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आपदा प्रबंधन (संशोधन) विधेयक 2024 पर अमित शाह का बयान: “NDRF की भगवा वर्दी लोगों को शांति देती है”

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नई दिल्ली: 25 मार्च 2025 (दिल्ली डेस्क)

नई दिल्ली। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने मंगलवार को राज्यसभा में आपदा प्रबंधन (संशोधन) विधेयक, 2024 पर हुई बहस का जवाब दिया। इस दौरान उन्होंने राष्ट्रीय आपदा प्रतिक्रिया बल (NDRF) की भूमिका और उसके कार्यों को रेखांकित किया। शाह ने कहा कि वर्तमान में NDRF की 16 बटालियन कार्यरत हैं, जो देशभर में आपदाओं के समय राहत और बचाव कार्यों में जुटी रहती हैं।

अमित शाह ने इस दौरान NDRF की वर्दी के भगवा रंग का जिक्र करते हुए कहा, “आपको थोड़ी तकलीफ होगी, लेकिन मैं कह सकता हूं कि NDRF की भगवा रंग की वर्दी लोगों को यह शांति देती है कि वे आ गए हैं और हम बच जाएंगे…” उनके इस बयान पर संसद में मिली-जुली प्रतिक्रिया देखने को मिली।

आपदा प्रबंधन विधेयक 2024 क्या है?

यह विधेयक आपदा प्रबंधन अधिनियम, 2005 में संशोधन के लिए लाया गया है। इसमें आपदा प्रबंधन तंत्र को और मजबूत बनाने, NDRF और SDRF (राज्य आपदा प्रतिक्रिया बल) की क्षमताओं को बढ़ाने तथा त्वरित राहत एवं पुनर्वास कार्यों को प्रभावी बनाने से जुड़े प्रावधान शामिल हैं।

अमित शाह के भगवा रंग पर दिए गए बयान को लेकर विपक्ष ने आपत्ति जताई। कांग्रेस, टीएमसी और अन्य दलों ने आरोप लगाया कि सरकार हर मुद्दे पर राजनीतिक रंग देने की कोशिश कर रही है। विपक्षी नेताओं ने कहा कि आपदा प्रबंधन एक संवेदनशील मुद्दा है और इसे राजनीति से अलग रखना चाहिए।

वहीं, भाजपा नेताओं ने शाह के बयान का समर्थन किया और कहा कि NDRF की पहचान और कार्यशैली ही जनता में भरोसा जगाती है, और इसे किसी विशेष रंग से जोड़कर विवाद नहीं खड़ा करना चाहिए।

NDRF देश में भूकंप, बाढ़, चक्रवात, भूस्खलन, औद्योगिक दुर्घटनाओं और अन्य आपदाओं के दौरान राहत एवं बचाव कार्यों में अग्रणी भूमिका निभाती है। पिछले कुछ वर्षों में NDRF ने उत्तराखंड, असम, केरल, ओडिशा, महाराष्ट्र और अन्य राज्यों में कई जटिल आपदा स्थितियों में लोगों की जान बचाने का कार्य किया ह

सोशल मीडिया पर इस बयान को लेकर मिली-जुली प्रतिक्रियाएँ सामने आ रही हैं। कुछ लोग इसे NDRF की बहादुरी का प्रतीक मान रहे हैं, तो कुछ इसे राजनीतिक एजेंडे से जोड़कर देख रहे हैं।

आपदा प्रबंधन (संशोधन) विधेयक 2024 को लेकर संसद में गहमागहमी बनी हुई है। जहां सरकार इसे आपदा राहत को मजबूत बनाने वाला कदम बता रही है, वहीं विपक्ष इसमें राजनीति की बू सूँघ रहा है। अब देखना होगा कि यह विधेयक किस स्वरूप में पारित होता है और इसका जमीनी प्रभाव कितना कारगर साबित होता है।

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