रायपुर : 25 मार्च 2025
छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने एक ऐतिहासिक फैसले में राज्य सरकार को निर्देश दिया है कि वह 1 जनवरी 2006 से पहले सेवानिवृत्त हुए सरकारी कर्मचारियों को छठे वेतन आयोग के तहत पेंशन लाभ प्रदान करे।
न्यायमूर्ति राकेश मोहन पांडेय की एकल पीठ ने यह फैसला छत्तीसगढ़ शासकीय महाविद्यालयीन पेंशनर्स संघ बनाम छत्तीसगढ़ राज्य मामले में सुनाया। याचिकाकर्ता संघ ने हाईकोर्ट में याचिका दाखिल कर यह दावा किया था कि 2006 के बाद सेवानिवृत्त कर्मचारियों को छठे वेतन आयोग का लाभ दिया गया, लेकिन 2006 से पहले सेवानिवृत्त हुए कर्मचारियों को इससे वंचित रखा गया, जो संविधान के अनुच्छेद 14 (समानता का अधिकार) का उल्लंघन है।
सरकार का तर्क खारिज:
राज्य सरकार ने यह कहते हुए विरोध जताया कि 2006 से पहले सेवानिवृत्त कर्मचारियों को यह लाभ देने से राज्य के वित्तीय संसाधनों पर भारी बोझ पड़ेगा। हालांकि, कोर्ट ने सरकार के इस तर्क को खारिज कर दिया और सुप्रीम कोर्ट के पूर्ववर्ती फैसलों का हवाला देते हुए कहा कि पेंशनभोगियों के साथ किसी भी प्रकार का भेदभाव असंवैधानिक है।
120 दिन के भीतर संशोधित पेंशन जारी करने का निर्देश:
कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि मध्यप्रदेश पुनर्गठन अधिनियम, 2000 की धारा 49 के अनुसार, मध्यप्रदेश और छत्तीसगढ़ दोनों राज्यों को पेंशन भुगतान की जिम्मेदारी साझा करनी होगी। न्यायालय ने राज्य सरकार को 120 दिनों के भीतर पेंशनभोगियों को संशोधित पेंशन जारी करने का आदेश दिया।
पेंशनर्स संघ की जीत:
इस फैसले से सेवानिवृत्त पेंशनभोगियों में खुशी की लहर दौड़ गई है। छत्तीसगढ़ शासकीय महाविद्यालयीन पेंशनर्स संघ ने इसे न्याय की जीत बताया है और कहा है कि यह फैसला उन सभी पेंशनभोगियों के लिए एक मिसाल बनेगा, जिन्हें अब तक उनका हक नहीं मिला था।
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