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केलो ब्रिज रिप्लेसमेंट कार्य युद्धस्तर पर जारी, 110 वर्ष पुराना ब्रिज हो रहा है इतिहास का हिस्सा…

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रायगढ़:23 अप्रैल 2025 (टीम)

दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे के बिलासपुर-झारसुगुड़ा रेलमार्ग पर रायगढ़ स्टेशन के समीप स्थित 110 वर्ष पुराने स्टील गर्डर वाले केलो ब्रिज का प्रतिस्थापन कार्य तेजी से चल रहा है। यह ऐतिहासिक कार्य मंगलवार से आरंभ हुआ है और रेलवे प्रशासन द्वारा इसे 23 अप्रैल तक पूरा करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। इस महत्वपूर्ण कार्य के लिए रेलवे ने 40 घंटे का विशेष ट्रैफिक एवं पावर ब्लॉक लिया है। परिणामस्वरूप, इस रूट से गुजरने वाली 36 ट्रेनों को रद्द कर दिया गया है, जिससे यात्रियों को असुविधा का सामना करना पड़ रहा है। रेलवे ने इस कार्य को संरचनात्मक मजबूती और यात्रियों की सुरक्षा की दिशा में उठाया गया दूरदर्शी कदम बताया है।

रेलवे प्रशासन के अनुसार, यह जटिल कार्य अत्याधुनिक संसाधनों, उच्च तकनीकी विशेषज्ञता और प्रभावी समन्वय की मांग करता है। इस कार्य में 140 टन की क्षमता वाली चार हाई कैपेसिटी क्रेन का उपयोग किया जा रहा है। इसके अलावा, लगभग 500 से अधिक अधिकारी, इंजीनियर, तकनीकी कर्मचारी और श्रमिक चौबीसों घंटे कार्य में लगे हुए हैं। यह परियोजना कोतरलिया स्टेशन पर चल रहे नॉन-इंटरलॉकिंग कार्य के साथ समन्वय में संचालित की जा रही है।

ब्रिज की वर्तमान स्थिति को देखते हुए ट्रेन की गति को फिलहाल 45 किमी प्रति घंटे तक सीमित कर दिया गया है। ब्रिज प्रतिस्थापन के बाद यह स्थाई गति प्रतिबंध हटा लिया जाएगा, जिससे ट्रेन संचालन की रफ्तार और समयबद्धता में सुधार होगा और संरक्षा मानकों में भी बढ़ोतरी होगी।

इंफ्रास्ट्रक्चर अपग्रेड का यात्रियों पर प्रभाव:

बिलासपुर-झारसुगुड़ा रूट पर चौथी लाइन और ब्रिज प्रतिस्थापन कार्य के चलते हावड़ा रूट की 36 गाड़ियां 11 से 24 अप्रैल तक रद्द कर दी गई हैं। वहीं, 4 ट्रेनों का मार्ग 44 दिनों के लिए बदल दिया गया है और 3 ट्रेनें 45 दिनों तक आधे मार्ग तक ही संचालित की जा रही हैं।

इस कार्य के कारण 36 ट्रेनों के कुल 206 फेरे रद्द किए गए हैं। हावड़ा-मुंबई मेल 14 दिनों के लिए और मुंबई-हावड़ा दूरंतो एक्सप्रेस 8 दिनों के लिए डायवर्टेड मार्ग से चल रही हैं। बिलासपुर-झारसुगुड़ा सेक्शन में चलने वाली जेडी ट्रेन 45 दिनों तक सीमित दूरी तक ही चलाई जा रही है। हजरत निजामुद्दीन-रायगढ़ गोंडवाना एक्सप्रेस भी 10 दिनों के लिए आधे रास्ते तक ही संचालित हो रही है।

रेलवे का यह परिवर्तनात्मक कदम आने वाले समय में इस क्षेत्र की रेल सेवाओं को अधिक सुरक्षित, तेज और आधुनिक बनाएगा। यह कार्य न केवल इंजीनियरिंग की दृष्टि से ऐतिहासिक है, बल्कि यात्रियों को सुविधाजनक और भरोसेमंद सेवा देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल भी है।

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