भिलाई : 15 मार्च 2025 (रिपोर्ट: भिलाई संवाददाता)
भिलाई: लोकतंत्र का चौथा स्तंभ माने जाने वाले पत्रकार हमेशा समाज की आवाज बनते हैं। लेकिन जब एक पत्रकार, जो पशुप्रेमी भी है, बेजुबान जानवरों को बचाने की कोशिश करता है और इसके बदले उसे ही हिंसा और दुर्व्यवहार का सामना करना पड़ता है, तो यह समाज के लिए चिंता का विषय बन जाता है। ऐसा ही एक मामला छत्तीसगढ़ के एजुकेशन हब कहे जाने वाले भिलाई में गुरुवार को सामने आया।
घटना का विवरण:
भिलाई के दीनदयाल कॉलोनी, जुनवानी रोड निवासी पत्रकार और पशुप्रेमी लाभेश घोष ने बताया कि जब उन्होंने स्मृति नगर चौकी क्षेत्र में पशु क्रूरता के खिलाफ आवाज उठाई, तो जम्मू-कश्मीर के एक नामी स्कूल के प्रिंसिपल सचिन शुक्ला और उनके पड़ोसी अवनीश कुमार ने उन पर हमला कर दिया। आरोपियों ने न केवल गाली-गलौज की, बल्कि उनका मोबाइल छीन लिया और शारीरिक रूप से प्रताड़ित किया।
लाभेश घोष के अनुसार, उन्होंने केवल एक इंसान के रूप में अपना फर्ज निभाने का प्रयास किया था, लेकिन इसके बदले उन्हें मानसिक और शारीरिक रूप से प्रताड़ित किया गया। इस घटना से भिलाई के पत्रकारों में आक्रोश व्याप्त है और वे आरोपियों की जल्द से जल्द गिरफ्तारी की मांग कर रहे हैं।
पुलिस कार्रवाई:
इस मामले में स्मृति नगर चौकी पुलिस ने भारतीय दंड संहिता (BNS) की धारा 296, 115(2) और 3(5) के तहत जीरो में मामला दर्ज किया है। हालाँकि, अब तक आरोपियों की गिरफ्तारी नहीं हुई है, जिससे पत्रकारों और सामाजिक कार्यकर्ताओं में नाराजगी है।
शिक्षक द्वारा हिंसा – समाज के लिए गंभीर सवाल
सबसे चिंताजनक तथ्य यह है कि आरोपी सचिन शुक्ला एक शिक्षक हैं और वर्तमान में जम्मू-कश्मीर की किसी डीएवी स्कूल शाखा में प्रिंसिपल के पद पर कार्यरत हैं। शिक्षा का मूल उद्देश्य समाज को नैतिकता, करुणा और अहिंसा का पाठ पढ़ाना होता है, लेकिन जब एक शिक्षक स्वयं हिंसा करता है, तो यह पूरे शिक्षा तंत्र और समाज के लिए गंभीर सवाल खड़े करता है।
पशु क्रूरता के खिलाफ कानून:
- पशु क्रूरता निवारण अधिनियम, 1960: इस अधिनियम के तहत पशुओं के साथ किसी भी प्रकार की क्रूरता गैरकानूनी है और दोषियों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जा सकती है।
- BNS 325: किसी भी पशु को गंभीर चोट पहुँचाना अपराध है और इसके लिए कठोर दंड का प्रावधान है।
- भारतीय संविधान का अनुच्छेद 51(G): प्रत्येक नागरिक को यह मूलभूत अधिकार प्राप्त है कि वह पशुओं को भोजन करा सकता है और उनकी सुरक्षा सुनिश्चित कर सकता है। किसी को भी उन्हें मारने या प्रताड़ित करने का अधिकार नहीं है।
न्याय की मांग और सामाजिक संदेश:
पत्रकार लाभेश घोष ने प्रशासन और कानून से अपील की है कि सचिन शुक्ला और अवनीश कुमार के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाए, ताकि भविष्य में इस तरह की घटनाएँ न दोहराई जाएँ।
“मैं सभी सामाजिक कार्यकर्ताओं, पत्रकारों और जागरूक नागरिकों से अपील करता हूँ कि इस मामले को गंभीरता से लें और न्याय के लिए अपनी आवाज़ बुलंद करें।” – लाभेश घोष
यह घटना सिर्फ एक व्यक्ति पर हमला नहीं है, बल्कि यह समाज की नैतिकता और न्याय व्यवस्था की परीक्षा भी है। यदि आज इस अन्याय के खिलाफ आवाज नहीं उठाई गई, तो कल यही हिंसा समाज के अन्य कमजोर वर्गों को भी निशाना बना सकती है।
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