दुर्ग: 13 मार्च 2025 (स्वतंत्र छत्तीसगढ़)
शिक्षा, कला और साहित्य को समर्पित शिक्षा कला व साहित्य अकादमी छत्तीसगढ़ का वार्षिक सम्मेलन “शिक्षा महोत्सव 2025” भव्य रूप से भारती विश्वविद्यालय, पुलगांव (दुर्ग) में संपन्न हुआ। इस अवसर पर शिक्षा और समाज सेवा के क्षेत्र में उत्कृष्ट योगदान देने वाली हस्तियों को सम्मानित किया गया।
छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर से स्वराद्य संगीत कला निकेतन की संचालिका श्रीमती अनामिका चक्रवर्ती (सुनीति) को उनकी कृति “मैं शिक्षक हूँ” के लिए “शिक्षा दूत” सम्मान से नवाजा गया। यह सम्मान उन्हें उपस्थित गणमान्य अतिथियों के करकमलों से प्रदान किया गया।
सम्मेलन में गणमान्य अतिथियों की उपस्थिति
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि विजय बघेल (सांसद, दुर्ग लोकसभा) ने शिक्षा के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि शिक्षकों की भूमिका समाज निर्माण में सबसे महत्वपूर्ण होती है। उन्होंने शिक्षकों को समाज का मार्गदर्शक बताया और शिक्षा के प्रसार में उनके योगदान की सराहना की।
कार्यक्रम की अध्यक्षता गजेन्द्र यादव (विधायक, दुर्ग शहर) ने की। वहीं, अतिविशिष्ट अतिथि के रूप में ललित चंद्राकर (विधायक, दुर्ग ग्रामीण), अलका बाघमार (महापौर, नगर निगम दुर्ग) तथा जागेश्वरी मेश्राम (छत्तीसगढ़ी फिल्म अभिनेत्री) भी उपस्थित रहीं।
शिक्षा और समाज सेवा पर हुई चर्चा
इस सम्मेलन में शिक्षा, कला और साहित्य के महत्व पर गहन चर्चा की गई। वक्ताओं ने शिक्षा के स्तर को और बेहतर बनाने, सामाजिक सुधार में शिक्षकों की भूमिका और साहित्य के जरिए समाज में बदलाव लाने पर अपने विचार रखे।
“शिक्षा महोत्सव 2025” में कई शिक्षाविदों, साहित्यकारों और समाजसेवियों की भागीदारी रही। इस अवसर पर कई सांस्कृतिक और साहित्यिक प्रस्तुतियां भी हुईं, जिससे माहौल और भी प्रेरणादायक बन गया।
सम्मानित हस्तियों को मिली सराहना
शिक्षा दूत सम्मान प्राप्त करने पर अनामिका चक्रवर्ती (सुनीति) ने अपनी खुशी व्यक्त करते हुए कहा कि यह सम्मान उन्हें और अधिक प्रेरणा देगा और वे शिक्षा और समाज सेवा के क्षेत्र में अपने प्रयास जारी रखेंगी।
शिक्षा महोत्सव 2025 ने यह साबित किया कि शिक्षा, कला और साहित्य समाज के निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। इस तरह के आयोजन न केवल शिक्षकों और समाजसेवियों को प्रोत्साहित करते हैं, बल्कि शिक्षा के क्षेत्र में नए आयाम स्थापित करने की प्रेरणा भी देते हैं।
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