संविदा आयुष चिकित्सकों ने की 80-90 हजार वेतन की मांग, रायपुर में सरकार को दी चेतावनी…

रायपुर: 22 मार्च 2025 (भूषण )

छत्तीसगढ़ में कार्यरत संविदा आयुष चिकित्सकों ने वेतन वृद्धि और नियमितीकरण की मांग को लेकर सरकार के खिलाफ नाराजगी जताई है। छत्तीसगढ़ आयुर्वेदिक अधिकारी संघ के प्रांताध्यक्ष डॉ. पतंजलि दीवान ने प्रेस क्लब रायपुर में आयोजित पत्रकार वार्ता में कहा कि राज्य के आयुष चिकित्सक पिछले 20 वर्षों से दुर्गम और नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में अपनी सेवाएं दे रहे हैं, लेकिन उन्हें न तो सम्मानजनक वेतन मिल रहा है और न ही स्थायी नियुक्ति की गई है।

फार्मासिस्ट से भी कम वेतन, कैसे करें गुजारा?

डॉ. दीवान ने बताया कि सरकार ने हाल ही में आयुष चिकित्सकों के वेतन में 10,000 रुपए की वृद्धि की है, जिसके बाद भी उन्हें केवल 50 से 60 हजार रुपये प्रतिमाह वेतन मिल रहा है। जबकि, आयुष फार्मासिस्ट का वेतन 70-80 हजार रुपये है। उन्होंने कहा, “यह बेहद शर्मनाक है कि डॉक्टरों से अधिक वेतन उनके मातहत फार्मासिस्ट को मिल रहा है।”

कोरोना में कई चिकित्सकों ने दी जान, फिर भी उपेक्षा

आयुष चिकित्सकों ने कोरोना महामारी के दौरान अग्रिम पंक्ति में सेवाएं दीं, लेकिन उन्हें कोई विशेष प्रोत्साहन या आर्थिक सुरक्षा नहीं मिली। इस दौरान कई आयुष चिकित्सकों की मृत्यु भी हो गई, लेकिन सरकार ने उनकी कुर्बानी की अनदेखी की।

क्या हैं आयुष चिकित्सकों की मांगें?

संघ ने सरकार से निम्नलिखित मांगें रखी हैं:

  1. शहरी क्षेत्रों में 80,000 रुपये और ग्रामीण व नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में 90,000 रुपये प्रतिमाह वेतन दिया जाए।
  2. संविदा चिकित्सकों का नियमितीकरण किया जाए।
  3. सम्मानजनक भत्ते और सुविधाएं प्रदान की जाएं।
  4. चिकित्सकों के लिए बीमा और स्वास्थ्य सुरक्षा योजनाएं लागू की जाएं।

मुख्यमंत्री से मार्मिक अपील:

डॉ. दीवान ने मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय, विधानसभा अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह और वित्त मंत्री ओपी चौधरी से मांग की कि वे आयुष चिकित्सकों की उपेक्षा खत्म करें और उनकी जायज मांगों पर विचार करें।

संघ का अल्टीमेटम – नहीं मानी मांग तो होगा आंदोलन:

संघ ने सरकार को चेतावनी दी है कि यदि उनकी मांगों पर जल्द निर्णय नहीं लिया गया तो राज्यभर में आंदोलन छेड़ा जाएगा। इससे स्वास्थ्य सेवाएं प्रभावित हो सकती हैं, जिसकी जिम्मेदारी सरकार की होगी।

छत्तीसगढ़ में खासकर बस्तर जैसे आदिवासी इलाकों में संविदा आयुष चिकित्सकों पर पूरा स्वास्थ्य ढांचा टिका हुआ है, लेकिन वेतन असमानता और सरकारी उदासीनता के कारण उनकी मानसिक और आर्थिक स्थिति खराब हो रही है। अब देखना होगा कि सरकार इस पर क्या रुख अपनाती है।

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