जशपुर : 12 मार्च 2025 (आनंद गुप्ता )
छत्तीसगढ़ के जशपुर जिले के आगडीह हवाई पट्टी पर अब राष्ट्रीय कैडेट कोर (NCC) के कैडेट्स को हवा में उड़ान भरने का सुनहरा अवसर मिल रहा है। 3 सीजी एयर स्क्वाड्रन, रायपुर के बैनर तले इस विशेष प्रशिक्षण कार्यक्रम की शुरुआत की गई है। यह पहला मौका है जब फ्लाइंग ट्रेनिंग की सुविधा रायपुर के अलावा जशपुर तक विस्तारित की गई है। इससे पहले यह प्रशिक्षण केवल रायपुर के माना एयरपोर्ट तक सीमित था।
एविएशन क्षेत्र में करियर बनाने का बड़ा अवसर
इस प्रशिक्षण कार्यक्रम में एनसीसी के सीनियर डिवीजन के लड़के और लड़कियां दोनों शामिल हैं। इन्हें टू-सीटर माइक्रो लाइट एयरक्राफ्ट के माध्यम से उड़ान भरने का अनुभव दिया जा रहा है। कैडेट्स को हवाई जहाज उड़ाने, रनवे पर लैंडिंग करने और विमान के कॉकपिट व उसके विभिन्न हिस्सों के संचालन की बुनियादी जानकारी प्रदान की जा रही है। यह प्रशिक्षण उन युवाओं के लिए एक बड़ा अवसर साबित हो सकता है, जो भविष्य में एविएशन क्षेत्र में करियर बनाना चाहते हैं।
100 कैडेट्स को मिलेगा प्रशिक्षण
इस पायलट प्रोजेक्ट के तहत एनसीसी एयर विंग के कैडेट्स को उच्च स्तरीय प्रशिक्षण और विमानन सुरक्षा की पूरी गारंटी दी गई है। 2007 बैच के विंग कमांडर विवेक कुमार साहू के नेतृत्व में इस प्रशिक्षण कार्यक्रम का संचालन किया जा रहा है। विंग कमांडर साहू ने बताया कि यह प्रशिक्षण 7 मार्च से शुरू किया गया है और इस महीने के अंत तक कुल 100 कैडेट्स को विमान उड़ाने और नियंत्रण करने का प्रशिक्षण दिया जाएगा।
जशपुर का शांत वातावरण प्रशिक्षण के लिए अनुकूल
पहले यह प्रशिक्षण केवल रायपुर के माना एयरपोर्ट पर होता था, लेकिन वहां एयर ट्रैफिक के बढ़ते दबाव के कारण प्रशिक्षण में बाधाएं आ रही थीं। इसे ध्यान में रखते हुए, एनसीसी निदेशालय ने इसे प्रदेश के किसी अन्य छोटे हवाई अड्डे पर स्थानांतरित करने का निर्णय लिया। जशपुर के आगडीह हवाई पट्टी का शांत वातावरण और सुगम रनवे इस प्रशिक्षण के लिए आदर्श साबित हुआ है।
कैडेट्स ने साझा किए अपने अनुभव
इस प्रशिक्षण में शामिल कैडेट उमेश कुमार साहू ने कहा, “हमें जशपुर में उड़ान भरने का सुनहरा अवसर मिला है। यह प्रशिक्षण हमारे लिए एक सपने के सच होने जैसा है। हमें विमान के तकनीकी पहलुओं और उड़ान तकनीक की बारीकियों को सीखने का मौका मिल रहा है।”
रायपुर से आईं कैडेट संजू सिन्हा ने अपने अनुभव साझा करते हुए कहा, “मैं भविष्य में फ्लाइंग ऑफिसर बनना चाहती हूं। जशपुर की शांत फिजा में पायलट के बगल में को-पायलट के रूप में प्रशिक्षण प्राप्त करना एक अनूठा अनुभव है। यहाँ सुरक्षा और सुविधा के बेहतरीन इंतजाम किए गए हैं।”
ट्रेनिंग में उपयोग हो रहा टू-सीटर माइक्रो लाइट एयरक्राफ्ट
इस प्रशिक्षण के लिए जिस टू-सीटर माइक्रो लाइट एयरक्राफ्ट का उपयोग किया जा रहा है, वह प्रति घंटे 13 लीटर ईंधन की खपत करता है। इसकी एविएशन फ्यूल कैपेसिटी 50 लीटर है और यह अधिकतम 20,000 फीट की ऊंचाई तक उड़ान भर सकता है। हालांकि, प्रशिक्षु कैडेट्स को इसे फिलहाल 1,000 फीट की ऊंचाई तक उड़ाने का प्रशिक्षण दिया जा रहा है।
एविएशन क्षेत्र के लिए मील का पत्थर साबित होगा यह प्रशिक्षण
यह पहल राज्य में दीर्घकालिक विमानन प्रशिक्षण अवसंरचना विकसित करने की व्यापक योजना का हिस्सा है। जैसे-जैसे यह कार्यक्रम आगे बढ़ेगा, इसके लिए अतिरिक्त सुविधाओं और संसाधनों का विकास किया जाएगा, जिससे छत्तीसगढ़ के अधिक से अधिक कैडेट्स को व्यावसायिक फ्लाइंग प्रशिक्षण का लाभ मिल सकेगा। यह कदम राज्य में एविएशन प्रतिभाओं को प्रोत्साहित करने, भारतीय वायुसेना और विमानन क्षेत्र में युवाओं के उज्ज्वल भविष्य के लिए आवश्यक कौशल प्रदान करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि साबित होगा।
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