रायपुर: आईसीआईसीआई बैंक लिमिटेड के गोल्ड लोन विभाग के खिलाफ धोखाधड़ी और आपराधिक न्यास भंग का मामला दर्ज किया गया है। न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम श्रेणी, रायपुर (छ.ग.) भारती कुलदीप के आदेश पर सिविल लाइन थाना पुलिस ने बैंक और उसके संबंधित अधिकारियों के विरुद्ध भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 409, 417, 418, 420, 465 और 192 के तहत एफआईआर दर्ज की है।
क्या है मामला?
रायपुर के देवेंद्र नगर निवासी अंकित अग्रवाल ने शिकायत दर्ज कराई थी कि उन्होंने आईसीआईसीआई बैंक से लगभग 14 लाख रुपये का गोल्ड लोन लिया था। इसके लिए उन्होंने अपनी माता, पत्नी और भाभी के सोने के गहने गिरवी रखे थे।
कोविड-19 महामारी के दौरान वे कुछ समय तक लोन की किश्तें नहीं भर पाए, लेकिन बाद में उन्होंने ब्याज और मूलधन का भुगतान करना शुरू कर दिया। आरोप है कि बैंक ने बिना किसी पूर्व सूचना के उनके गहनों की नीलामी कर दी, जो भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) के नियमों का उल्लंघन है।
फर्जी हस्ताक्षर का आरोप:
शिकायतकर्ता का दावा है कि लोन के अनुबंध पर उनके असली हस्ताक्षर मौजूद नहीं थे। बल्कि, बैंक अधिकारियों ने फर्जी हस्ताक्षर कर दस्तावेज तैयार किए और इस आधार पर गहनों की नीलामी कर दी।
न्यायालय का आदेश और पुलिस कार्रवाई:
शिकायत पर सुनवाई के बाद न्यायालय ने सिविल लाइन थाना पुलिस को एफआईआर दर्ज कर जांच करने का आदेश दिया। न्यायालय के निर्देश के बाद बैंक के गोल्ड लोन विभाग और संबंधित अधिकारियों पर मामला दर्ज कर लिया गया है।
अब आगे क्या?
अब पुलिस जांच में यह स्पष्ट होगा कि—
✔ बैंक ने गहनों की नीलामी से पहले ग्राहक को उचित सूचना दी थी या नहीं?
✔ क्या अनुबंध पर फर्जी हस्ताक्षर किए गए थे?
✔ क्या बैंक ने RBI के दिशानिर्देशों का पालन किया था?
इस मामले में अब कानूनी प्रक्रिया आगे बढ़ेगी और जांच के बाद ही यह साफ हो सकेगा कि बैंक अधिकारियों पर क्या कार्रवाई होगी। यह मामला न केवल बैंकिंग प्रणाली की पारदर्शिता पर सवाल उठाता है, बल्कि ग्राहकों के हितों की सुरक्षा को लेकर भी महत्वपूर्ण साबित हो सकता है।
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