27.1 C
Raipur
Thursday, February 12, 2026

छत्तीसगढ़ भी था समुद्री क्षेत्र , दो बंदरगाहों के होने का भी प्रमाण ..

HomeChhattisgarhछत्तीसगढ़ भी था समुद्री क्षेत्र , दो बंदरगाहों के होने का भी...

Date:

रायपुर : स्वतंत्र छत्तीसगढ़

पुरातत्व विभाग के अनुसार गरियाबंद जिले को पांडुका की पैरी नदी में लगभग ढाई हजार साल पहले बंदरगाह के होने के प्रमाण मिले हैं | वहीँ धमतरी के अरौद नदी में महानदी पर लगभग 3000 वर्ष पुराना बंदरगाह था | चूँकि बंदरगाह समुद्र के किनारे बनाए जाते हैं | ऐसे में छत्तीसगढ़ में इन दोनों जगहों पर प्राचीन काल में बंदरगाह का होना बताता हैं कि आज से हजारों साल पहले छत्तीसगढ़ में भी समुद्र था | जिसकी पुष्टि पुरातत्व विभाग करता है |

5 अप्रैल राष्ट्रिय समुद्र दिवस के नाम से जाना जाता है | परन्तु छत्तीसगढ़ का रिश्ता समुद्री रास्तों से होने का प्रमाण होता है | और यह भी माना जाता है कि यहाँ का व्यापार सीधे बंगाल की खाड़ी से होता था | छत्तीसगढ़ पुरातत्व विभाग के उप संचालक जे.आर .भगत ने बताय की पैरी नदी महानदी में मिलती है और महानदी बंगाल की खाड़ी में मिलती है | इस तरह से कहा जा सकता है कि प्राचीन काल में जो व्यापार होता था वह बंगाल कि खाड़ी से होता था | राजिम से लगे हुवे पांडुका में व्यापारिक बंदरगाह के होने का भी प्रमाण है | जो कि महानदी की सहायक नदी पैरी नदी पर है | और दूसरे जगहों की बात करे तो फिलहाल अभी धमतरी के अरौद नदी महानदी पर भी बंदरगाह था |

समुद्र के आधार पर नामकारण के प्रमाण से भी कहा जा सकता है कि इसमें कोई दो मत नहीं कि छत्तीसगढ़ में समुद्र था | जैसे कि पुरातत्व विभाग के जे.आर.भगत ने बताया कि छत्तीसगढ़ में कुछ जगहों पर समुद्र होने के प्रमाण मिले हैं ,जिसे देखते ही हम कह सकते हैं कि छत्तीसगढ़ में समुद्र हुवा करता था | आज भी कई जगहों के नाम समुद्र के नाम से जाना जाता है | जैसे रानी सागर बाँध , दलपतसागर बाँध इसके प्रत्यक्ष उदाहरण हो सकते हैं |

स्वतंत्र छत्तीसगढ़
स्वतंत्र छत्तीसगढ़https://swatantrachhattisgarh.com
(संपादक) इस साइट के कुछ तत्वों में उपयोगकर्ताओं द्वारा प्रस्तुत सामग्री ( समाचार / फोटो / विडियो आदि ) शामिल होगी । स्वतंत्र छत्तीसगढ़ इस तरह के सामग्रियों के लिए कोई ज़िम्मेदार नहीं स्वीकार करता है। स्वतंत्र छत्तीसगढ़ में प्रकाशित ऐसी सामग्री के लिए संवाददाता / खबर देने वाला स्वयं जिम्मेदार होगा, स्वतंत्र छत्तीसगढ़ या उसके स्वामी, मुद्रक, प्रकाशक, संपादक की कोई भी जिम्मेदारी नहीं होगी. सभी विवादों का न्याय क्षेत्र रायपुर होगा ।

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

Share post:

Subscribe

Popular

More like this
Related

छत्तीसगढ़ कहार भोई समाज की वार्षिक महासभा सम्पन्न, ईश्वरी मानस बने अध्यक्ष…

रायपुर / छत्तीसगढ़ रायपुर, छत्तीसगढ़। छत्तीसगढ़ कहार भोई समाज की...

रायपुर में कुत्ते को खाना खिलाने को लेकर विवाद, युवक की मौत…

रायपुर / छत्तीसगढ़ छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर में कुत्ते...