विदेशी निवेश से शेयर बाजार में अस्थिरता! सांसद बृजमोहन ने संसद में उठाया घरेलू निवेशकों का मुद्दा…

नई दिल्ली/रायपुर: 12 मार्च 2025 (SC टीम)

भारतीय शेयर बाजार में विदेशी निवेश लगातार बढ़ रहा है, लेकिन क्या यह घरेलू निवेशकों के लिए खतरा बन सकता है? रायपुर लोकसभा सांसद एवं वरिष्ठ भाजपा नेता बृजमोहन अग्रवाल ने संसद में यह मुद्दा उठाया और सरकार से घरेलू निवेशकों की सुरक्षा को लेकर जवाब मांगा।

सांसद ने पूछा – क्या विदेशी निवेश बढ़ा रहा है बाजार में अस्थिरता?

सांसद बृजमोहन अग्रवाल ने संसद में सरकार से सवाल किया कि विदेशी संस्थागत निवेशकों (FII) के बढ़ते प्रभाव से भारतीय शेयर बाजार में अस्थिरता आ रही है या नहीं? उन्होंने जानना चाहा कि सरकार घरेलू निवेशकों के हितों की रक्षा के लिए क्या कदम उठा रही है।

सरकार का जवाब – बाजार पर कई कारकों का प्रभाव

संसद में वित्त राज्य मंत्री पंकज चौधरी ने बताया कि भारतीय शेयर बाजार की चाल कई कारकों पर निर्भर करती है, जिसमें विदेशी पूंजी प्रवाह, घरेलू अर्थव्यवस्था, वैश्विक बाजार की स्थिति और निवेशकों की मानसिकता शामिल है। उन्होंने बताया कि SEBI (भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड) बाजार की स्थिरता बनाए रखने और निवेशकों के हितों की रक्षा के लिए प्रभावी नियामक तंत्र लागू कर रहा है।

घरेलू निवेशकों की भागीदारी भी बढ़ी

मंत्री ने संसद में आंकड़े प्रस्तुत करते हुए बताया कि—2023 में विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (FPI) ने भारतीय शेयर बाजार में ₹1,71,107 करोड़ का निवेश किया। जून 2024 से दिसंबर 2024 के बीच FPI निवेश ₹23,791 करोड़ रहा। 2023 में घरेलू संस्थागत निवेशकों (DII) ने ₹1,83,278 करोड़ का निवेश किया, जबकि जून-दिसंबर 2024 के बीच यह आंकड़ा ₹3,12,988.59 करोड़ तक पहुंच गया।

सांसद बृजमोहन की मांग – घरेलू निवेशकों के लिए ठोस नीति बने

बृजमोहन अग्रवाल ने चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि सरकार को घरेलू निवेशकों की सुरक्षा को प्राथमिकता देनी चाहिए। उन्होंने मांग की कि विदेशी निवेश से होने वाली अस्थिरता को नियंत्रित करने के लिए ठोस नीति बनाई जाए और घरेलू निवेशकों को अधिक अवसर व सुरक्षा मिले।

क्या कहती है सरकार?

सरकार का कहना है कि SEBI और अन्य नियामक संस्थाएं बाजार में पारदर्शिता बनाए रखने और अस्थिरता को नियंत्रित करने के लिए सतर्क हैं। हालांकि, इस मुद्दे पर निवेशकों और विशेषज्ञों की राय बंटी हुई है। अब देखना होगा कि सरकार इस दिशा में क्या ठोस कदम उठाती है।

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