मध्य प्रदेश में नई शराब नीति लागू: 19 धार्मिक शहरों में शराब की बिक्री पर पूरी तरह प्रतिबंध…

भोपाल : 02 अप्रैल 2025 (एम् पी डेस्क)

भोपाल, 1 अप्रैल: मध्य प्रदेश में 1 अप्रैल से नई शराब नीति लागू हो गई है, जिससे राज्य के शराब प्रेमियों को बड़ा झटका लगा है। मुख्यमंत्री मोहन यादव की सरकार ने धार्मिक महत्व के 19 शहरों में शराब की बिक्री पर पूरी तरह रोक लगा दी है। सरकार द्वारा जारी गजट नोटिफिकेशन के अनुसार, उज्जैन, ओंकारेश्वर, मैहर सहित 19 धार्मिक स्थलों पर कुल 47 शराब की दुकानें बंद कर दी गई हैं।

धार्मिक स्थलों पर पूर्ण शराबबंदी

नई नीति के तहत जिन 19 शहरों में शराब की बिक्री पर प्रतिबंध लगाया गया है, उनमें उज्जैन, ओंकारेश्वर, महेश्वर, चित्रकूट, मैहर, दतिया, ओरछा, पन्ना, मंदसौर, अमरकंटक, मंडला, मुलताई, सलकनपुर, बरमान कला, लिंगा, बरमान खुर्द, कुंडलपुर और बांदकपुर शामिल हैं। इन स्थानों पर अब किसी भी प्रकार की शराब की दुकान संचालित नहीं होगी।

“लो-अल्कोहलिक बेवरेज बार” की शुरुआत

हालांकि, सरकार ने पूर्ण शराबबंदी लागू करने के बजाय एक नई पहल के तहत “लो-अल्कोहलिक बेवरेज बार” शुरू किए हैं। इन बारों में केवल बीयर, वाइन और रेडी-टू-ड्रिंक अल्कोहलिक पेय पदार्थों की बिक्री होगी, जबकि स्प्रिट आधारित शराब पर पूरी तरह प्रतिबंध रहेगा।

राजस्व में 450 करोड़ रुपये की गिरावट का अनुमान

राज्य सरकार के इस फैसले से लगभग 450 करोड़ रुपये के राजस्व नुकसान का अनुमान है। वर्तमान में प्रदेश में करीब 460-470 शराब-सह-बीयर बार संचालित हैं, लेकिन धार्मिक स्थलों पर प्रतिबंध के कारण सरकार को राजस्व में गिरावट का सामना करना पड़ेगा।

व्यावसायिक आयोजनों के लाइसेंस शुल्क में बदलाव

नई नीति के तहत रेस्तरां और बार संचालकों को खुले क्षेत्र (ओपन एरिया) में फ्लोर एरिया बढ़ाने की अनुमति दी गई है। इसके अलावा, बड़े व्यावसायिक आयोजनों के लिए लाइसेंस शुल्क अब आयोजन स्थल के आकार और दर्शकों की संख्या के आधार पर तय किया जाएगा। इससे आयोजकों को अधिक सुविधा मिलेगी और राज्य सरकार को अतिरिक्त राजस्व प्राप्त होगा।

ई-बैंक गारंटी अनिवार्य

सरकार ने शराब दुकानों के ठेकेदारों के लिए ई-बैंक गारंटी को अनिवार्य कर दिया है। यह प्रावधान 1 अप्रैल 2025 से लागू होगा और 30 अप्रैल 2026 तक वैध रहेगा। गारंटी साइबर ट्रेजरी के माध्यम से जमा करनी होगी और केवल अधिकृत बैंकों से ही मान्य होगी। इस कदम का उद्देश्य वित्तीय पारदर्शिता और ठेकेदारों की जिम्मेदारी सुनिश्चित करना है।

पूर्ण शराबबंदी नहीं, लेकिन सख्ती जारी

हालांकि, मध्य प्रदेश में पूर्ण शराबबंदी नहीं की गई है। अधिकारियों के अनुसार, बिहार और गुजरात की तरह राज्य में शराबबंदी कानून लागू करने के लिए बिहार निषेध अधिनियम, 2016 जैसे कानून की जरूरत होगी। फिलहाल, प्रतिबंधित शहरों में बाहरी शराब लाकर व्यक्तिगत रूप से पीने पर कोई रोक नहीं होगी।

नई नीति के लागू होने के बाद राज्य में शराब व्यवसाय पर इसका व्यापक असर देखने को मिलेगा। सरकार की यह पहल धार्मिक शहरों में सामाजिक सुधार के रूप में देखी जा रही है, लेकिन राजस्व नुकसान को लेकर व्यापारियों की चिंता भी बनी हुई है।

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