रायपुर : 01 अप्रेल 2025 (भूषण )
भारतीय न्याय संहिता (बी.एन.एस.) लागू हुए आठ महीने हो चुके हैं, लेकिन अब तक कई पुलिस थानों में इसके तहत आवश्यक संसाधन उपलब्ध नहीं कराए गए हैं। विशेष रूप से वीडियो कैमरे और पेन ड्राइव जैसी बुनियादी सुविधाएं, जो पूछताछ और सबूतों की पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए अनिवार्य मानी जाती हैं, अभी तक कई जगहों पर उपलब्ध नहीं कराई गई हैं।
बी.एन.एस. के नए प्रावधानों के तहत पुलिस थानों में पूछताछ की वीडियो रिकॉर्डिंग अनिवार्य की गई थी, ताकि हिरासत में उत्पीड़न के मामलों को रोका जा सके और कानूनी प्रक्रियाओं को पारदर्शी बनाया जा सके। लेकिन, सूत्रों के अनुसार, कई राज्यों में अब तक पुलिस थानों को वीडियो रिकॉर्डिंग के लिए आवश्यक कैमरे और डेटा स्टोरेज उपकरण (जैसे पेन ड्राइव) मुहैया नहीं कराए गए हैं।
पुलिस विभाग की लापरवाही या संसाधनों की कमी?
इस मामले पर जब प्रशासनिक अधिकारियों से संपर्क किया गया तो उन्होंने संसाधनों की कमी का हवाला देते हुए कहा कि प्रक्रिया जारी है और जल्द ही सभी थानों में जरूरी उपकरण उपलब्ध कराए जाएंगे। हालांकि, जानकारों का मानना है कि यदि जल्द ही इस पर ध्यान नहीं दिया गया तो न्यायिक प्रक्रियाओं में बाधा आ सकती है और नागरिकों के अधिकारों का हनन हो सकता है।
आम जनता और कानून विशेषज्ञों की प्रतिक्रिया
कानूनी विशेषज्ञों का कहना है कि बी.एन.एस. के सफल क्रियान्वयन के लिए तकनीकी संसाधनों की समय पर उपलब्धता बेहद जरूरी है। वहीं, स्थानीय नागरिकों और सामाजिक संगठनों ने इस देरी पर नाराजगी जताते हुए सरकार से जल्द कदम उठाने की मांग की है।
सरकार से क्या उम्मीद?
अब देखना यह होगा कि सरकार और पुलिस प्रशासन इस दिशा में कितनी जल्दी आवश्यक कदम उठाते हैं। क्या आने वाले दिनों में सभी पुलिस थानों को जरूरी संसाधन मिल पाएंगे, या फिर यह मामला भी अन्य सरकारी योजनाओं की तरह कागजों में ही सिमटकर रह जाएगा?
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