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प्रदेश में जल संकट गहराया: बड़े बांधों में जलभराव में भारी गिरावट, सरकार ने बुलाई उच्च स्तरीय बैठक…

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रायपुर: 24 मार्च 2025 (Sc टीम)

रायपुर। गर्मी की शुरुआत के साथ ही छत्तीसगढ़ में जल संकट के बादल गहराने लगे हैं। प्रदेश के छोटे और मध्यम स्तर के बांधों में जलभराव खतरनाक रूप से कम हो गया है, जिससे पेयजल और सिंचाई व्यवस्था पर गंभीर असर पड़ सकता है। जल संसाधन विभाग की रिपोर्ट के अनुसार, इस वर्ष राज्य के प्रमुख जलाशयों में जलभराव स्तर पिछले साल की तुलना में 20 से 39 प्रतिशत तक कम हो गया है।

गंगरेल और बांगो बांध में जलस्तर में भारी गिरावट

प्रदेश के सबसे बड़े जलाशयों में शामिल गंगरेल (रविशंकर सागर) और मिनीमाता बांगो बांध में जलभराव का स्तर तेजी से गिरा है। गंगरेल में वर्तमान में मात्र 58.59% पानी बचा है, जबकि पिछले वर्ष यह 77.93% था। इसी तरह, मिनीमाता बांगो में जलभराव 45.58% रह गया है, जो पिछले वर्ष 60.60% था। मुरुमसिल्ली बांध में भी जलभराव 33.75% रह गया है, जो 2024 में 72.56% था।

कोडार बांध की स्थिति सबसे चिंताजनक

महासमुंद जिले का कोडार जलाशय इस समय सबसे ज्यादा संकट में है। यहां जलभराव 19.87% ही बचा है, जबकि पिछले साल यह 31.99% था। अगर जलभराव का स्तर इसी गति से गिरता रहा, तो गर्मी के चरम समय में कई क्षेत्रों में गंभीर जल संकट खड़ा हो सकता है।

विधानसभा में गूंजा जल संकट, मुख्यमंत्री लेंगे उच्च स्तरीय बैठक

प्रदेश में जल संकट को लेकर विधानसभा में भी चर्चा हुई। भाजपा विधायक ने इस मुद्दे पर ध्यानाकर्षण प्रस्ताव लाया, जिस पर सत्ता और विपक्ष दोनों पक्षों के विधायकों ने चिंता जताई। जल संकट को लेकर मुख्यमंत्री विष्णु देव साय जल्द ही एक उच्च स्तरीय बैठक करेंगे, जिसमें जल संसाधन विभाग के अधिकारी और विशेषज्ञ जल संरक्षण और जल प्रबंधन को लेकर महत्वपूर्ण निर्णय लेंगे।

क्या है जल संकट की वजह?

विशेषज्ञों के अनुसार, इस बार दिसंबर और जनवरी में कम बारिश होने के कारण जलाशयों में जलस्तर तेजी से घट रहा है। इसके अलावा, भूजल स्तर में गिरावट, अनियंत्रित जल उपयोग और जल संरक्षण उपायों की कमी भी इस संकट को बढ़ा रही है।

जल संकट से निपटने के लिए क्या हो सकते हैं समाधान?

वाटर हार्वेस्टिंग को अनिवार्य किया जाए।

जलाशयों से अनावश्यक जल निकासी पर नियंत्रण रखा जाए।

भूजल स्तर बढ़ाने के लिए बड़े पैमाने पर पुनर्भरण परियोजनाएं लागू की जाएं।

जल संकट प्रभावित इलाकों में टैंकरों और वैकल्पिक जल स्रोतों की व्यवस्था की जाए।

प्रदेश में जल संकट को लेकर सरकार और प्रशासन की सतर्कता जरूरी है, क्योंकि आने वाले दिनों में स्थिति और गंभीर हो सकती है। अब देखना यह होगा कि सरकार इस संकट से निपटने के लिए कितने प्रभावी कदम उठाती है।

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