की साजिश है इसलिए पहाड़ी का सीना चीर कर लोहा निकाल कर ले जा रहे हैं। अगर जंगल नहीं रहेंगे तो हम अपना जीवन यापन कैसे करेंगे।जंगल से मिलने वाले वनोंपज ही हमारा सहारा है।

सोमारू राम(कुतुल पंचायत)
5 नवंबर 2022 से धरना में बैठे हैं हम पांच पंचायत के ग्रामीण आदिवासी,अपने तीन सूत्री मांगों को लेकर जिसकी आज तक कोई सुनवाई नहीं हुई है। हमसे मिलने प्रशासन के एसडीएम, कलेक्टर और ना ही कोई शासन के विधायक, मंत्री आये। इनके द्वारा जब हमारी मांगे नहीं सुनी जा रही, ना ही उस पर कोई विचार किया जा रहा है तो हम क्यों इस विधानसभा चुनाव पर मतदान करेंगे।
बता दें इन आदिवासी ग्रामीणों की तीन सूत्री मांगे क्या है ?

  1. पेसा कानून 1996 के नियमों को छत्तीसगढ़ शासन अति शीघ्र लागू करे।
  2. माड़ क्षेत्र में प्रस्तावित नए पुलिस कैंपों को बंद करो।
  3. वन संरक्षण अधिनियम सन 2022 को रद्द करो। अजीत वसंत(कलेक्टर)
    चुनाव प्रक्रिया लोकतंत्र का त्यौहार है, संविधान में सभी को अपना जनप्रतिनिधि चुनने का अधिकार है। जिला प्रशासन सभी से अपील करता है कि अपने मताधिकार का अधिक से अधिक प्रयोग करें।
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