कोलकाता / भारत / राजनीति
मुख्य बिंदु (Highlight):
- कोलकाता के धर्मतला में धरना मंच से ममता बनर्जी का केंद्र पर बड़ा हमला
- प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह पर साधा निशाना
- कहा– एनडीए सरकार सहयोगियों के सहारे चल रही है
- राज्यपाल बदलने और वोटर लिस्ट से नाम हटाने पर भी जताया कड़ा विरोध
धर्मतला के धरना मंच से केंद्र पर हमला
पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री Mamata Banerjee ने कोलकाता के धर्मतला में चल रहे धरना मंच से केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोला। उन्होंने Narendra Modi और Amit Shah को घमंडी बताते हुए कहा कि अगर हालात ऐसे ही बने रहे तो दिल्ली की सरकार गिराई भी जा सकती है। ममता ने कहा कि मौजूदा सरकार छोटे-छोटे टुकड़ों में जल रही है और असल में सहयोगियों के सहारे ही किसी तरह चल रही है।
एनडीए की स्थिति पर उठाए सवाल
मुख्यमंत्री ने कहा कि 2014 और 2019 के चुनावों में भाजपा को स्पष्ट बहुमत मिला था, लेकिन 2024 में स्थिति बदल गई। भाजपा को इस बार केवल 240 सीटें मिलीं और सरकार को सहयोगी दलों के सहारे चलना पड़ रहा है। उन्होंने कहा कि N. Chandrababu Naidu की Telugu Desam Party जैसे सहयोगी दलों का समर्थन सरकार के लिए अहम है। ममता के मुताबिक अगर सहयोगी दलों का समर्थन कम हुआ तो केंद्र की राजनीति में अस्थिरता बढ़ सकती है।
राज्यपाल बदले जाने के फैसले पर भी हमला
धरने के दौरान मुख्यमंत्री ने पश्चिम बंगाल के राज्यपाल को बदलने के फैसले की भी कड़ी आलोचना की। उन्होंने कहा कि C. V. Ananda Bose को कार्यकाल पूरा होने से पहले हटाना सवाल खड़े करता है और उनकी जगह R. N. Ravi को लाने का फैसला राजनीतिक है। ममता ने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार अपने नियुक्त लोगों को स्वतंत्र रूप से काम नहीं करने देती और उन पर दबाव बनाया जाता है।
वोटर लिस्ट और धरने को लेकर बढ़ा विवाद
मुख्यमंत्री इन दिनों राज्य में वोटर लिस्ट के विशेष पुनरीक्षण (SIR) के खिलाफ धरने पर बैठी हैं। उनका आरोप है कि इस प्रक्रिया में करीब 60 लाख मतदाताओं के नाम सूची से हटा दिए गए हैं, जिनमें उनके विधानसभा क्षेत्र भवानीपुर के भी कई लोग शामिल हैं। इसी मुद्दे को लेकर राज्य की राजनीति गरमा गई है और विपक्ष व केंद्र सरकार पर लगातार आरोप-प्रत्यारोप जारी हैं।
राष्ट्रपति पर भी लगाया राजनीतिक इस्तेमाल का आरोप
ममता बनर्जी ने राष्ट्रपति Droupadi Murmu के हालिया बंगाल दौरे को लेकर भी सवाल उठाए। उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा चुनाव से पहले राज्य सरकार को बदनाम करने के लिए राष्ट्रपति कार्यालय का इस्तेमाल कर रही है। हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि राष्ट्रपति का सम्मान किया जाता है, लेकिन चुनावी माहौल में ऐसे कार्यक्रमों में शामिल होना उनके लिए हमेशा संभव नहीं होता।
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