आत्मचिंतन उन्नति की सीढ़ी है- ब्रम्हकुमारी भगवान भाई…

आत्मचिंतन उन्नति की सीढ़ी है, पर चिंतन पतन की जड़ है।

सुनील सिंह राठौर : 21 अगस्त 2023

नारायणपुर 21 अगस्त 2023...दूसरों की विशेषताएं देखने और धारण करने में ही हमारी आत्मा की उन्नति होती है। दूसरों के अवगुण को देखकर अगर हम उनका चिंतन-मनन करते हैं और उन्हें जगह-जगह फैलाते हैं, तो वे पलट कर हमारे पास ही आ जाते हैं और हमारे जीवन को प्रभावित करते हैं। आत्मचिंतन उन्नति की सीढ़ी है, पर चिंतन पतन की जड़ है। उक्त कथन, प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्व विद्यालय माउंट आबू राजस्थान से आये हुए बी के भगवान भाई ने कहे। कार्यक्रम की शुरुवात स्वागत में कुमारी ने डांस किया | अतिथियों द्वारा दीप प्रज्वलन किया गया |वे स्थानीय ब्रह्माकुमारीज राजयोग सेवाकेंद्र द्वारा आयोजित आहूजा पैलेस में एक दिवसीय राजयोग साधना कार्यक्रम में पधारे हुए ईश्वर प्रेमी भाई बहनों को खुशहाल जीवन हेतु स्व चिन्तन विषय पर बोल रहे थे |

उन्होंने कहा कि यदि हम स्वयं आंतरिक रूप से रिक्त होंगे तो अपनी रिक्तता को बाहरी तत्वों से भरने के लिए हमेशा दूसरों से कुछ लेने का प्रयास करेंगे, यदि हमारे अंतर्मन प्यार, सौहार्द और मैत्री भाव से भरा रहेगा तो हम जगत में प्यार और मैत्री को बाँटते चलेंगे। उन्होंने कहा कि राजयोग के द्वारा ही हम अपने संस्कारों को सतोप्रधान बना सकते हैं। इंद्रियों पर काबू कर सकते हैं। क्रोध मुक्त और तनाव मुक्त रहने के लिए हमें रोजाना ईश्वर का चिंतन, गुणगान करना चाहिए । सकारात्मक चिन्तन से हम जीवन की विपरीत एवं व्यस्त परिस्थितियों में संयम बनाए रखने की कला है।

चरित्रवान, गुणवान बच्चे देश की सच्ची संपत्ति हैं :
वे शासकीय कन्या उच्चतर माध्यमिक विद्यालय में भी छात्राओं व शिक्षक शिक्षिकाओं को जीवन में नैतिक शिक्षा का महत्व विषय पर संबोधित किया। कन्या विद्यालय के प्राचार्य ए के स्वर्णकार ने भी इस कार्यक्रम में अपने उद्बोधन में कहा -बचपन से ही बच्चों को नैतिक शिक्षा का पाठ पढ़ाने से उन्हें भले-बुरे, उचित-अनुचित का ज्ञान हो जाता है। वह समझने लगता है कि कौन सा व्यवहार सामाजिक है और कौन सा व्यवहार असामाजिक। किन व्यवहारों को करने से समाज में प्रतिष्ठा, प्रशंसा एवं लोकप्रियता मिलती है और किससे नहीं। अपने प्रवास के अंत में आहूजा पैलेस में खुशहाल जीवन हेतु सकारात्मक चिंतन से तनाव मुक्त कार्यक्रम में पधारे हुए ईश्वर प्रेमी भाई बहनों के बीच बोल रहे थे। अपनी समस्याओं को समाप्त करने एवं सफल जीवन जीने के लिए विचारों को सकारात्मक बनाने की बहुत आवश्यकता है।

समस्याओं का कारण ढूंढने की बजाये निवारण ढूंढे:
उन्होंने कहा कि समस्याओं का चिंतन करने से तनाव की उत्पत्ति होती है। मन के विचारों का प्रभाव वातावरण, पेड़-पौधों तथा दूसरों व स्वयं पर पड़ता है। यदि हमारे विचार सकारात्मक हैं तो उसका सकारात्मक प्रभाव पड़ेगा। जीवन को रोगमुक्त, दीर्घायु, शांत व सफल बनाने के लिए हमें सबसे पहले विचारों को सकारात्मक बनाना चाहिए। सकारात्मक विचार से समस्या समाधान में बदल जाती है।
कार्यक्रम में उपस्थित आहूजा पैलेस के कमलजीत सिंह आहुजा ने कहा की वर्तमान परिवेश में हर एक को किसी न किसी बात का तनाव जरूर होता है। ब्रह्माकुमारीज द्वारा बताई गई बातों को अमल में लाकर, तनाव से मुक्त रहने की प्रेरणा दी। भगवान भाई ने आध्यात्मिक ज्ञान को सकारात्मक विचारों का स्रोत बताते हुए कहा कि वर्तमान में हमे आध्यात्मिकता को जानने की जरुरत है | आध्यात्मिकता की परिभाषा बताते हुए उन्होंने कहा स्वयं को यर्थात जानना, पिता परमात्मा को जानना, अपने जीवन का असली उद्देश्य को और कर्तव्य को जानना ही आध्यात्मिकता है। आध्यात्मिक ज्ञान द्वारा सकारात्मक विचार मिलते है जिससे हम अपने आत्मबल से अपना मनोबल बढ़ा सकते है। उन्होंने कहा कि सत्संग से प्राप्त ज्ञान ही हमारी असली कमाई है। इसे न तो चोर चुरा सकता है और न आग जला सकती है। ऐसी कमाई के लिए हमें समय निकालना चाहिए। सत्संग के द्वारा ही हम अच्छे संस्कार प्राप्त करते हैं और अपना व्यवहार सुधार पाते हैं।

बस्तर संभाग के ब्रह्माकुमारी राजयोग सेवाकेंद्र की संचालिका बी के मंजूषा बहन ने प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्वविद्यालय का परिचय देते हुए बताया कि सृष्टि सृजनहार परमात्मा शिव नयी सृष्टि बनाने हेतु वर्ष 1937 में प्रजापिता ब्रह्मा के तन में अवतरित हुये। तब ब्रह्मा बाबा ने अपनी पूरी सम्पत्ति ओम मंडली का ट्रस्ट बनाकर विश्व सेवा हेतु समर्पित कर दिया। यही ओम मंडली आगे चलकर ब्रह्मा कुमारी ईश्वरीय विश्वविद्यालय के नाम से चर्चित हुआ।

स्थानीय ब्रह्माकुमारीज राजयोग सेवाकेंद्र की संचालिका बी के दीपाली बहन ने कहा कि प्रजापिता ने अनेक आत्माओं को अपना प्यार देकर उसमें शक्तियां भरी एवं उसे सर्व बंधनों से मुक्त कराया। बाबा ने परचिंतन एवं परदर्शन से मुक्त बन परोपकारी बनने की शिक्षा दी। उन्होंने बताया कि ब्रह्मा बाबा ने 33 वर्षोँ तक परमात्मा शिव का साकार माध्यम बन अनेक बच्चों में ज्ञान, योग एवं धारणा का बल भरकर विश्व कल्याण हेतु देश के कोने-कोने में भेजा। इस कार्यक्रम में बी के मोनिका बहन ,पुरुषोत्तम भाई ,मोतीभाई , कोदूराम भाई, टीकावती माता के साथ छोटेडोंगर के ब्रह्माकुमारी पाठशाला के भाई बहन भी उपस्थित थे |

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *