छत्तीसगढ़ भी था समुद्री क्षेत्र , दो बंदरगाहों के होने का भी प्रमाण ..

रायपुर : स्वतंत्र छत्तीसगढ़

पुरातत्व विभाग के अनुसार गरियाबंद जिले को पांडुका की पैरी नदी में लगभग ढाई हजार साल पहले बंदरगाह के होने के प्रमाण मिले हैं | वहीँ धमतरी के अरौद नदी में महानदी पर लगभग 3000 वर्ष पुराना बंदरगाह था | चूँकि बंदरगाह समुद्र के किनारे बनाए जाते हैं | ऐसे में छत्तीसगढ़ में इन दोनों जगहों पर प्राचीन काल में बंदरगाह का होना बताता हैं कि आज से हजारों साल पहले छत्तीसगढ़ में भी समुद्र था | जिसकी पुष्टि पुरातत्व विभाग करता है |

5 अप्रैल राष्ट्रिय समुद्र दिवस के नाम से जाना जाता है | परन्तु छत्तीसगढ़ का रिश्ता समुद्री रास्तों से होने का प्रमाण होता है | और यह भी माना जाता है कि यहाँ का व्यापार सीधे बंगाल की खाड़ी से होता था | छत्तीसगढ़ पुरातत्व विभाग के उप संचालक जे.आर .भगत ने बताय की पैरी नदी महानदी में मिलती है और महानदी बंगाल की खाड़ी में मिलती है | इस तरह से कहा जा सकता है कि प्राचीन काल में जो व्यापार होता था वह बंगाल कि खाड़ी से होता था | राजिम से लगे हुवे पांडुका में व्यापारिक बंदरगाह के होने का भी प्रमाण है | जो कि महानदी की सहायक नदी पैरी नदी पर है | और दूसरे जगहों की बात करे तो फिलहाल अभी धमतरी के अरौद नदी महानदी पर भी बंदरगाह था |

समुद्र के आधार पर नामकारण के प्रमाण से भी कहा जा सकता है कि इसमें कोई दो मत नहीं कि छत्तीसगढ़ में समुद्र था | जैसे कि पुरातत्व विभाग के जे.आर.भगत ने बताया कि छत्तीसगढ़ में कुछ जगहों पर समुद्र होने के प्रमाण मिले हैं ,जिसे देखते ही हम कह सकते हैं कि छत्तीसगढ़ में समुद्र हुवा करता था | आज भी कई जगहों के नाम समुद्र के नाम से जाना जाता है | जैसे रानी सागर बाँध , दलपतसागर बाँध इसके प्रत्यक्ष उदाहरण हो सकते हैं |

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